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आत्मनिर्भर भारत विजन के लिए मोदी सरकार की तरफ से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण तथा वित्तराज्य मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा प्रेस कान्फ्रेस के माध्यम से प्रथम भाग देश की जनता के समक्ष पेश किया गया। सीए अनुराग शर्मा ने अपने विश्लेषण में बताया कि यह एक तरह से वार्षिक बजट जितना ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकार द्वारा अपने नीतिगत निर्णय एवं विजन को बताया गया है।
भारत सरकार ने अपने राहत पैकेज की ब्रीफिंग राजनितिक प्रचार की तरह शुरू किया इसके अंतर्गत पहले प्रदान की गई लाॅकडाउन की छूट को बताया बाद में एमएसएमई सेक्टर हेतु छः प्रकार की मुख्य घोषणाएँ की गई।

1. 3 लाख करोड़ रूपये के बगैर किसी कोलेट्रल सिक्योरिटी के ऋण की घोषणा की गई जो 4 वर्ष की अवधि के लिए दिये जाएगें जिसमें पहले 12 माह तक कोई मूलधन जमा करवाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी।
2 20 हजार करोड़ रूपयों के ऋण का प्रावधान तनावग्रस्त एमएसएमई इकाईयों के लिए किया गया।
3. 50,000 करोड़ रूपयों के ऋण का प्रावधान एमएसएमई के ग्रोथ के लिए किया गया।
4. एमएसएमई की परिभाषा में परिवर्तन कर उत्पादन एवं सेवा इकाईयों की निवेश सीमा को समान कर इसमें टर्नऑवर की नई सीमा डाल दी गई। जिसमें सुक्ष्म उद्योग हेतु निवेश सीमा 1 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 5 करोड़ है। इसमें लघु उद्योग हेतु निवेश सीमा 10 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 50 करोड़ है तथा मध्यम उद्योग हेतु निवेश सीमा 20 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 100 करोड़ है।
5. सरकारी टेण्डर्स जो 200 करोड़ रूपये तक के है जिनमें ग्लोबल सेक्टर की जगह एमएसएमई को अवसर प्रदान किया गया है।
6. एमएसएमई के लिए ई मार्केट लिंकेज को प्रमोट किया जाएगा और सरकार 45 दिवस में एमएसएमई सेक्टर्स से जुडे उद्योगपतियों को भुगतान कर देगी

1.जिन्हें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत (15000 रूपये तक वेतन वाले 100 मजदुरों तक वाले उपक्रम) 12 प्रतिशत कर्मचारी व 12 प्रतिशत नियोक्ता का मार्च अप्रेल व मई का भुगतान सरकार द्वारा किया गया था उन्हें अतिरिक्त तीन माह अर्थात जून जुलाई व अगस्त का पीएफ का भुगतान भी सरकार वहन करेगी। इसके लिए भारत सरकार ने 2500 करोड़ रूपयों का प्रावधान किया है।
2. अन्य कर्मचारियों के लिए कर्मचारी व नियोक्ता दोनों का ईपीएफ का भुगतान 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इससे 6750 करोड़ का अतिरिक्त लिक्विडिटी का सहयोग प्राप्त होगा।

1. 30 हजार करोड़ की विशेष लिक्विडिटी स्कीम के तहत सरकार द्वारा गारंटेड ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा
2. आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत इन संस्थाओं का प्रथम 20 प्रतिशत नुकसान सरकार वहन करेगी

पीएफसी/आरईसी द्वारा 90 हजार करोड का फंड उपलब्ध करवाया जाएगा।

केन्द्र सरकार से जुड़ी एजेन्सीयों द्वारा ठेकेदारों को कार्य पुरा करने हेतु छः माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा तथा आंशिक पूर्ण हुए कार्यों पर बैंक गारंटी भी प्रदान की जाएगी।

रेरा के तहत प्रोजेक्ट्स पर रजिस्ट्रेशन व कार्य पूर्ण करने के समय में छः माह का अतिरिक्त समय सीमा प्रदान की गई है।

1. टीसीएस व टीडीएस (कर्मचारी की आय पर लगने वाले टीडीएस के अतिरिक्त) की दरें 25 प्रतिशत से कम कर दी गई अर्थात पहले जिस पर 10 प्रतिशत टीडीएस कटता था अब 7.5 प्रतिशत ही कटेगा। यह प्रावधान 14 मई 2020 से 31 मार्च 2021 तक प्रभावी रहेगा।
2. बचे हुए आयकर रिफंड तुरंत जारी किये जाएगें
3. वित्तिय वर्ष 2019-2020 (कर निर्धारण वर्ष 2020-21) के आयकर रिटर्न की जमा करने की अंतिम तिथि समस्त करदाताओं के लिए बढ़ाकर 30 नवम्बर 2020 कर दी गई है।
4. टैक्स ऑडिट करवाने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 की गई है।
5. जो कर निर्धारण 30 सितम्बर 2020 तक निपटान करने थे उन्हें बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 किया गया है । और जो कर निर्धारण 31 मार्च 2021 तक निपटान करने थे उन्हें बढ़ाकर 30 सितम्बर 2021 किया गया है।
6. विवाद से विश्वास स्कीम में बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के टैक्स जमा करने की दिनांक को बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 किया गया है।

ये बहुप्रतीक्षित उपाय अर्थव्यवस्था को निःसंदेह प्रोत्साहन देने वाले है और ये उपाय अगर लाॅकडाउन के बगैर भी किये जाते तो भी बहुत प्रासंगिक होते।
ये उपाय लाॅकडाउन से बाहर निकलते समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत कारगर साबित होगें । चुंकि अभी तक सरकार द्वारा आर्थिक पैकेज की पूरी घोषणा नहीं की गई है, फिर भी कुछ बिन्दु वर्तमान में विचारणीय है:-
1. सरकार ने एमएसएमई सेक्टर की लिक्विडिटी पर ध्यान दिया है पर उन्हें कोई सब्सिडी छूट अथवा ब्याज मुक्त कर्ज नहीं दिया। यह प्रोत्साहन कर्ज के रूप में है जो ब्याज सहित वसूला जाएगा। और ब्याज कितना देना होगा इस पर भी सरकार द्वारा कोई टिप्पणी नहीं कि गई ।
2. भारतीय बाजारों की सप्लाई चैन जिसमें थोक व खुदरा व्यापारी आते हैं। इनका बडी संख्या में हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान रहता है। इन व्यापारियों को अभी तक एमएसएमई की परिभाषा से बाहर रखा गया है। तथा अलग से इनके बारे सरकार द्वारा में कोई विचार नहीं किया गया है।
3. इस आर्थिक राहत पैकेज को लागू करने में लगने वाले धन के स्त्रोत के बारे में जानकारी प्रदान नहीं की गई।