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dcf bikaner – Vinay Express https://vinayexpress.in खबर हमारी विश्वास आपका Sun, 11 Jul 2021 13:05:47 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 घर-घर में औषधीय पौधों को उगाने में सहयोगी बनें बच्चे और अभिभावक -विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए आयोजित जागरूकता सत्र में बोले वक्ता https://vinayexpress.in/2021/07/11/forest-dept-news-raj/ Sun, 11 Jul 2021 13:05:47 +0000 https://vinayexpress.in/?p=11446 विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। घर-घर औषधि योजना के व्यापक प्रचार के उद्देश्य से राजस्थान की समृद्ध जैव विविधता और परंपरागत आयुर्वेदिक ज्ञान से विद्यार्थियों व अभिभावकों को जागरूक करने के लिए रविवार को जयश्री पेड़ीवाल ग्लोबल स्कूल की ओर से जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसमें वन विभाग, राजस्थान के अधिकारियों ने राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की जा रही घर-घर औषधि योजना के बारे में जानकारी देते हुए आह्वान किया कि घर-घर में औषधीय पौधों को उगाने और स्वयं को स्वस्थ रखने में बच्चे और अभिभावक मिलकर सहयोगी बनें।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने कहा कि विभिन्न शोधपत्रों से यह प्रमाणित है कि घर-घर औषधि योजना के तहत वितरित किए जाने वाले चारों औषधीय पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर हैं। इसलिए इन औषधीय पौधों को उत्साहपूर्वक उगाते हुये वैद्यों की सलाह से उपयोग करना कल्याणकारी रहेगा । उन्होंने आगे कहा कि यह कोई कोरा ज्ञान नहीं है बल्कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से स्वास्थ्य की मुस्कान लाने का ठोस विचार है।

डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने कहा कि योजना को अमलीजामा पहनाने में बहुत से लोगों ने शोध किया है, कइयों ने मेहनत की है और विशेषज्ञों के अनुभव के बाद तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा और कालमेघ के रूप में 4 औषधीय पौधे तैयार किए गए हैं। डॉ. पाण्डेय ने किसानों का जिक्र करते हुए बताया कि अगर किसान अपने बच्चों को खेती करना ना सिखाए तो हमें बाजार में खाने के लिये खाद्यान्न नहीं मिले। इसलिए बच्चों तक इन औषधीय पौधों को उगाने और रखरखाव की जानकारी और दादी-नानी के घरेलू उपचार के नुस्खे की जानकारी पहुंचाई जानी आवश्यक है। उन्होंने बच्चों से भी आह्वान किया कि वे इन पौधों के साथ बड़े हों। उनका ध्यान रखें। उन्हें जीवित रखें, समय-समय पर उनमें पानी देते रहें और उनका संरक्षण करें। धरती के चेहरे पर हरियाली की मुस्कान लाने के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक बताते हुये डॉ. पाण्डेय ने उम्मीद जताई कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से आमजन इसमें अपना सक्रिय सहयोग देंगे।

राजस्थान फॉरेस्ट्री एंड वाइल्ड लाइफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की अतिरिक्त निदेशक श्रीमती शैलजा देवल ने पहला सुख निरोगी काया की महत्ता और प्रजेंटेशन के जरिए घर-घर औषधि योजना की रूपरेखा बताते हुए स्कूल, विद्यार्थियों और बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की योजना में भूमिका बतलाई। श्रीमती देवल ने चित्रों के जरिए औषधीय पौधों की जानकारी देते हुए बताया कि इन पौधों को घरों में उगाने से पर्यावरण संरक्षण तो होगा ही, बच्चों तक भी परंपरागत ज्ञान पहुंचेगा और उनमें पर्यावरण संरक्षण को लेकर समझ विकसित होगी। श्रीमती देवल ने कहा कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम में भी इन पौधों की उपयोगिता प्राचीन काल से बनी हुई है। इन औषधीय पौधों के माध्यम से आयुर्वेद और परंपरागत ज्ञान को आम जन तक पहुंचाने के लिए राजस्थान सरकार ने घर-घर औषधि योजना शुरु की है।

इससे पहले, स्कूल प्रबंधन की ओर से श्रीमती कोमल किशनानी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का परिचय दिया। प्राचार्य श्रीमती मंजू खोसला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मेघा शर्मा, शिखा जैन सहित पूर्व-प्राथमिक स्तर से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी और उनके अभिभावक ऑनलाइन शामिल हुए।

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पर्यावरण संरक्षण के साथ बेहतर स्वास्थ्य की संकल्पना साकार करेगी घर-घर औषधि योजना : प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा ने की घर-घर औषधि योजना के तैयारियों की समीक्षा https://vinayexpress.in/2021/07/08/forest-dept-news/ Thu, 08 Jul 2021 15:06:07 +0000 https://vinayexpress.in/?p=11252 विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। घर-घर औषधि योजना की तैयारियों की समीक्षा के लिए वर्चुअल बैठक गुरुवार दोपहर बाद अरण्य भवन में वन एवं पर्यावरण विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती श्रेया गुहा की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान श्रीमती गुहा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उप वन संरक्षकों के साथ योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

बैठक में योजना से जुड़ी सभी तैयारियों की गहन समीक्षा करते हुए श्रीमती गुहा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की मंशा है कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आमजन औषधीय पौधों का उपयोग करते हुए अपने परिवार का स्वास्थ्य बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि वितरण के लिए नर्सरी में औषधीय पौधे तैयार हो चुके हैं। वन विभाग के स्टाफ ने पौधे तैयार करने में कड़ी मेहनत की है और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए योजना की जानकारी भी आमजन तक पहुंचाई जा रही है। इन सब प्रयासों की बदौलत योजना को लेकर प्रदेश भर में सकारात्मक माहौल बना है। उन्होंने इसी सकारात्मकता को बनाए रखते हुए सभी से योजना की सफलता में योगदान देने का आह्वान किया।

बैठक में श्रीमती गुहा ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत पौध वितरण की जिम्मेदारी जिला कलक्टर के स्तर पर पूरी की जानी है। पौध वितरण के बाद संबंधित जानकारी मॉनिटरिंग फॉर्मेट में संधारित की जाएगी। इस दौरान श्रीमती गुहा ने सभी उप वन संरक्षकों से योजना की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन-बल प्रमुख) श्रीमती श्रुति शर्मा ने मानसून की देरी के मद्देनजर नर्सरी में तैयार पौधों को धूप से बचाने के लिए निर्देश दिए।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने बैठक का संचालन करते हुए बताया कि वन विभाग द्वारा वितरण टीम के माध्यम से स्वस्थ पौधे आमजन तक पहुंचाए जाएंगे। इसलिये उनके वितरण और निगरानी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। पौध वितरण के संभावित रूट चार्ट सहित अन्य व्यवस्थाएं जल्दी पूर्ण की जाएं।

इसके अलावा डॉ. पाण्डेय ने विभागीय पौधारोपण के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि योजना को लेकर जैसा उत्साह अभी तक देखा जा रहा है, उसे बरकरार रखते हुए सभी मिलकर योजना को सफल बनाएं।

इसके पश्चात घर-घर औषधि योजना क्रियान्वयन समिति की बैठक प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन-बल) प्रमुख श्रीमती श्रुति शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इस अवसर पर एपीसीसीएफ (कैंपा) श्रीमती शिखा मेहरा, एपीसीसीएफ (उत्पादन) श्री आनंद मोहन, एपीसीसीएफ (विकास) श्री अरिंदम तोमर, एपीसीसीएफ (सुरक्षा) श्री वेंकटेश्वर शर्मा, एपीसीसीएफ (वन सुरक्षा) श्री उदय शंकर, एपीसीसीएफ (मॉनिटरिंग एंड इवेलुएशन) श्री मुनीश कुमार गर्ग सहित अन्य मौजूद रहे जबकि सीसीएफ़, घर-घर औषधि योजना से जुड़े जिला और ब्लॉक स्तर तक उपलब्ध वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की राजकीय सुविधा के माध्यम से अधिकारी ऑनलाइन जुड़े रहे।

इस बैठक की विशेष बात यह रही कि इसमें वन विभाग का प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी सम्मिलित हुए। फील्ड लेवल के प्रत्येक वनरक्षक, वनपाल, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सहायक वन संरक्षक, उप वन संरक्षक, वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।

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