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विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। अष्टमी के दिन स्वास्थ्य विभाग की एएनएम व महिला सीएचए शक्ति स्वरूपा का किरदार निभाते हुए मच्छर रूपी दानवों का संहार करती नजर आई। छुट्टी के दिन भी विभागीय कर्मचारी डेंगू के विरुद्ध मैदान में डटे रहे। जिले भर में मच्छरों की 1,138 फैक्ट्रियां बंद करवाई गई यानी कि रुके हुए पानी के स्रोतों या पात्रों का सफाया किया गया। जिले भर में 431 स्थानों पर साईफेनोथ्रीन कीटनाशक का स्प्रे किया गया। सर्वोदय बस्ती, इंदिरा कॉलोनी, रामपुरा बस्ती, लालगढ़, गुरुद्वारा कॉलोनी, गंगा शहर, भुट्टों का बास, सुभाष पुरा व शहरी परकोटा सहित बीकानेर शहर के कुल 28 स्थानों पर फोगिंग की कार्यवाही की गई। आमजन को डेंगू संबंधी सावधानियां व रोकथाम संबंधी जानकारी देते हुए कुल 661 जन जागरण गतिविधियां की गई।

सीएमएचओ डॉ ओ पी चाहर व डॉ अनिल वर्मा स्वास्थ्य दल के साथ नापासर थाने पहुंचे। वहां कबाड़ में कई मच्छरों की फैक्ट्रियां पाई गई जिन्हें साफ कराया गया। सभी कार्मिकों की स्वास्थ्य जांच की गई। थाने के परिवेश व आसपास के दुकानों घरों में भी सर्वे की कार्यवाही की गई।

डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ लोकेश गुप्ता ने बताया कि बुधवार को 330 एलिजा टेस्ट हुए जिसमें कुल 26 व्यक्ति डेंगू पॉजिटिव पाए गए। इस प्रकार जिले में डेंगू पॉजिटिव का आंकड़ा 290 तक पहुंच गया है। प्रत्येक केस को केंद्र में रखते हुए आसपास के 50 घरों में एंटी लारवा एक्टिविटी व सर्वे की गतिविधियां की जा रही है। उन्होंने बताया कि शहरी डिस्पेंसरियों द्वारा उनके क्षेत्र में एंटीजन पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों को भी डेंगू संदिग्ध मानते हुए एंटी लारवा गतिविधियां व सर्वे कार्य किया जा रहा है।




विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। 5 साल तक के बच्चों की दस्त से मृत्यु रोकने और कुपोषण से बचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने गहन दस्त नियंत्रण अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार को अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य केन्द्रों व आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बनाए गए ओआरएस व जिंक कोर्नर का अधिकारीयों व जनप्रतिनिधियों ने कोरोना प्रोटोकॉल सहित उदघाटन किया। जन जागरण के लिए पोस्टर, बैनर व आशा फोल्डर का प्रदर्शन भी किया गया। आशा सहयोगिनियों ने घर-घर ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां भी बांटनी शुरू की।

सीएमएचओ डॉ ओम प्रकाश चाहर ने कोटगेट स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 5 के ओआरएस-जिंक कॉर्नर पर बच्चों को ओआरएस का जीवन रक्षक घोल पिलाया। इस दौरान हाथ धोने के 6 चरणों “सुमनके” की सही विधि और एक पैकेट ओआरएस से 1 लीटर घोल बनाने की विधि का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में शामिल हुए बच्चों व परिजनों को जिंक की गोलियां भी वितरित की गई। इस अवसर पर अस्पताल प्रभारी डॉ बिन्दुबाला गर्ग, जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य, लेखाकार अरशद अली, नर्सिंग स्टाफ, आशा सहयोगिनी सहित बच्चे व परिजन मौजूद रहे। डॉ चाहर ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपील करते हुए कहा कि दस्त जैसी छोटी बीमारी से बीकानेर में एक भी नौनिहाल की मृत्यु ना हो इसके लिए शहर से लेकर गाँव तक ओआरएस व जिंक की सुपर जोड़ी का प्रचार-प्रसार करें और जरूरतमंदों को उपलब्ध कराएं। उन्होंने चिकित्सालय का निरीक्षण कर सेवाओं की पड़ताल भी की। इसी प्रकार जिले के समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों पर कोरोना प्रोटोकॉल के साथ सीमित कार्यक्रम किए गए।

डिप्टी सीएमएचओ एवं अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. योगेन्द्र तनेजा ने बताया कि अभियान के दौरान 6 अगस्त तक आशा सहयोगिनियाँ प्रतिदिन 5 वर्ष आयु तक के बच्चों वाले घरों में जाकर ओआरएस का पैकेट बांटेगी व किसी के दस्त से ग्रसित पाए जाने पर जिंक टेबलेट की 14 दिन की खुराक देकर डायरिया, कुपोषण, स्तनपान व हाथों की स्वच्छता जैसे सामान्य दिखने वाले परन्तु गंभीर विषयों पर सूचना-संचार करेगी। डायरिया के प्रबंधन के लिए विशेष रूप से तैयार प्लान ए, बी व सी का भी प्रचार किया जाएगा।

डॉ. चाहर ने बताया कि यदि बच्चे को एक दिन में 3 या अधिक पतले दस्त लगते हैं तो उसे डायरिया माना जाएगा और उसे प्रत्येक दस्त के बाद ओआरएस का घोल दिया जाएगा जब तक कि दस्त बंद न हो जाए। 1 लीटर साफ पानी में ओआरएस का एक पूरा पैकेट डालकर घोल बनाया जाता है और उसे 24 घंटे के अन्दर उपयोग करना होता है 2 माह से छोटे बच्चे को 5 चम्मच घोल, 2 माह से 2 साल तक के बच्चे को चैथाई से आधा कप व 2 से 5 साल तक के बच्चे को आधा से एक कप घोल प्रत्येक दस्त के बाद दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार 2 से 6 माह तक के बच्चे को आधी गोली जिंक की व 6 माह से 5 साल तक के बच्चे को एक गोली जिंक की प्रतिदिन 14 दिन तक देने से डायरिया बच्चे से दूर ही रहता है।
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डिप्टी सीएमएचओ डॉ योगेन्द्र तनेजा ने जानकारी दी कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिये हानिकारक तो है ही अपितु परोक्ष धूम्रपान से भी कैंसर, अस्थमा, स्ट्रोक आदि रोग होने की संभावना बढ़ जाती है और कोविड जैसे संक्रमण होने पर पहले से खराब फेफड़ों के चलते जीवन जोखिम की संभावना भी ज्यादा है। इसे भावी पीढ़ी तक जाने से रोकना कोटपा एक्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के महेंद्र जयसवाल ने कोटपा एक्ट की धारा 4, 5, 6 व 7 की विस्तृत जानकारी देते हुए लागू करने में पुलिस विभाग की अपेक्षित भूमिका रेखांकित की। कार्यशाला में समस्त वृताधिकारी व थाना प्रभारियों के साथ, चिकित्सा विभाग से एपिडेमोलोजिस्ट नीलम प्रताप सिंह, डॉ यश मुद्गल, सोशल वर्कर कमल नारायण पुरोहित, किशन गौड़, उमेश व्यास, संजय शर्मा, नंदलाल इंदौरा आदि मौजूद रहे।
