विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत आयोजित लोक अदालत में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) जवाहर नगर शाखा, बीकानेर के खिलाफ दायर मामले में एडवोकेट विमल व्यास ने अपने क्लाइंट किशन कुमार सोनी के हित में जीत हासिल की है। अदालत ने बैंक प्रबंधक को एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के क्लेम की राशि 9,97,000 रुपये का भुगतान करने का सख्त निर्देश दिया है।
मामला किशन कुमार सोनी का है, जिन्होंने 30.03.2015 को एसबीआई से 29.52 लाख रुपये का होम लोन लिया था। लोन के साथ जुड़ी एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी (पॉलिसी नंबर 6126845026) के तहत बीमा कवरेज सुनिश्चित था। किशन कुमार की असामयिक मृत्यु (09.09.2022) के बाद उनके उत्तराधिकारियों ने क्लेम दावा किया, लेकिन बैंक ने विभिन्न बहानों से भुगतान में देरी की। एडवोकेट व्यास ने लोक अदालत (अवधान संख्या 265/24) में याचिका दायर कर तर्क दिया कि बैंक ने बीमा दस्तावेजों को ठीक से संभाला न होने का बहाना बनाया, जबकि पॉलिसी के नियमों के अनुसार क्लेम तत्काल निपटारा होना चाहिए।
लोक अदालत की अध्यक्षता में वकील विमला रामावत ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंक को 1 वर्ष की प्रीमियम राशि (लगभग 5,000 रुपये) सहित कुल क्लेम राशि का भुगतान 20 नवंबर 2023 तक करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि देरी पर 8% ब्याज लगेगा। फैसले में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे क्लेम प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएं।
एडवोकेट विमल व्यास ने फैसले पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा, “यह निर्णय न केवल मेरे क्लाइंट के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि अन्य बीमा क्लेमधारकों के लिए भी मिसाल कायम करता है। बैंक को ग्राहक हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” लोक अदालत ने मामले को सुलझाकर पक्षकारों के बीच समझौता कराया, जिससे अदालती प्रक्रिया की जटिलताओं से बचा जा सका।













