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रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंट बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ का अभिन्न अंग है। राजस्थान के रेत के टीलों पर आसानी से चल सकने वह एकाध दिन तक पानी ना मिलने पर भी ऊंटआराम से अपना जीवन चला सकता है ।
अपनी ऊंचाई व मजबूत कद काठी के कारण बीएसएफ बटालियन ने इस पशु का चयन किया ।आज से 10 वर्ष पहले तक ऊंट पर बैठकर बीएसएफ के जवान राजस्थान की सीमा की रखवाली करते थे। 1948 में ही भारतीय सेना में ऊंट दस्ते को शामिल कर लिया था परंतु 1975 में भारतीय सेना ने इसे बीएसएफ को सुपुर्द कर दिया ।
परंतु जैसे-जैसे समय बदला आज बीएसएफ में ऊंट का महत्व बहुत कम हो गया। जहां उसका काम बीएसएफ के लिए सीमा निगरानी में अति महत्वपूर्ण था। अब वही यह पशु राजपथ पर परेड तथा मेहमानों का स्वागत और सम्मान के लिए ही प्रयुक्त हो रहे हैं।

राजस्थान में ऊंट को राज्य पशु का भी दर्जा प्राप्त है इसकी घटती संख्या और घटता महत्व इस पशु के लिए भविष्य पर ही प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। बीएसएफ के पोस्टों पर आज भी ऊंट देखने को मिलते हैं पर उनसे किसी भी प्रकार की सीमा रखवाली में कार्य नहीं लिया जाता है ।हां , अक्सर ऊंटों को सक्रिय रखने के लिए ऊंटों के पीछे सवागा बांधकर पोस्ट के आस-पास और अंदर की जमीन को समतल करने में जरूर काम में लिए जाते हैं। ताकि खाली बैठा ऊंट किसी प्रकार की हिंसक घटना ना करें।

वर्तमान में ऊंट जिस बीएसएफ की पोस्ट चौकी पर होता है वहां वह एक तरह से भार बनकर ही रह रहा है। क्योंकि ऊंट का प्रयोग सीमा चौकसी में ना होने से बीएसएफ के जवान भी इनके आचार व्यवहार से अधिकांशतः अनभिज्ञ ही रहते हैं।
एक समय था जब बीएसएफ बटालियन का नाम आते ही रेगिस्तान के जहाज का परिदृश्य का मन में अंकन हो जाता था । पर आज वर्तमान परिदृश्य में ऐसा नहीं है भारत सरकार वह डिफेंस सेक्टर को इस अनमोल पशु के ऊपर दोबारा चिंतन कर डिफेंस सेक्टर में इसका किस तरह से समुचित उपयोग हो। इस पर चिंतन जरूरी है ताकि इस प्रजाति को बढ़ावा और लुप्त होने से बचाया जा सके।


गाँव की सरकार का दफ्तर हो, जिले का कोई सा महकमा, सीएमओ और पीएमओ से लेकर व्हाईट हाउस या यूएनओ, या दुनिया भर के तमाम सरकारी, अर्द्ध सरकारी और निजी दफ्तरों, कारोबार और तमाम प्रतिष्ठानों के हरेक बाड़े और गलियारे में इन्हीं शब्दों की गूँज दिन-रात बनी रहती है।
जमीन से लेकर आसमान तक ये शब्द इस कदर छाये हुए हैं कि ओजोन परत की तरह सर व मेम शब्दों की घनी चादर ही नहीं बल्कि मोटा और भारी कम्बल बन चुकी है। भगवान की तरह सर्वव्यापी होते जा रहे इन शब्दों ने सारी भौगोलिक, आकाशीय व स्थानिक परिधियों को समाप्त कर दिया है। पढ़े-लिखों और साहबों की संस्कृति का तो यह ब्रह्म मंत्र है ही, अनपढ़ों की जुबान भी इन शब्दों का श्रृद्धापूर्वक उच्चारण कर अपने आपको धन्य मानने लगी है।
हर चैम्बर से रोजाना ये आवाजें सैकड़ों बार सुनाई देती है, हर संबोधन या वार्तालाप की शुरूआत इसी से होनी है। बात परोक्ष हो, या अपरोक्ष हो या फोन-मोबाईल से, हर तरफ इन्हीं दो शब्दों का ही बोलबाला है। ढाई आखर प्र्रेम के और हैलो से भी अधिक वैश्विक व्यापकता कोई शब्द पा चुके हैं तो वह ये दो शब्द ही हैं। हैलो नपुंसक वर्ग का शब्द हो सकता है लेकिन आजकल पुरुषों की प्रसन्नता का मूलाधार यह ‘सर’ शब्द ही है जिसे सुनकर हर किसी पुरुष को अपने आपके परम पुरुष, महापुरुष या पुरुषोतम होने का सुकूनदायी बोध होने लगा है।

सर शब्द कान में पड़ते ही इनका पौरुष जागृतावस्था को प्राप्त होता है जैसे कि इन्हें जगाने और अस्तित्व का बोध कराने का ये कोई पासवर्ड ही हो। सर के सिवा दूसरे कोई संबोधन इनके सर पर जूँ नहीं रेंगा सकते, और सर कहने मात्र से सफाट फिसलनदार टाट पर जूँओं की कतारे स्केटिंग करते हुए लगातार सुकून का अहसास कराने लगती है।
यही स्थिति स्त्रियों की हो गई है। इन्हें बहनजी, माताजी, बिटिया, बहूरानी या और कुछ भी आत्मीय संबोधन दे डालो, कोई ध्यान नहीं देंगी। जैसे ही किसी ने मैम, मेडम या मेम साहब कह दिया, सारी सोच एक तरफ छोड़कर ध्यान धरना शुरू।

कहा गया है-अक्षर ब्रह्म है। फिर ये तो शब्द हैं। महाब्रह्म होंगे ही। इन शब्दों की महिमा का बखान करना अब किसी के बस में नहीं है। ये ब्रह्माण्ड के सर्वोच्च शिखर से लेकर पाताल की जड़ तक पसर चुके हैं।

फिर सार्वजनीन आनन्द इतना कि सुनते ही हर किसी को बोध होने लगता है कि वह बहुत बड़ा हो गया है। इसी अहंकार ने खूब सारे लोगों को ऎसा खजूर बना डाला है कि अब ये किसी काम के नहीं रहे। इसी प्रतीक्षा में पड़े हैं कि कोई त्रिशंकु जब आसमान में कोई बस्ती बनाएगा तब उन्हें कोई न कोई ओहदा जरूर प्राप्त होगा ही।

आदमियों को सर और महिलाओं को मेम शब्द सुनने मात्र से नई ऊर्जा, अपार स्फूर्ति, ताजगी और अवर्णनीय सुख का गद्गद् कर देने वाला अहसास होने लगता है। इन्हीं दो मंत्रों के सहारे पूरा का पूरा राज-काज चल रहा है, लाखों-करोड़ों लोग अपने आपको कुछ न कुछ मान या मनवा बैठे हैं।
अचूक प्रभाव वाले इन मंत्रों का प्रयोग हम में से हर कोई करता ही रहा है। आयन्दा कोई चन्द्र या सूर्य ग्रहण पड़े तो इन दोनों मंत्रों की कम से कम 2-2 माला जरूर जप लें, ऎसा सिद्ध हो जाएगा कि कोई काम कभी नहीं रुकने वाला। देवताओं को खुश करने में टाईम वेस्ट करने की बजाय उन्हें खुश रखो जो हमारे किसी न किसी काम आने वाले प्रत्यक्ष देवता हैं। बात दो शब्दों का श्रृद्धा व प्रेम के साथ उच्चारण करने की ही है, चमत्कार मुँह बोलता नजर आएगा।

सर-सर करते रहें, मैम-मैडम, मेम साहब कहकर श्रृद्धा जताते रहें, धरती के ये देवता महामंत्र का श्रृद्धापूर्वक सर झुकाकर नमन करने मात्र से प्रसन्न होने वाले हैं। काबिल हैं उन्हें भी कहिए, नाकाबिल हैं उन्हें भी। मंत्र रामबाण है, हर किसी को जागृत कर ‘अहं ब्रह्मास्मि’ के भाव भरने वाला है। सर-सर कहते रहेंगे तो भला होगा, परहेज रखेंगे तो सरासर बुरा। आजमाएं और अपने काम निकालें। प्रतिभाहीन निकम्मों, नुगरे-नालायकों और कामचोरों के लिए तो ये शब्द अचूक औषधि और अमृत संजीवनी का प्रभाव दिखाते हैं। काम कुछ मत करो, सर-सर, मैम-मैम, जी-जी करते रहो, अपने आप टाईम पास हो जाएगा। वे भी खुश और हम भी।

इन मंत्रों को जो अपना रहे हैं वे और अधिक बार बोलने व सुनाने का अभ्यास करें। जो अब तक हिचक रहे हैं वे इसे अपनाएं। दुनिया के सारे आनन्द पाने, काम निकलवाने और बड़ी ही चतुराई से टाईम पास कर लेने के ऎसे मंत्र न हुए हैं न होंगे। पीछे न रहें, जो आजमाये सो निहाल। ये है सर-मैम का करिश्माई मायाजाल।
– डॉ. दीपक आचार्य
9413306077


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उनका खौफ अपराधियों में इस कदर था कि अपराधी उनके जिले में तैनात होते ही भाग जाते थे। यही वजह है वह हमेशा से अधिकारियों के चहेते पुलिसकर्मी रहे है।
विष्णु दत्त जी का मानना था- लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
विष्णु दत्त जी के बारे में कहा जाता है कि वह जिस जिले में तैनाती पाते हैं वहां से अपराधी या तो बेल तुड़वाकर जेल चले जाते हैं या फिर जिला छोड़ देते हैं।
कई बार डराने की कोशिशों के बाद भी विष्णु दत्त जी का इरादा कमज़ोर नहीं हुआ। कई वाकये हुए जब अपराधियों पर सख्ती के कारण उनका तबादला भी हुआ, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी शैली में बदलाव नहीं किया|
लेकिन अब यह अधिकारी हमारे बीच नहीं है
विष्णु दत्त जी को अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैये के लिए जाना जाता था।
अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ता है तो पूरी व्यवस्था ही उसके खिलाफ हो जाती है।
इनके अलावा भी छोटे-बड़े स्तर पर कितने ही अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की मुखालफत करने का खामियाजा भुगता है, कभी अपनी जान देकर तो कभी सिस्टम से प्रताड़ित होकर।
ऐसे में सवाल उठता है कि एक तरफ तो सरकारें भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचारियों को क्षय (Shelter) दी जा रही है ? बहरहाल यदि हमें देश से भ्रष्टाचार को मिटाना है तो ईमानदार अधिकारियों का समर्थन करना होगा और सरकारों पर दबाव बनाना होगा ताकि भ्रष्टाचारियों को राजनैतिक समर्थन ना मिल सके।
उन मामलों का भी पता नहीं चलता जिनके बारे में खुलासा करते हुए ये अफसर जान देते हैं।
एक बार फिर से यह सिद्ध कर दिया है कि अब इस देश में ईमानदारी से काम करना कठिन होता जा रहा है.
दरअसल अब मान लेना चाहिए कि भ्रष्टाचार को लेकर समाज और सियासत का पक्का गठजोड़ है। जब तक इस गठजोड़ को नहीं तोड़ा जाएगा, ईमानदार अफसर मारे जाते रहेंगे।
आज की इस व्यवस्था में ऐसे जांबाज और ईमानदार और तथा सजग और कर्तव्यनिष्ठ सिपाही हम लोगों ने खो दिया । सरकार से सी बी आई जांच की मांग जिससे वास्तविकता सामने आये|

आशीष नाथ-अधिवक्ता
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आत्मनिर्भर भारत विजन के लिए मोदी सरकार की तरफ से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण तथा वित्तराज्य मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा प्रेस कान्फ्रेस के माध्यम से प्रथम भाग देश की जनता के समक्ष पेश किया गया। सीए अनुराग शर्मा ने अपने विश्लेषण में बताया कि यह एक तरह से वार्षिक बजट जितना ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकार द्वारा अपने नीतिगत निर्णय एवं विजन को बताया गया है।
भारत सरकार ने अपने राहत पैकेज की ब्रीफिंग राजनितिक प्रचार की तरह शुरू किया इसके अंतर्गत पहले प्रदान की गई लाॅकडाउन की छूट को बताया बाद में एमएसएमई सेक्टर हेतु छः प्रकार की मुख्य घोषणाएँ की गई।

1. 3 लाख करोड़ रूपये के बगैर किसी कोलेट्रल सिक्योरिटी के ऋण की घोषणा की गई जो 4 वर्ष की अवधि के लिए दिये जाएगें जिसमें पहले 12 माह तक कोई मूलधन जमा करवाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी।
2 20 हजार करोड़ रूपयों के ऋण का प्रावधान तनावग्रस्त एमएसएमई इकाईयों के लिए किया गया।
3. 50,000 करोड़ रूपयों के ऋण का प्रावधान एमएसएमई के ग्रोथ के लिए किया गया।
4. एमएसएमई की परिभाषा में परिवर्तन कर उत्पादन एवं सेवा इकाईयों की निवेश सीमा को समान कर इसमें टर्नऑवर की नई सीमा डाल दी गई। जिसमें सुक्ष्म उद्योग हेतु निवेश सीमा 1 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 5 करोड़ है। इसमें लघु उद्योग हेतु निवेश सीमा 10 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 50 करोड़ है तथा मध्यम उद्योग हेतु निवेश सीमा 20 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 100 करोड़ है।
5. सरकारी टेण्डर्स जो 200 करोड़ रूपये तक के है जिनमें ग्लोबल सेक्टर की जगह एमएसएमई को अवसर प्रदान किया गया है।
6. एमएसएमई के लिए ई मार्केट लिंकेज को प्रमोट किया जाएगा और सरकार 45 दिवस में एमएसएमई सेक्टर्स से जुडे उद्योगपतियों को भुगतान कर देगी

1.जिन्हें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत (15000 रूपये तक वेतन वाले 100 मजदुरों तक वाले उपक्रम) 12 प्रतिशत कर्मचारी व 12 प्रतिशत नियोक्ता का मार्च अप्रेल व मई का भुगतान सरकार द्वारा किया गया था उन्हें अतिरिक्त तीन माह अर्थात जून जुलाई व अगस्त का पीएफ का भुगतान भी सरकार वहन करेगी। इसके लिए भारत सरकार ने 2500 करोड़ रूपयों का प्रावधान किया है।
2. अन्य कर्मचारियों के लिए कर्मचारी व नियोक्ता दोनों का ईपीएफ का भुगतान 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इससे 6750 करोड़ का अतिरिक्त लिक्विडिटी का सहयोग प्राप्त होगा।

1. 30 हजार करोड़ की विशेष लिक्विडिटी स्कीम के तहत सरकार द्वारा गारंटेड ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा
2. आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत इन संस्थाओं का प्रथम 20 प्रतिशत नुकसान सरकार वहन करेगी

पीएफसी/आरईसी द्वारा 90 हजार करोड का फंड उपलब्ध करवाया जाएगा।

केन्द्र सरकार से जुड़ी एजेन्सीयों द्वारा ठेकेदारों को कार्य पुरा करने हेतु छः माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा तथा आंशिक पूर्ण हुए कार्यों पर बैंक गारंटी भी प्रदान की जाएगी।

रेरा के तहत प्रोजेक्ट्स पर रजिस्ट्रेशन व कार्य पूर्ण करने के समय में छः माह का अतिरिक्त समय सीमा प्रदान की गई है।

1. टीसीएस व टीडीएस (कर्मचारी की आय पर लगने वाले टीडीएस के अतिरिक्त) की दरें 25 प्रतिशत से कम कर दी गई अर्थात पहले जिस पर 10 प्रतिशत टीडीएस कटता था अब 7.5 प्रतिशत ही कटेगा। यह प्रावधान 14 मई 2020 से 31 मार्च 2021 तक प्रभावी रहेगा।
2. बचे हुए आयकर रिफंड तुरंत जारी किये जाएगें
3. वित्तिय वर्ष 2019-2020 (कर निर्धारण वर्ष 2020-21) के आयकर रिटर्न की जमा करने की अंतिम तिथि समस्त करदाताओं के लिए बढ़ाकर 30 नवम्बर 2020 कर दी गई है।
4. टैक्स ऑडिट करवाने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 की गई है।
5. जो कर निर्धारण 30 सितम्बर 2020 तक निपटान करने थे उन्हें बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 किया गया है । और जो कर निर्धारण 31 मार्च 2021 तक निपटान करने थे उन्हें बढ़ाकर 30 सितम्बर 2021 किया गया है।
6. विवाद से विश्वास स्कीम में बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के टैक्स जमा करने की दिनांक को बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 किया गया है।

ये बहुप्रतीक्षित उपाय अर्थव्यवस्था को निःसंदेह प्रोत्साहन देने वाले है और ये उपाय अगर लाॅकडाउन के बगैर भी किये जाते तो भी बहुत प्रासंगिक होते।
ये उपाय लाॅकडाउन से बाहर निकलते समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत कारगर साबित होगें । चुंकि अभी तक सरकार द्वारा आर्थिक पैकेज की पूरी घोषणा नहीं की गई है, फिर भी कुछ बिन्दु वर्तमान में विचारणीय है:-
1. सरकार ने एमएसएमई सेक्टर की लिक्विडिटी पर ध्यान दिया है पर उन्हें कोई सब्सिडी छूट अथवा ब्याज मुक्त कर्ज नहीं दिया। यह प्रोत्साहन कर्ज के रूप में है जो ब्याज सहित वसूला जाएगा। और ब्याज कितना देना होगा इस पर भी सरकार द्वारा कोई टिप्पणी नहीं कि गई ।
2. भारतीय बाजारों की सप्लाई चैन जिसमें थोक व खुदरा व्यापारी आते हैं। इनका बडी संख्या में हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान रहता है। इन व्यापारियों को अभी तक एमएसएमई की परिभाषा से बाहर रखा गया है। तथा अलग से इनके बारे सरकार द्वारा में कोई विचार नहीं किया गया है।
3. इस आर्थिक राहत पैकेज को लागू करने में लगने वाले धन के स्त्रोत के बारे में जानकारी प्रदान नहीं की गई।