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dr rahul vyas – Vinay Express https://vinayexpress.in खबर हमारी विश्वास आपका Fri, 08 Oct 2021 18:38:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 क्या है डेंगू बुखार, बच्चों एवं वयस्क रोगीयों को किस प्रकार रखनी चाहिए सवाधानियां ? पढ़िए डॉ राहुल व्यास का यह आलेख https://vinayexpress.in/2021/10/07/dr-rahul-vyas-health-article/ Thu, 07 Oct 2021 18:33:09 +0000 https://vinayexpress.in/?p=16434 विनय एक्सप्रेस स्वास्थ्य आलेख । वर्तमान में लगातार डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए विनय एक्सप्रेस की स्वास्थ्य टीम ने अपने पाठकों के लिए डेंगू बुखार के प्रति जागरूकता बरतने और बुखार होने पर सावधानि बरतने उद्देश्य से चिकित्सा अधिकारी एवं युवा डॉ राहुल व्यास के सहयोग से हैल्थ आर्टिकल प्रकाशित कर रही है ताकि पाठकों को डेंगू बुखार के बारे में वो सारी जानकारी प्राप्त हो सकें जिससे डेंगू बुखार से पूर्व जागरूक होकर अपना बचाव कर सकें और डेंगू बुखार से पीडीत रोगीयों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए इस संबंध में जानकारी प्रदान कर सकें, छोटे बच्चों पर भी डेंगू बुखार का क्या असर पड़ता है और किस प्रकार सावधानी बरतनी चाहिए इस विषय में भी डॉ. राहूल व्यास सरह एवं सहज भाषा में आम नागरिकों के लिए लिखा आलेख प्रस्तुत है : :

क्या है बुखार

जब हमारे शरीर पर कोई बैक्टिरिया या वायरस हमला करता है तो हमारा शरीर अपने आप ही उसे मारने की कोशिश करता है। इसी मकसद से शरीर जब अपना टेम्प्रेचर बढ़ाता है तो उसे ही बुखार कहा जाता है। जब भी शरीर का टेम्प्रेचर नॉर्मल (98.3) से बढ़ जाए तो वह बुखार माना जाएगा। आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ-पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट से उनका बुखार चेक किया जाता है। क·ई बार बुखार 104-105 डिग्री फॉरनहाइट त·क भी पहुंच जाता है।

कहीं यह बुखार डेंगू तो नहीं:-

• डेंगू वाले मच्छर के किसी इंसान को काटने के बाद डेंगू का वायरस इंसान के ब्लड में 2-7 दिनों तक रहता है।
• डेंगू बुखार के लक्षण मच्छर के काटने के 4-7 दिनों में दिखते हैं। कभी-कभी इसमें 14 दिनों का वक्त भी लगता है।
• बुखार अक्सर तेज होता है और दिन में 4-5 बार आता है।
• डेंगू बुखार तकरीबन 7-10 दिनों तक बना रहता है और अपने आप ठीक हो जाता है। बुखार से प्रभावित कुल लोगों में से 10 फीसदी को ही हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत होती है।

 डेंगू के सामान्य लक्षण हैं:


बुखार, तेज़ बदन दर्द, सिर दर्द खास तौर पर आंखों के पीछे, शरीर पर दाने आदि।
• डेंगू ऐसा भी हो सकता है कि इसके लक्षण न उभरें। ऐसे मरीज़ का टेस्ट करने पर डेंगू पॉजिटिव आता है लेकिन वह खुद-ब-खुद बिना किसी इलाज़ के ठीक हो जाता है।
• दूसरी तरह का डेंगू बीमारी के लक्षणों वाला होता है।
यह भी तीन किस्म का होता है: 1)क्लासिकल डेंगू फीवर,
2) डेंगू हेमरेजिक फीवर और
3)डेंगू शॉक सिंड्रोम।

1) क्लासिकल डेंगू फीवर एक नॉर्मल वायरल फीवर है। इसमें तेज बुखार, बदन दर्द, तेज सिर दर्द, शरीर पर दाने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह डेंगू 5-7 दिन के सामान्य इलाज से ठीक हो जाता है।
2)डेंगू हेमरेजिक फीवर थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें प्लेटलेट और W.B.C. की संख्या कम होने लगती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकत्ते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

3)डेंगू शॉक सिंड्रोम में मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है, उसका बीपी और नब्ज एकदम कम हो जाती है और तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है।

ताकि पैदा न हों मच्छर:-

• डेंगू के बचाव के लिए मच्छरों को पैदा होने से रोकना और काटने से रोकना, दोनों जरूरी हैं:
• कहीं भी खुले में पानी रुकने या जमा न होने दें। साफ पानी भी गंदे पानी जितना ही खतरनाक है। पानी पूरी तरह ढककर रखें। कूलर, बाथरूम, किचन आदि में जहां पानी रुका रहता है में दिन में एक बार मिट्टी का तेल डाल दें। ऐसा करने से उनमें मच्छरों के अंडे डिवेलप नही होंगे।
• एसी: अगर विंडो एसी के बाहर वाले हिस्से के नीचे पानी टपकने से रोकने के लिए ट्रे लगी हुई है तो उसे रोज खाली करना न भूलें। उसमें भी ब्लीचिंग पाउडर डाल कर रख सकते हैं।

• कूलर: इसका इस्तेमाल बंद कर दें। अगर नहीं कर सकते तो उसका पानी रोज बदलें और उसमें ब्लीचिंग पाउडर या बोरिक एसिड जरूर डालें।
• गमले: ये चाहे घर के भीतर हों या बाहर, इनमें पानी जमा न होने दें। गमलों के नीचे रखी ट्रे भी रोज खाली करना न भूलें।
• छत: छत पर टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें या उलटा करके रखें। पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें। पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करके साफ करने के बाद पानी भरें।
• किचन, बाथरूम: सिंक/वॉशबेसिन में भी पानी जमा न होने दें। हफ्ते में एक बार अच्छी तरह से सफाई करें। पानी स्टोर करने के बाद बर्तन पूरी तरह ढक कर रखें। बेहतर तो यह है कि गीले कपड़े से ऐसे बर्तनों को ढकें ताकि मच्छर को जगह न मिले। नहाने के बाद बाथरुम को वाइपर और पंखे की मदद से सुखा दें।
• ड्रॉइंगरूम: घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवाई का छिड़काव जरूर करें। डाइनिंग टेबल में सजाने के लिए रखे फूलों या फूलों के बर्तन में पानी रोज बदलें

ताकि न काटें मच्छर..

• आउटडोर में पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनें। खासकर बच्चों के लिए इस बात का जरूर ध्यान रखें।

• तेज महक वाली परफ्यूम लगाने से बचें क्योंकि मच्छर किसी भी तरह की तेज महक की तरफ आकर्षित होते हैं।

• कमरे में मच्छर भगानेवाले स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करें। मस्किटो रेपलेंट को जलाते समय सावधानी बरतें। इन्हें जलाकर कमरे को 1-2 घंटे के लिए बंद कर दें। सोने से पहले खिड़की-दरवाजे खोल लें। खिड़की, दरवाजे बंद रखेंगे तो सांस की बीमारी हो सकती है।
• घर की मेन एंट्रेंस के बाहर लगी ट्यूब लाइट के पास मस्किटो रेपलेंट (गुडनाइट, ऑलआउट आदि) जलाकर रखें। इससे गेट खुलने पर अंदर आनेवाले मच्छरों को रोका जा सकेगा। आजकल इसे 24 घंटे जलाकर रखें ताकि मच्छर को जगह न मिले।
• सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खुले हिस्सों पर विक्स लगाएं। इससे मच्छर पास नहीं आएंगे।
• मच्छरों को भगाने और मारने के लिए गुग्गुल जलाएं।
• लैवेंडर ऑयल की 15-20 बूंदें, 3-4 चम्मच वनीला एसेंस और चौथाई कप नीबू रस को मिलाकर एक बोतल में रखें। शरीर के खुले हिस्सों पर लगाने से पहले अच्छी तरह मिलाएं। इसे लगाने से मच्छर दूर रहते हैं।

बढ़ाएं इम्युनिटी:-


• इम्युनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता अच्छी हो तो कोई भी बीमारी आपको आसानी से दबोच नहीं पाती। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बैलेंस्ड डाइट लें। मौसमी फल, हरी सब्जियां, दाल, दूध-दही आदि खूब लें। हालांकि इम्युनिटी एक-दो दिन में नहीं बढ़ती। इसके लिए लंबे समय तक रुटीन का ध्यान रखना पड़ता है।
• खाने में हल्दी का इस्तेमाल करें। सुबह-शाम आधा-आधा छोटा चम्मच हल्दी पानी या दूध के साथ लें।
• तुलसी के 8-10 पत्ते शहद के साथ मिलाकर लें या तुलसी के 10 पत्तों को आधे गिलास पानी में उबालें। पानी आधा रह जाए तो उसे पी लें।
• विटामिन-सी से भरपूर चीजों जैसे आंवला, संतरा, मौसमी

डेंगू बुखार बच्चों को कैसे प्रभावित करता है?

कुछ लोग बिना कोई लक्षण दिखाए डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, शिशुओं और छोटे बच्चों में लक्षण अक्सर हल्के होते हैं।

शिशुओं और बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षण:

शिशुओं और बच्चों में डेंगू आमतौर पर वायरल फ्लू से शुरू होता है जैसे लक्षण तेज बुखार, नाक बहना और खांसी
इसके अलावा, वे चिड़चिड़े और सामान्य से अधिक रोने वाले भी हो सकते हैं
अन्य लक्षणों में मसूड़ों या नाक से खून बहना, त्वचा पर लाल चकत्ते और उल्टी (दिन में तीन बार से अधिक) शामिल हैं।

बड़े बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षणों में शामिल हैं:

तेज बुखार जो उतार-चढ़ाव करता है
आँखों के पीछे दर्द
मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द
एक गंभीर सिरदर्द

किसी व्यक्ति को संक्रमित एडीज मच्छर के काटने के 8-10 दिनों के बाद ज्यादातर लक्षण दिखाई देते हैं, इस दौरान एक बच्चा दिखा सकता है: भूख में कमी

उलटी अथवा डेंगू बुखार बच्चों को कैसे प्रभावित करता है?

कुछ लोग बिना कोई लक्षण दिखाए डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, शिशुओं और छोटे बच्चों में लक्षण अक्सर हल्के होते हैं।

शिशुओं और बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षण:

शिशुओं और बच्चों में डेंगू आमतौर पर वायरल फ्लू से शुरू होता है जैसे लक्षण तेज बुखार, नाक बहना और खांसी
इसके अलावा, वे चिड़चिड़े और सामान्य से अधिक रोने वाले भी हो सकते हैं
अन्य लक्षणों में मसूड़ों या नाक से खून बहना, त्वचा पर लाल चकत्ते और उल्टी (दिन में तीन बार से अधिक) शामिल हैं।

बड़े बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षणों में शामिल हैं:

तेज बुखार जो उतार-चढ़ाव करता है
आँखों के पीछे दर्द
मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द
एक गंभीर सिरदर्द

किसी व्यक्ति को संक्रमित एडीज मच्छर के काटने के 8-10 दिनों के बाद ज्यादातर लक्षण दिखाई देते हैं, इस दौरान एक बच्चा दिखा सकता है:

भूख में कमी
उलटी अथवा डेंगू बुखार बच्चों को कैसे प्रभावित करता है?

कुछ लोग बिना कोई लक्षण दिखाए डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, शिशुओं और छोटे बच्चों में लक्षण अक्सर हल्के होते हैं।

शिशुओं और बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षण:

शिशुओं और बच्चों में डेंगू आमतौर पर वायरल फ्लू से शुरू होता है जैसे लक्षण तेज बुखार, नाक बहना और खांसी
इसके अलावा, वे चिड़चिड़े और सामान्य से अधिक रोने वाले भी हो सकते हैं
अन्य लक्षणों में मसूड़ों या नाक से खून बहना, त्वचा पर लाल चकत्ते और उल्टी (दिन में तीन बार से अधिक) शामिल हैं।

बड़े बच्चों में डेंगू बुखार के लक्षणों में शामिल हैं:

तेज बुखार जो उतार-चढ़ाव करता है
आँखों के पीछे दर्द
मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द
एक गंभीर सिरदर्द

किसी व्यक्ति को संक्रमित एडीज मच्छर के काटने के 8-10 दिनों के बाद ज्यादातर लक्षण दिखाई देते हैं, इस दौरान एक बच्चा दिखा सकता है: भूख में कमी, उलटी अथवा जी मिचलाना ।

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मौसमी बीमारीयो के लक्षण पहचानकर करे बचाव : पढ़िए डॉ. राहुल व्यास का विशेष आलेख https://vinayexpress.in/2021/09/05/health-article-by-dr-rahul-vyas/ Sun, 05 Sep 2021 18:40:41 +0000 https://vinayexpress.in/?p=13909 विनय एक्सप्रेस स्वास्थ्य आलेख। विनय एक्सप्रेस के सुधि पाठकों हेतु समय समय पर स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर आलेख प्रकाशित किया जाता रहा है इसी क्रम बीकानेर शहर के मुरलीध व्यास नगर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थापित युवा चिकित्सा अधिकारी डॉ. राहुल व्यास पाठको के साथं मौसमी बीमारीयों से जुड़ी उपयोगी जानकारीयां इस आलेख के माध्यम से साझा कर रहें है।

बारिश के दौरान मच्छरों के बढ़ने से मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश के दौरान तापमान में बार-बार बदलाव की वजह से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सावधानी रखना जरूरी है। बुखार को अक्सर लोग वायरल फीवर समझ लेते हैं और कभी-कभी डेंगू या मलेरिया के मरीज की कंडिशन बिगड़ जाती है। यहां कुछ लक्षण हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं।

डेंगू

– तेज बुखार और प्लेटलेट्स का कम होना (नॉर्मल रेंज 1.5 से 4 लाख तक)
-सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द
बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मिचलाना
-शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर, लाल-गुलाबी रंग के रैशेज
– डेंगू हॅमरेजिक बुखार (DHF) में नाक, मसूढ़ों या पॉटी में खून आना
– डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) में ब्लडप्रेशर एकदम लो (ऊपर वाला 100 से नीचे खतरनाक) हो जाना और फिर मरीज का होश खोने लगना।

डेंगू से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपचार जो प्रभावी हैं:-

1.गिलोय का रस 10 मिली दिन में तीन बार आधे ग्लास पानी के साथ
2.बकरी का दूध
3. पपीते के पत्तो का रस
4. कीवी दिन में दो बार
5. अनार का रस
6. पानी का सेवन ज्यादा करना चाहिए

मलेरिया

– कंपकंपी और ठंड के साथ तेज बुखार चढ़ना
– 104-105 डिग्री तक तेज बुखार (आमतौर पर एक दिन छोड़कर आता है)
– उलटी, कमजोरी, चक्कर आना और जी मिचलाना
– जोड़ों में दर्द नहीं, लेकिन सिर दर्द और शरीर दर्द

 

वायरल

Demo Image

– तेज बुखार
– खांसी, गला खराब और नाक बहना
– सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द

बारिश के मौसम में ऐसे रखें सावधानी

बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा ठहरे हुए पानी में मच्छर पैदा होने का रहता है।
डेंगू और चिकनगुनिया का मच्छर साफ पानी में और मलेरिया का गंदे पानी में पैदा होता है। हर जगह पानी को पूरी तरह ढककर रखें। कूलर, बाथरूम, किचन आदि में जहां पानी रुका रहता है, वहां दिन में एक बार मिट्टी का तेल या मच्छर भगाने वाले स्प्रे डालें।

मच्छरों से करें बचाव

Demo Pic

ऐसे कपड़ें पहनें जिनसे पूरा शरीर ढंका रहे। खासकर बच्चों को स्कर्ट और हाफपैंट वगैरह न पहनाएं।
मच्छरों से बचने के प्रॉपर उपाय करें, कॉइल और मस्किटो रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी सबसे अच्छा तरीका है इससे हार्मफुल केमिकल्स का खतरा भी नहीं रहता।

डॉक्टर से लें सलाह

Dr. Rahul Vyas : Medical officer – UPHC MDV Colony, Bikaner

अगर 102 डिग्री तक है और कोई और खतरनाक लक्षण (रैशेज, बेचैनी, चक्कर, लगातार उलटी, खून आना आदि) नहीं हैं तो मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं। मरीज के माथे पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए
अगर दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो मरीज को डॉक्टर के पास ले जाएं। अगर 102 डिग्री से ज्यादा बुखार, आंखों में तेज दर्द, पेट में तेज दर्द, चक्कर आना, बार-बार उलटी आना, नाक, मसूढ़ों, कान या शौच में खून आना, बेहद कमजोरी महसूस करना या बेहोशी आना, तो भी तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

 

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बदलते मौसम में बीमार होने का खतरा ! जानिए डाॅ. राहूल व्यास की कलम से – कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल ? https://vinayexpress.in/2021/03/05/dr-rahulvyas-healtharticle/ Fri, 05 Mar 2021 06:40:15 +0000 https://vinayexpress.in/?p=3792 विनय एक्सप्रेस स्वास्थ्य आलेख, बीकानेर। सुबह के वक्त ठंडी हवा, दिन में जबरदस्त गर्मी, और रात में फिर ठंड। इस वक्त का बदलता मौसम किसी को भी बीमार कर सकता है। लिहाजा कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप बिस्तर पकड़ने से बच सकते हैं। मार्च का महिना शुरू हो गया है  और अब मौसम में बदलाव शुरू हो गया है। हल्की गर्मी भी महसूस होने लगी है लेकिन देर रात ठंड का अहसास अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

यही वजह है कि इस चेंजिंग वेदर में सर्दी, जुकाम, बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, आंखों में जलन, पेट दर्द और फ्लू जैसी बीमारियों का शिकार लोग बड़ी संख्या में हो रहे हैं, खासतौर पर वैसे लोग जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। ऐसे में जरूरत है बदलते मौसम में खुद को बीमारियों से बचाकर रखने के लिए अपना ख्याल रखने की । जनरल फिजिशियन डाॅ. राहूल व्यास जो की मुरलीधर व्यास काॅलोनी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में मेडिकल आॅफिसर पद पर कार्यरत है  विनय एक्सप्रेस के सुधि पाठकों के लिए बता रहें हैं कि बदलते मौसम में किस प्रकार अपना ख्याल रखा जा सकता है और किन आवश्यक टिप्स को अपनाना चाहिए:- .

अभी पंखा न चलाएं

डॉक्टर व्यास का कहना है कि चूंकि मौसम बदल रहा है, इसलिए सुबह-शाम ठंड, तो दोपहर में गर्मी महसूस होती है। ऐसे में जो लोग दोपहर को बाहर से आते हैं, वह घर आते ही पंखा चला लेते हैं जो बदलते मौसम में बीमारी की सबसे बड़ी वजह है। इससे सर्द-गर्म हो जाता है, जिसके चलते कुछ देर बाद बुखार महसूस होने लगता है। इसलिए जब भी बाहर से आएं, गर्मी महसूस हो तो पंखा ना चलाएं बल्कि कुछ देर आराम से बैठें। तापमान अपने आप सामान्य लगने लगेगा।

सफाई का रखें विशेष ध्यान

डाॅ. राहूल व्यास के अनुसार सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियों से बचने का सबसे आसान तरीका है हाथों को साफ रखना। हमारे हाथ हमेशा ही गंदे रहते हैं क्योंकि ज्यादातर लोग अपने हाथों को सामने रखकर खांसते या छींकते हैं या फिर पूरे टाइम अपनी नाक को हाथों से ही पोंछते रहते हैं। लिहाजा हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह से धोना बेहद जरूरी है। व्यास की मानें तो कम से कम 20 सेकंड तक हथेली, उंगली, उंगली के टिप्स, हाथों के पीछे का हिस्सा और नाखून के आसपास के हिस्से को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां आप हैंडवॉश नहीं कर सकते तो सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें, इसके अतिरिक्त अपने आस पास क्षेत्र में भी जागरूक रहकर साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

 

ऐसी चीजें खाएं ताकि इम्यूनिटी हो स्ट्रॉन्ग

जिन लोगों को जल्दी सर्दी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियां जकड़ लेती हैं, अक्सर उन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। उन लोगों को इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग करने वाली चीजें खानी चाहिए। ऐसे लोग चाहें तो ग्रीन टी या ब्लैक टी पी सकते हैं, लेकिन दिन में केवल एक या दो कप ही पिएं। ज्यादा पीने पर तबियत बिगड़ भी सकती है। इसके अलावा आप कच्चा लहसुन, दही, ओट्स, विटामिन डी और सी युक्त पदार्थ जैसे नींबू और आंवले का सेवन कर सकते हैं।

 

बदलते मौसम में लापरवाही कर सकती है बीमार, रहें सतर्क

मौसम के साथ बदलें खान-पान

बीमारियों से बचने में खान-पान का बेहद अहम रोल होता है। बदलते मौसम में खानपान में भी बदलाव करना जरूरी है। डॉक्टर राहूल व्यास का कहना है कि अक्सर बदलते मौसम में मूड स्विंग ज्यादा होता है। ऐसे में हमें खाने में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा लेना चाहिए। यह हमें मूड स्विंग और डिप्रेशन से दूर रखता है और दिल और दिमाग को अच्छा महसूस होता है। प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, दूध, अंडे का सफेद वाला हिस्सा, टमाटर, चावल, गेहूं, सेब और ड्राइफ्रूट्स कुछ ऐसी चीजें हैं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट ज्यादा पाया जाता है।

 

विटमिन डी सबसे जरूरी

अक्सर आपने सुना होगा कि बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो ज्यादा देर खड़े नहीं रह पाते या फिर ऐसे लोग जिनकी हड्डियां बेहद कमजोर होती हैं और जरा-सा गिरने पर टूट जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनमें विटमिन डी की कमी होती है। वैसे तो आज हर इंसान में विटामिन डी की कमी पाई जाती है लेकिन इसका अंतर सभी लोगों में अलग-अलग होता है। इसे आमतौर पर धूप से ही लिया जाता है, लेकिन अब इसके लिए कई दवाएं भी मौजूद हैं।

 

फल और सब्जियों का ज्यादा करें सेवन

बदलते मौसम में फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करना चाहिए। खासतौर पर हरी सब्जियों का। गाजर, मूली, टमाटर जैसी सब्जियां अधिक मात्रा में लेनी चाहिए क्योंकि इनमें एंटीऑक्सिडेंट तत्व होते हैं, जो शरीर में जमे तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसके साथ ही फलों में भी सेहत का राज छिपा होता है, जो बॉडी को फ्रेश रखता है और शरीर को बीमारियों से बचाता है।

मास्क का प्रयोग जरूर करें

अगर आपकी खुद की तबीयत खराब है तो आप घर पर ही रहकर आराम करें या फिर वर्क फ्रॉम होम कर लें ताकि बाकी लोग बीमार पड़ने से बच जाएं। इसके अलावा अगर आप चेजिंग वेदर में इंफेक्शन से बचना चाहते हैं तो भीड़ भाड़ वाले इलाके में न जाएं। अगर कोई व्यक्ति पहले से ही सर्दी-जुकाम या बुखार से पीड़ित है तो उससे हाथ या गले मिलने से बचें और दूरी बनाकर रखें। साथ ही एक से अधिक व्यक्ति होनें पर मास्क का प्रयोग जरूर करें, सार्वजनिक स्थान पर भी मास्क लगाकर जाएं।

–Dr. Rahul Vyas
Opp. Mausam vibag,
2-127 MDV colony ,
Bikaner
9783678737

E.mai:vinayexpressindia@gmail.com

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