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मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष ने ‘ होली की फाग’, कव्वाली ‘ चढ़ता सूरज धीरे-धीरे’ की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत होली की फाग पर नृत्यांगना राजभारती ने नृत्य की प्रस्तुति दी। इस सत्र का संचालन मनीषा आर्य सोनी व रवि शुक्ल ने किया। संगत में की- बोर्ड पर असद अली, ढोलक पर शमीम, पेड पर टीपू रहमान रहे।
इससे पहले समापन सत्र के प्रारंभ में ‘ नाटक और संगीत’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें पत्रवाचन दयानंद शर्मा ने किया एवं समाहार मधु आचार्य आशावादी ने किया।सत्र संचालन रंगनेत्री जया पारीक ने किया।
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कार्यक्रम की अगली कड़ी में सुमेरु भजन संध्या की प्रस्तुति जितेंद्र सारस्वत द्वारा दी गई जिसमें उन्होंने ‘तुम से ही जोड़ी साची प्रीत’, ‘ सांसों की माला में सिमरु मैं तेरा नाम’, ‘ गुरु सत्संग है प्राणों से प्यारा’, ‘ चौक पुराउ मंगल गाउँ’ और अन्य भजन सुनाए।

इसी कड़ी में मशहूर ग़ज़ल गायक रफीक सागर द्वारा गज़ल ‘ रफ्ता रफ्ता वो मेरी हस्ती के सामा हो गए’, ‘ रंजिशें ही सही दिल को दुखाने के लिए आह’, ‘चांद यूं ही नहीं छुपा होगा’ और ‘ सुपणे में सखी देख्यो नन्दगोपाल’ की प्रस्तुत दी। तबले पर संगत गुलाम हुसैन व हारमोनियम पर संगत पुखराज शर्मा ने दी।
झांसी के बुंदेलखंड नाट्य कला केंद्र की हास्य व्यंग्य प्रस्तुति ‘ मैं बोझ नहीं भविष्य हूं’ का मंचन डॉ हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन में हुआ। ‘ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ विषय पर आधारित इस नाटक में हास्य व्यंग्य के माध्यम से इस ज्वलंत विषय को रेखांकित किया गया। अत्यंत ही सहज और सरल शैली में प्रस्तुत संगीतमय नाटक बेहद उपयोगी होने के साथ-साथ एक संदेश भी छोड़ता है।

इस अवसर पर राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष गोपाल व्यास ने कहा कि बीकानेर की रंग परंपरा अंत्यंत समृद्ध है। यह देश भर में विशिष्ट पहचान सकती है। यहां नाटक की समझ रखने वाले लोग हैं। साथ ही लोक कलाओं के संरक्षण के लिए भी बीकानेर देश भर में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समय-समय पर होनी चाहिए।
राज्य मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष रमेश बोराणा ने कहा कि युवाओं का रंगकर्म से जुड़ना अच्छा संकेत है। इससे नाट्य परंपरा की समझ भावी पीढ़ी तक पहुंच सकेगी। इस दौरान तीन दिनों से चल रहे फोटोग्राफी प्रशिक्षण शिविर में विजेता रहे प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट व नकद राशि देकर सम्मानित किया गया। विपिन पुरोहित ने आगंतुकों का आभार ज्ञापित किया।
इस दौरान जयपुर के प्रसिद्ध मूर्तिकार लक्ष्मण व्यास, इमानमल बोथरा, युवा उद्योगपति रवि पुरोहित, समाजसेवी सोहनलाल चौधरी एवं संपत दुग्गड़ रहे।