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इस नीति में कनिष्ठ तकनीकी सहायकों के चयन के लिए सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री अथवा डिप्लोमाधारी तथा कृषि इंजीनियरिंग में बीई या बी टेक अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करते हुए शैक्षणिक योग्यता के 70 प्रतिशत अंक तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में कार्य का अनुभव रखने वाले संविदा कार्मिकों को नियोजन में प्राथमिकता देने के उददेश्य से 20 अंक एवं गृह जिले के निवासी को जिले में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उददेश्य से 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।

लेखा सहायक के चयन की योग्यता में बी.ए./बी.कॉम /बी.एस.सी. के साथ कम्प्यूटर डिग्री अथवा डिप्लोमाधारी आवेदकों को अवसर प्रदान करते हुए शैक्षणिक योग्यता के 70 प्रतिशत अंक तथा राज्य सरकार के किसी भी सरकारी कार्यालय में लेखा कार्य के अनुभव के अधिकतम 20 अंक तथा गृह जिले के निवासी के लिए 10 अंक रखे गए हैं।
मुख्यमंत्री की इस स्वीकृति से प्रत्येक 6 ग्राम पंचायतों पर एक कनिष्ठ तकनीकी सहायक तथा 10 ग्राम पंचायतों पर एक लेखा सहायक उपलब्ध हो सकेंगे। जिससे मनरेगा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सुगमता होगी।
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मांग संख्या 1: राजस्थान स्टेट पैरीटी के आधार पर कनिष्ठ सहायक की ग्रेड पे 3600 लेवल-10 करने की मांग।
मांग संख्या 2: राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी संघर्ष समिति एवं राज्य सरकार की ओर से गोविन्द शर्मा तात्कालीन प्रमुख शासन सचिव वित्त के मध्य हुए शासन से समझौते के निर्णय दिनांक 16.08.2013 के अनुरूप मंत्रालयिक संवर्ग के अराजपत्रित एवं राजपत्रित पदों का नवीन सृजन करने की मांग।
मांग संख्या 3: शासन सचिवालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत मंत्रालयिक संवर्ग के अराजपत्रित एवं राजपत्रित पदों में व्याप्त असमानता को दूर करते हुए पद, पदौन्नति प्रावधान एवं वेतन में समानता की करने एवं नियमों मे संशोधन करने की मांग।
मांग संख्या 4: पुनरीक्षित वेतनमान के लाभ की वसूली एवं नियमों में संशोधन के कारण कार्मिकों में रोष को देखते हुए वूसली की अधिसूचना तत्काल प्रभाव से प्रतिहारित करने की मांग।

मांग संख्या 5: शिक्षा विभाग के निदेशालय सहित समस्त राज्य स्तरीय, संभाग, जिला एवं ब्लाॅक स्तरीय कार्यालयों से शैक्षिक संवर्ग के स्टाफ यथा अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता (स्कूल शिक्षा) एवं समकक्ष पदों को समाप्त करके इन पदों पर कार्यरत शैक्षिक स्टाफ को अन्यत्र पद सहित स्थानान्तरित करने की मांग एवं कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शैक्षिक स्टाफ की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हे शालाओं में भेजने की मांग, कार्य महत्ता को देखते हुए पी.ई.ओ. सहित समस्त कार्यालयों में मंत्रालयिक संवर्ग के पदों का सृजन कर पदस्थापन कराने की मांग।

इस दौरान कर्मचारी संघ के प्रदेश संरक्षक राजेश व्यास, प्रदेशाध्यक्ष गिरजाशंकर आचार्य, पंकज भटनागर प्रदेश महामंत्री, कमल नारायण आचार्य संभाग अध्यक्ष अविकान्त पुरोहित जिलाध्यक्ष बीकानेर सहित अन्य सदस्य विष्णु पुरोहित प्रवीण गहलोत राजेंद्र मौजूद रहे।




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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 23 करोड़ 36 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो वित्तीय वर्ष 2018-19 में अर्जित शुद्ध लाभ 17 करोड़ 16 लाख रुपए की तुलना में 6.20 करोड़ रुपए अधिक है।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला एवं प्रमुख शासन सचिव ऊर्जा दिनेश कुमार सहित निगम के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि प्रोत्साहन नीति, 2019, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना एवं ई-नाम जैसी योजनाओं के संचालन के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी की जानकारी रखने वाले कार्मिकों की आवश्यकता है। इसे देखते हुए श्री गहलोत ने कृषि उपज मण्डी समितियों में सूचना सहायकों के 253 नए पद सृजित करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इसके साथ ही कनिष्ठ लिपिक के 511 रिक्त पदों पर भर्ती होने से मण्डी समितियों में कार्य सम्पादन में आसानी होगी।

गहलोत ने विशिष्ट न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सृजित विशेष न्यायालय संख्या 4 जयपुर एवं विशिष्ट न्यायालय संख्या 1 जोधपुर में अभियोजन पैरवी के लिए 6 विभिन्न पदों के सृजन को मंजूरी दी है। नवसृजित पदों में सहायक निदेशक अभियोजन के 2, कनिष्ठ सहायक के 2 तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 2 पद शामिल हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सेवाएं सेवानिवृत्तध्रेक्सको के माध्यम से ली जाएगी। नए पदों के सृजन से इन न्यायालयों में भ्रष्टाचार के प्रकरणों में प्रभावी अभियोजन पैरवी में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने जैसलमेर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं बालोतरा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालयों के लिए एक-एक कुल 5 वाहन चालक के पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की है।

जिला कलक्टर ने नवनिर्मित विधि भवन तथा सामाजिक विज्ञान भवन का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने उस स्थान का भी निरीक्षण किया जहां पर वीडियो काॅन्फ्रेसिंग की व्यवस्था की गई है। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यक्रम के दौरान आॅडियो व वीडियो की क्वालिटी उच्च स्तर की होनी चाहिए। कार्यक्रम के समय तकनीकी से कोई व्यवघान उत्पन्न ना हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से कहा कि नवनिर्मित भवनों के लोकापर्ण कार्यक्रम का सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रचार-प्रसार करवाया जाए, जिससे घर बैठे छात्र-छात्राओं तक मुख्यमंत्री जी का संदेश पहुंचे।

इस अवसर पर उपकुल सचिव डाॅ. बिट्ठल बिस्सा, संपदा अधिकारी कुलदीप जैन तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कमल कान्त उपस्थित थे।