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वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में जिला कलेक्टर ने बजट घोषणा अनुरुप विभिन्न योजनाओं एवं भूमि आवंटन के कार्यों में प्रगति लाने तथा संपर्क पोर्टल पर लंबित प्रकरणों का तीव्रता से निस्तारण करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर अतिरिक्त जिला कलेक्टर मोहनलाल खटनावलिया, प्रशिक्षु आईएएस मृदुल सिंह, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीरालाल मीणा, सहायक कलेक्टर रामजस बिश्नोई, नागौर उपखण्ड अधिकारी सुनील पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मेहराम महिया, नगर परिषद सचिव अनिता बिरड़ा, डीओआईटी के कुम्भाराम रेलावत सहित जिले के सभी ब्लॉक स्तरीय अधिकारी जुड़े रहें।
जिला कलक्टर ने सम्भागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिले में भूजल के गिरते स्तर को पुनः कैसे बढ़ाया जा सके, उसके लिए विशेष कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अटल भूजल योजना में जिले की तीन समितियां एवं उनकी ग्राम पंचायते चयनित की गई है, उनमें भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके साथ ही जिले में जल के हो रहे दोहन को भी कम करने के लिए लाईन डिपार्टमेंट को सहयोग लेकर ठोस कदम उठाने पर बल दिया।
जिला प्रमुख प्रतापसिंह सोलंकी ने विश्व जल दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि जैसलमेर वासियों को पानी के महत्व की बखूबी जानकारी है एवं यहां के लोगों ने पानी को घी से भी अधिक महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नलकूपों से हो रहे जल के दोहन से दिनो-दिन भूजल का स्तर गिर रहा है, जो हम सबके लिए चिन्तनीय है। उन्होंने कार्यशाला में भूजल स्तर बढ़ाने के सम्बन्ध में विशेषज्ञों द्वारा जो जानकारी दी जाएगी, उसको फील्ड में क्रियान्विति कर जल को बढ़ाना है।
उप जिला प्रमुख डॉ. बी.के. बारूपाल ने कहा कि जल ही जीवन है एवं जल के बिना कल नहीं है। उस थीम को ध्यान में रखते हुए हमें जल के उपयोग को समझना होगा एवं इस क्षेत्र में कम से कम पानी का दोहन करना होगा तभी हम आने वाली पीढ़ी के लिए जल को बचा पाएगे। कार्यशाला के प्रारम्भ में अधीक्षण अभियंता जलदाय दिनेश नागौरी ने सभी अतिथियों एवं सम्भागियों का स्वागत किया। भूजल वैज्ञानिक डॉ. एन.डी. ईणखियां ने अटल भूजल योजना के तहत जिले में भूजल स्तर को बढ़ाने के सम्बन्ध में की जाने वाली गतिविधियों पर प्रकाश डाला तथा अटल भू जल योजना की अब तक की प्रगति के बारे में पावर पॉइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से जानकारी प्रदान की।
नोडल अधिकारी ने बताया की भू जल विभाग अपने सिमित संसाधनों के साथ योजना की हर गतिविधि को प्रभावी ढंग से पूरा करने का प्रयास कर रहा है। योजना के तहत जिले के 41 जल सुरक्षा प्लान तैयार कर राज्य इकाई को प्रेषित किये जा चुके है। कार्यक्रम के अंत में भू जल वैज्ञानिक रिशेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया। संचालन बराई दीन संवारा द्वारा किया गया।
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मरुस्थ्लीय जिले में दूर-दराज के 50 उप स्वास्थ्य केन्द्र जहां पर पब्लिक यातायात के साधनो के अभाव के कारण व दूर-दराज के क्षैत्ऱ में फेले होने के कारण इन उप स्वास्थ्य केन्द्रों की एएनएम द्वारा अपने परिक्षेत्र में एमसीएचएन सर्विस प्रदान करने में कठिनाई महसूस की जा रही थी, इस स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए इन 50 उप स्वास्थ्य केन्द्रों की एएनएम के लिये 65 लाख की लागत से स्कूटी की स्वीकृति नीति आयोग द्वारा प्रदान की गई है।
इस सम्बन्ध में दूर-दराज के क्षेत्रों के लिये प्रत्येक स्वास्थ्य ब्लॉक के लिये 02-02 मोबाईल क्लिनिक कुल 06 मोबाईल क्लिनिक जो रूट चार्ट के अनुसार संबंधित सीएचसी व पीएचसी के गांवों में स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करेगी, के लिये कुल राशि 90 लाख 70 हजार की स्वीकृति नीति आयोग द्वारा प्रदान की गई है।
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