विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर: रामायण के खलनायक रावण का किरदार न केवल भयभीत करता है, बल्कि अपनी विशाल काया और बुलंद अट्टहास से हर किसी का ध्यान खींचता है। बीकानेर के दशहरा महोत्सव में सजीव झांकियों का आकर्षण तब और बढ़ जाता है, जब आहूजा परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी रावण की भूमिका निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध करता है।

इस परिवार ने न केवल इस किरदार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि ‘रावण परिवार’ के नाम से ख्याति भी अर्जित की है।आहूजा परिवार के सदस्य के. कुमार आहूजा बताते हैं कि उनके दादा स्वर्गीय माधव दास आहूजा ने इस परंपरा की नींव रखी। उन्होंने वर्षों तक अपनी बुलंद आवाज और प्रभावशाली अभिनय से रावण के किरदार को जीवंत किया और शहरवासियों का मनोरंजन किया। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए परिवार के सदस्य और पूर्व आयकर अधिकारी शिवाजी आहूजा ने 25 वर्षों तक रावण की भूमिका निभाई।

उनके उत्कृष्ट अभिनय और पात्र के अनुरूप हाव-भाव ने इस किरदार को नई पहचान दी।वर्तमान में के. कुमार आहूजा पिछले 23 वर्षों से दशहरा महोत्सव में रावण का किरदार निभा रहे हैं। अपने विशाल कद-काठी, खतरनाक अट्टहास और हास्य के अनूठे मिश्रण से उन्होंने रावण की पारंपरिक भयावह छवि को बदलने का प्रयास किया है। युद्ध के लिए राम-लक्ष्मण को ललकारने के साथ-साथ वे बच्चों को टॉफी और बिस्किट बांटकर उनका दिल भी जीतते हैं। आहूजा परिवार को बीकानेर में ‘रावण परिवार’ के नाम से जाना जाता है। के. कुमार आहूजा की पत्नी को लोग प्यार से ‘मंदोदरी भाभी’ कहकर पुकारते हैं, जो परिवार के लिए गर्व का विषय है। इस दशहरे पर भी के. कुमार आहूजा रावण के किरदार में शहरवासियों का मनोरंजन करेंगे और आहूजा परिवार की इस स्वर्णिम परंपरा में एक और अध्याय जोड़ेंगे।













