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विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। भारत डिजिटाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। चाय की थड़ी से लेकर पंच सितारा होटलों तक सभी जगह डिजिटल पेमेंट क्यूआर कोड के जरिए होने लगा है लेकिन खेती की बातें और इसके बारे में विस्तृत ज्ञान भी क्यूआर कोड से मिले, यह तो अचरज वाली बात है।
जी हां, नागौर में कृषि विभाग और मूंडवा ने अंबुजा फाउण्डेशन ने किसानों के लिए कुछ ऐसे ही नवाचार किए, जिनमें कोई भी किसान अपने मोबाइल से उनके ग्राम पंचायत भवन या व्यापारिक संस्थान या फिर ग्राम सेवा सहकारी समिति के भवन की दीवार पर चस्पा एक विशेष पेज पर बने क्यूआर कोड को स्केन कर मौसम आधारित फसलों की बुवाई से लेकर उनके रखरखाव और कटाई तक के तौर-तरीको के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह नवाचार महज उक्त बताए संस्थानों पर नहीं बल्कि अंबुजा फाउण्डेशन की बेहत्तर कपास उत्पादन पर काम कर रही टीमों के वाहनों पर भी किया गया, जिसके माध्यम से खेत-ढाणी तक भी किसानों को अपने मोबाइल से क्यूआर कोड को स्केन कर फसलों के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल सकी। कोरोना काल के दौरान किसानों के लिए खेती की बातों का क्यूआर कोड का यह फार्मूला फसलों के लिए रामबाण साबित हुआ। कोरोना गाइडलाइन की पालना के चलते किसान सम्मेलन तो नहीं हो सके लेकिन धरतीपुत्र को उनके खेत में ही सब-तरह की जानकारी कृषि विभाग और अंबुजा फाउण्डेशन के बीसीआई प्रोजेक्ट में क्यूआर कोड के जरिए मिल सकी।

अंबुजा सीमेंट फाउण्डेशन, मूंडवा के प्रभारी प्रशान्त रंगा ने बताया कि इस अभियान में जिले की मूंडवा, नागौर, खींवसर, मेड़ता, डेगाना तहसील के करीब छह हजार किसानों को क्यूआर कोड मुहैया करवाते हुए उन्हें लाभान्वित किया गया है। यही नहीं जिनेवा की संस्थान बेहत्तर कपास उत्पादन(बीसीआई) संस्थान से जुड़े 26 देशों की इकाईयों की कम्बोडिया में हुई ईयरली इनोवेशन कंटेस्ट में अंबुजा सीमेंट फाउण्डेशन के खेती का क्यूआर कोड नवाचार को प्रथम स्थान दिया गया।
दूर तलख गई होशियारसिंह और मीना कुमारी की बातें
किसानों की समस्याओं को जानने और उनका हल करने के लिए कृषि विभाग और अंबुजा सीमेन्ट फाउण्डेशन ने एक और नवाचार किया। फाउण्डेशन की ओर से किए गए चार सौ से अधिक वाट्सग्रुप बनाकर करीब तीन हजार से अधिक किसानों को कृषि की बारीक जानकारियां और कीटनाशक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में होशियारसिंह और मीना कुमारी नाम से दो किरदारों की खेती पर आधारित वार्ता की एनीमेशन फिल्म मुहैया करवाई गई। यही नहीं उक्त एनीमेशन फिल्म को मेड़ता, मूंडवा व कुचेरा के लोकल केबल चैनल पर भी प्रसारित किया गया। उक्त एनोविटिव एनीमेशन फिल्म को भी जिनेवा की संस्थान बेहत्तर कपास उत्पादन(बीसीआई) संस्थान से जुड़े 26 देशों की इकाईयों की कम्बोडिया में हुई ईयरली इनोवेशन कंटेस्ट में विश्व स्तर पर द्वितीय स्थान और भारत से गए प्रतिभागी संस्थानों में प्रथम स्थान मिला। कृषि विभाग के अठियासन स्थित केवीके प्रभारी डाॅ. गोपीचंद के मार्गदर्शन में किए गए इस नवाचार में फाउण्डेशन के बीसीआई हैड गौरव चौधरी और टीम का योगदान रहा।
