js_composer domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home2/vokunju1/public_html/vinayexpress.in/wp-includes/functions.php on line 6170उनका खौफ अपराधियों में इस कदर था कि अपराधी उनके जिले में तैनात होते ही भाग जाते थे। यही वजह है वह हमेशा से अधिकारियों के चहेते पुलिसकर्मी रहे है।
विष्णु दत्त जी का मानना था- लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
विष्णु दत्त जी के बारे में कहा जाता है कि वह जिस जिले में तैनाती पाते हैं वहां से अपराधी या तो बेल तुड़वाकर जेल चले जाते हैं या फिर जिला छोड़ देते हैं।
कई बार डराने की कोशिशों के बाद भी विष्णु दत्त जी का इरादा कमज़ोर नहीं हुआ। कई वाकये हुए जब अपराधियों पर सख्ती के कारण उनका तबादला भी हुआ, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी शैली में बदलाव नहीं किया|
लेकिन अब यह अधिकारी हमारे बीच नहीं है
विष्णु दत्त जी को अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैये के लिए जाना जाता था।
अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ता है तो पूरी व्यवस्था ही उसके खिलाफ हो जाती है।
इनके अलावा भी छोटे-बड़े स्तर पर कितने ही अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की मुखालफत करने का खामियाजा भुगता है, कभी अपनी जान देकर तो कभी सिस्टम से प्रताड़ित होकर।
ऐसे में सवाल उठता है कि एक तरफ तो सरकारें भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचारियों को क्षय (Shelter) दी जा रही है ? बहरहाल यदि हमें देश से भ्रष्टाचार को मिटाना है तो ईमानदार अधिकारियों का समर्थन करना होगा और सरकारों पर दबाव बनाना होगा ताकि भ्रष्टाचारियों को राजनैतिक समर्थन ना मिल सके।
उन मामलों का भी पता नहीं चलता जिनके बारे में खुलासा करते हुए ये अफसर जान देते हैं।
एक बार फिर से यह सिद्ध कर दिया है कि अब इस देश में ईमानदारी से काम करना कठिन होता जा रहा है.
दरअसल अब मान लेना चाहिए कि भ्रष्टाचार को लेकर समाज और सियासत का पक्का गठजोड़ है। जब तक इस गठजोड़ को नहीं तोड़ा जाएगा, ईमानदार अफसर मारे जाते रहेंगे।
आज की इस व्यवस्था में ऐसे जांबाज और ईमानदार और तथा सजग और कर्तव्यनिष्ठ सिपाही हम लोगों ने खो दिया । सरकार से सी बी आई जांच की मांग जिससे वास्तविकता सामने आये|

आशीष नाथ-अधिवक्ता
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राजस्थान महामारी अध्यादेश-2020 लागूरू राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजस्थान महामारी अध्यादेश, 2020 पर एक मई को हस्ताक्षर किया, जिसमें महामारी को रोकने के लिए सख्त कानूनी सजा का प्रावधान है.
कानून के उल्लंघन पर दस हजार रुपए तक जुर्माना या दो साल की सजा तक हो सकेगी
एक आदेश के तहत अब पुलिस के एएसआई व इससे वरिष्ठ अधिकारियों को जुर्माना वसूलने का अधिकार दिया गया है।
अब पुलिस स्वप्रेरणा से अपराध दर्ज कर सकेगी।
धारा 3 के तहत इस कानून के तहत राज्य सरकार के साथ ही जिला कलेक्टरों को कई शक्तियां दी गई है.
धारा 4 के तहत महामारी का उल्लंघन करने पर जुर्माना वसूला जाएगा.
सार्वजनिक या कार्यस्थल पर फेस मास्क व फेस कवर नहीं पहनने वाले व्यक्ति पर =200 रुपए
किसी दुकानदार की ओर से बिना मास्क व फेस कवर किए ग्राहक को सामान देने पर =500 रुपए,
सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर 200 रुपए,
शराब पीते पाए जाने पर =500 रुपए,
तंबाकू उत्पाद बेचते पाए जाने पर 1000 रुपए का जुर्माना वसूल किया जाएगा।
सार्वजनिक स्थान पर न्यूनतम 6 फीट की दूरी नहीं रखने पर 100 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
उपखंड मजिस्ट्रेट को लिखित में पूर्व सूचना दिए बिना विवाह या अन्य आयोजन पर 5000 रुपए जुर्माना, विवाह समारोह में 50 से अधिक व्यक्ति होने पर 10000 रुपए जुर्माना लगेगा.
धारा-4 की उपधारा 2 के अनुसार= किसी भी प्रथा या कृत्य के तहत भीड़ एकत्र होने से रोकने, व्यक्ति को क्वॉरंटीन करने, क्वॉरंटीन सेंटर बनाने, निरीक्षण, राज्य की सीमाओं को सील करने, लोक परिवहन के वाहनों को नियमित करने, सामाजिक दूरी बनाने, धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ एकत्र करने से रोकने, सरकारी एवं निजी कार्यस्थल पर काम करने वालों को प्रतिबंधित करना, दुकानों एवं व्यावसायिक कार्यालयों को खोलने व बंद करने, आवश्यक सेवाओं में मीडिया व स्वास्थ्य सहित अन्य को लेकर इसमें कार्रवाई की जा सकेगी..
नए अध्यादेश के जरिए हवाई, रेल, सड़क या किसी अन्य माध्यम से राज्य में आने वाले व्यक्तियों का निरीक्षण, किसी भी ऐसी बीमारी से संक्रमित होने के संदेह वाले लोगों के घर का अधिकृत अधिकारियों द्वारा निरीक्षण करने का भी अधिकार दिया गया है।
धारा 5 अपराधों के लिए दण्ड.-=अब कानून तोड़ने पर 10,000ध्- (दस हजार रुपए)तक जुर्माना या दो साल की सजा का प्रावधान किया गया है द्य
कानून का उल्लघंन करने पर 10,000 रुपये का जुर्माना, दो साल की सजा या फिर दोनों का प्रावधान है.
धारा 6= अपराधों के दुष्प्रेरण के लिए दण्ड.- कोई इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दषुप्रेरण
करता है उसी रीति दंड से दंडित किया जाएगा मानो कि वह अपराध उसने स्वयं कारित किया हो द्य
धारा 8 = अपराधों का सांज्ञेय और जमानतीय होना. .
इस कानून के तहत राज्य सरकार के साथ ही जिला कलेक्टर को कई शक्तियां दी गई है.
अध्यादेश आने के साथ ही इसके साथ ही राजस्थान संक्रामक रोग अधिनियम, 1957 समाप्त हो गया.- हालांकि पुराने कानून के तहत की गई कार्रवाइयां-बातें नए कानून में शामिल हो जाएगी
स्वास्थ्यकर्मियों पर किया हमला तो होगी 7 साल तक की सजा : मोदी सरकार लाई अध्यादेश

स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा. इसमें 3 महीने से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है.
स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों को जमानत नहीं मिलेगी, 30 दिन के अंदर इसकी जांच पूरी होगी।
1 साल के अंदर फैसला लाया जाएगा, जबकि 3 महीने से 5 साल तक की सजा हो सकती है.
इसके अलावा गंभीर मामलों में 6 महीने से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है. गंभीर मामलों में 50 हजार से 2 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा.
अध्यादेश के अनुसार, अगर किसी ने स्वास्थ्यकर्मी की गाड़ी पर हमला किया तो मार्केट वैल्यू का दोगुना ज्यादा भरपाई की जाएगी.
आमतौर पर, एक आपदा को एक प्राकृतिक आपदा जैसे कि चक्रवात या भूकंप से समझा जा सकता है। इसके अलावा, इस अधिनियम की धारा 2 (डी) में ष्आपदाष् की परिभाषा में यह कहा गया है कि आपदा का अर्थ है, ष्किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानवकृत कारणों से या उपेक्षा से उद्भूत कोई महाविपत्ति…।
लॉक डाउन तोडने पर एवं लोक सेवक के सरकारी आदेश न मानने की दशा में सजा का प्रावधान-
आपदा प्रबंधन कानून धारा 9 =
कोरोना वायरस लॉकडाउन तोड़ा तो 2 साल की अधिकतम सजा और जुर्माना और आईपीसी की धारा 188 लगेगी,
धारा 51 – बाधा डालना
अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी को आपदा के दौरान उनके कर्तव्यों को पूरा करने से रोकता है, उनके काम में बाधा डालता है, सरकारों द्वारा दिए निर्देशों को मानने से इनकार करता है, तो उसपर कार्रवाई की जा सकती है।
इस धारा के तहत ऐसे व्यक्ति को एक साल की कैद और जुर्माना लगाकर दंडित किया जा सकता है। लेकिन अगर उस व्यक्ति के कारण किसी को क्षति पहुंचती है तो ये सजा दो साल तक कैद और जुर्माने में बदल सकती है।
धारा 52 – मिथक , झूठे दावे
अगर कोई व्यक्ति पीड़ितों या किसी निश्चित वर्ग के लिए दी जाने वाली राहत सामग्री, सहायता या अन्य फायदे लेने के लिए गलत दावे करता है (पीड़ित वर्ग में न होकर भी उसके लिए दी जाने वाली मदद पर हक जताना), तो उस पर ये धारा लगाई जा सकती है। इसके तहत दोषी साबित होने पर दो साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

धारा 53 – धन या सामग्री का दुरुपयोग
अगर कोई व्यक्ति पीड़ितों या किसी निश्चित वर्ग के लिए दी जाने वाली राहत सामग्री, सहायता या अन्य फायदे लेने के लिए गलत दावे करता है (पीड़ित वर्ग में न होकर भी उसके लिए दी जाने वाली मदद पर हक जताना), तो उस पर ये धारा लगाई जा सकती है। इसके तहत दोषी साबित होने पर दो साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 54 – गलत चेतावनी
अगर किसी आपदा की परिस्थति में कोई झूठी चेतावनी या खबर फैलाता है, जिससे लोगों के बीच घबराहट फैले, पैनिक हो, तो इस धारा के तहत उस पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसा करने की कोशिश करने वालों को भी दंडित किया जा सकता है। इसकी सजा एक साल तक जेल और जुर्माना है।
आपदा प्रबंधन कानून धारा 55=
सार्वजनिक स्थानों और काम की जगह पर मास्क पहनना अनिवार्य, थूकने पर सजा और जुर्माना, कोई झूठी खबर फैलाई तो एक वर्ष तक की सजा या जुर्माना हो सकता है
धारा 56 – कर्तव्य पूरा न करना
अगर कोई सरकारी अधिकारी, कर्मचारी लॉकडाउन के दौरान सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों, कर्तव्यों का पालन नहीं करता है, तो इस धारा के तहत दोषी करार दिया जा सकता है। इसके लिए कानूनी तौर पर उसे एक साल की जेल और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
सरकारी अधिकारी के कर्तव्य पालन न करने पर 1 साल तक की सजा या जुर्माना, 3 मई तक 19 दिन बढ़ाए गए लॉकडाउन को तोडने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं। इनमें आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अनुसार दंड और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक स्थानों और काम करने की जगह पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा। पब्लिक प्लेस पर थूकने पर सजा और जुर्माना देना होगा।
सरकारी कर्मचारियों पर आदेश न मानने की स्थिति में आईपीसी की धारा 188 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
धारा 57 के तहत- अपेक्षित आदेश का उल्लंघन होने पर-
यदि कोई व्यक्ति इस तरह के अपेक्षित आदेश (धारा 65 के अधीन) का पालन करने में विफल रहता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत दोषी ठहराया जा सकता है। इस धारा के तहत 1 साल तक की सजा और जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है।
अधिनियम की अन्य धाराएं (धारा 58, 59 और 60)
इस अधिनियम की धारा 58, कंपनियों के अपराध से सम्बंधित है। इसके अलावा, धारा 59 अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी (धारा 55 और धारा 56 के मामलों में) से सम्बंधित है, वहीं धारा 60 न्यायालयों द्वारा अपराधों के संज्ञान से सम्बंधित है।
सरकारी कर्मचारियों पर धारा 188 के अनुसार एक्शन
इस संबंध में किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए निर्देशों का उल्लंघन करने पर ये धारा लगाई जा सकती है। यहां तक कि किसी के ऊपर ये धारा लगाने व कानूनी कार्रवाई करने के लिए ये भी जरूरी नहीं कि उसके द्वारा नियम तोड़े जाने से किसी का नुकसान हुआ हो या नुकसान हो सकता हो।

सजा और जुर्मान के दो प्रावधान हैं
पहला- सरकार या किसी अधिकारी द्वारा दिए गए आदेशों का उल्लंघन करते हैं, या आपसे कानून व्यवस्था में लगे व्यक्ति को नुकसान पहुंचता है, तो कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपए जुर्माना या दोनों।
दूसरा- आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा, आदि को खतरा होता है, तो कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपए जुर्माना या दोनों। दोनों ही स्थिति में जमानत मिल सकती है।
आशीष नाथ एडवोकेट
नया कुवा,सिटी कोतवाली के पास,बीकानेर
E.mail : vinayexpressindia@gmail.com
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