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रमल ज्योतिष विद्या का मानवीय जीवन पर प्रभावशाली असर : पंडित नितेश व्यास

विनय थानवी||अपडेट: 8 जून 2026|2 मिनट पढ़ें
रमल ज्योतिष विद्या का मानवीय जीवन पर प्रभावशाली असर : पंडित नितेश व्यास
रमल ज्योतिष आलेख, पंडित नितेश व्यास ।भारतवर्ष में ज्योतिष शास्त्र की अनेक पद्धतियाँ प्रचलित हैं, जिनमें वैदिक ज्योतिष को माँ का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि यह वेदों का अभिन्न अंग है। वेदों में ज्योतिष को 'नेत्र' कहा गया है, अर्थात् बिना नेत्र के जीवन अधूरा है। ठीक उसी प्रकार, ज्योतिष का सटीक ज्ञान और उसका फल जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष के अतिरिक्त पाराशरी, के.पी., नाड़ी, मेदिनी, रमल, टैरो, अंक विद्या, और वास्तु जैसी विविध पद्धतियाँ प्रचलित हैं। इनमें रमल ज्योतिष एक प्राचीन और गहन विद्या है, जिसके जानकार आजकल कम ही देखने को मिलते हैं। रमल ज्योतिष को अक्सर अरब-फारसी पद्धति माना जाता है, परंतु वास्तव में यह सनातन संस्कृति की जड़ों से जुड़ी है। यह विद्या शिव-पार्वती के पाशों (पासों) के माध्यम से भविष्यवाणी की परंपरा से प्रेरित है और साधना पर आधारित है। बीकानेर के विख्यात रमलाचार्य नितेश व्यास, जो डेढ़ दशक से ज्योतिष का अध्ययन कर रहे हैं, बताते हैं कि रमल ज्योतिष में सोलह भावों का वर्णन है। इनमें अंतिम भाव को 'साक्षी घर' कहा जाता है। इस विद्या में प्रथम शक्ल 'लह्यान' होती है, जो गुरु ग्रह से संबंधित है। शुभ मुहूर्त में पासे फेंककर सोलह भावों की गणना की जाती है, जिसके आधार पर प्रश्नकर्ता के प्रश्नों का उत्तर और समय का निर्णय किया जाता है।रमल ज्योतिष में रमल बावनी, बत्तीसी, गुलजार, रमल शलाका, और रमल कार्ड जैसी विधियाँ शामिल हैं। रमलाचार्य नितेश व्यास इनका उपयोग जनकल्याण के लिए कर रहे हैं। यह विद्या दिन के डेढ़ प्रहर तक और विशेष तिथियों पर प्रयोग की जाती है। रमल ज्योतिष की विशेषता यह है कि यह बिना प्रश्न पूछे ही प्रश्नकर्ता के मन की बात का जवाब दे सकती है। इसमें किसी फल, वस्तु या नाम के आधार पर गणना की जाती है। [caption id="attachment_21777" align="aligncenter" width="866"] पंडित नितेश व्यास (एस्ट्रो भा)[/caption] रमलाचार्य नितेश व्यास ने बीकानेर में अनेक ज्योतिषियों को रमल कार्ड पद्धति का प्रशिक्षण दिया है और निरंतर यह कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वे रमल ज्योतिष की आठ से नौ विधियों पर कार्य कर रहे हैं और इस विषय पर पुस्तक भी लिख रहे हैं। उनकी यह साधना और समर्पण रमल ज्योतिष को पुनर्जनन प्रदान कर रहा है।    

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