काॅफी टेबल बुक में नजर आएंगे नागौर के पर्यटन स्थल जिला कलक्टर ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

हैरिटेज टूरिज्म, बर्ड टूरिज्म और इको टूरिज्म पर वर्किंग प्लान से होगा काम

विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। अहिछत्रपुर फोर्ट, जड़ा तालाब, कुचामन फोर्ट, सांभर लेक, दधिमति माता मंदिर, मीरा बाई स्मारक व वीर तेजाजी के मंदिर तथा राव अमरसिंह राठौड़ की छतरियां…सरीखे पर्यटन स्थल अब काॅफी टेबल बुक में नजर आएंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग और पुरातत्व विभाग, दोनों संयुक्त रूप से काम करेंगे और कई सदियों का पुरामहत्व लिए यहां के ऐतिहासिक और धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की उम्दा फोटोग्राफी करवाएंगे और उन छायाचित्रों को काॅफी टेबल बुक में प्रदर्शित करेंगे। यह सब प्रयास किया जा जाएगा पर्यटन स्थलों को संरक्षित और विश्व स्तर पर प्रसिद्ध करने के लिए।
जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने नागौर को पर्यटन के विश्व मानचित्र पर लाने के लिए सोमवार को जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में इस आशय के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। यहां के गांवों में विद्यमान सदियों पुरानी छतरियों व अन्य पुरासम्पदाओं को संरक्षित करने के लिए उनसे संबंधित परिवारों, संस्थाओं अन्यथा भामाशाहों को प्रेरित करने पर काम होगा। जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि नागौर जिले में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं, इसके लिए हैरिटेज टूरिज्म, बर्ड टूरिज्म और इको टूरिज्म पर कार्ययोजना बनाकर काम करना होगा।
जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने कहा कि सांभर व डीडवाना लेक पर बर्ड टूरिज्म, रोटू व गोगेलाव में इको टूरिज्म, डीडवाना, कुचामन व परबतसर क्षेत्र में हैरिटेज टूरिज्म तथा खरनाल, गोठ मांगलोद, पींपासर व मेड़ता को प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर काम किया जाएगा।
जिला कलक्टर ने कहा कि नागौर जिले में पुरामहत्व के अनेक भवन यथा किले, महल, हवेलियां एवं भवन स्थित है। इन भवनों के स्वामी अपनी संपत्तियों को पर्यटन इकाईयों के रूप में संचालित करना चाहते हैं तो पर्यटन विभाग उनको प्रोत्साहित करते हुए पूरा सहयोग करे। डाॅ. सोनी ने निर्देश दिए कि नागौर जिले के गांवों में कई जगह प्राचीन तालाब और छतरियां हैं, उनको संरक्षित करने पर भी काम करते हुए पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया जाए। इस दौरान जिला पर्यटन विकास समिति की गत बैठक की अनुपालना रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई।

गीतड़ा अर भींतड़ा ने बचाणो जरूरी है...

इतिहास, कला और संस्कृति के संरक्षण की बात पर जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी मायड़ भाषा की लोकोक्ति गीतड़ा अर भींतड़ा (मतलब हमारे पुराने गीत-ख्याल-नाट्य कलाएं, प्राचीन हवेलियां, महल और पुरास्थल)ने बचाणो जरूरी है, बोलते हुए कहा कि नागौर की स्थानीय कला व संस्कृति पर एक विशेष प्रकार की डाॅक्युमेंट्री तैयार की जाए। उन्होंने नागौर के पर्यटन स्थलों का सोशल मीडिया यथा टवीट्, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि पर यथोचित प्रचार-प्रसार किए जाने के निर्देश दिए। विभाग के उपनिदेशक अजय शर्मा ने बताया कि नागौर जिले में पुरामहत्व के अनेक भवन यथा किले, महल, हवेलियां एवं भवनों के स्वामी, जो अपनी संपत्तियों को पर्यटन इकाईयों के रूप में संचालित करना चाहते हैं तो पर्यटन विभाग के अजमेर कार्यालय के दूरभाष नं. 0145-2627426 पर संपर्क कर सकते है तथा ईमेल आईडी जतब.ंरउमत/तंरंेजींद.हवअ.पद पर भी आवेदन कर सकते हैं। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जवाहर चौधरी, सानिवि के अधीक्षण अभियंता चांदकरण बसंल, नगर परिषद के अधिशासी अभियंता रामप्रसाद मीणा, सहायक निदेशक पर्यटन योगेश खत्री, नीरज कुमार त्रिपाठी, पुरातत्व विभाग, अजमेर, सहायक पर्यटन अधिकारी प्रद्युम्न देथा, सहायक वन संरक्षक सुनील गौड़ शामिल हुए |