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विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने शनिवार को बज्जू उपखण्ड की बीकमपुर ग्राम पंचायत का दौरा किया । इस दौरान उन्होंने मनरेगा कार्यों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पावर ग्रिड स्टेशन का निरीक्षण किया।
मनरेगा कार्य में निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं के प्रति सख्त नाराजगी जताते हुए जिला कलेक्टर ने जिला परिषद सीईओ को संबंधित कार्मिक के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने कहा कि स्वीकृत किए गए कार्य की प्रगति मापदंड अनुरूप नहीं है। इस तरह का रवैया स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जिला कलेक्टर वृष्णि ने बीकमपुर पंचायत में जनसुनवाई की व आमजन के परिवाद सुने। मौके पर ही अधिकारियों को विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण करने के निर्देश देते हुए जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने कहा कि आमजन के छोटे-छोटे हो सकने लायक कार्यों के प्रति विभागीय अधिकारी संवेदनशील रहें। अधिकारी अपने विभाग में नियमित रूप से जनसुनवाई करें तथा ऐसे परिवादों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए। ग्रामीणों ने पानी, बिजली, चिकित्सा सुविधाओं और अतिक्रमण हटाने से जुड़े परिवाद प्रस्तुत किए।
आदर्श आरोग्य पीएचसी की व्यवस्थाओं कर जताया संतोष
जिला कलेक्टर ने आदर्श आरोग्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया और साफ-सफाई, उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों व व्यवस्थाओं के प्रति संतोष जताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बज्जू व पंचायत समिति के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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विनय एक्सप्रेस समाचार, पाली। जिला कलक्टर श्री नमित मेहता ने बुधवार को मंडिया रोड औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सीईटीपी प्लांट यूनिट संख्या 4 एवं 6 का अवलोकन किया।
जिला कलेक्टर ने सीईटीपी यूनिट संख्या 4 के अपग्रेडेशन के कार्य का अवलोकन किया जहां उन्होंने कार्य की प्रगति की जानकारी ली। सीईटीपी के अधिकारियों वह कंपनी के प्रतिनिधियों ने जिला कलक्टर को अवगत करवाया कि यह प्लांट टरसरी लेवल तक सितंबर माह में तैयार हो जाएगा।
श्री मेहता ने सीईटीपी यूनिट संख्या-6 का भी अवलोकन किया जहां उन्होंने टरसरी ट्रीटमेंट के पश्चात होने वाले अल्ट्राफिल्ट्रेशन,आरो एवं एमई के संदर्भ में अधिकारियों से जानकारी ली एवं मौके पर टरसरी ट्रीटेड पानी नोमर्स पर ट्रीट कर अल्ट्राफिल्ट्रेशन एवं आरो पर 200 टीडीएस का पानी देखा जिसे मौके पर पीने योग्य पाया गया एवं शेष पानी को उद्योग इकाइयों द्वारा पुनः उपयोग लिया जा सकेगा।
अधिकारियों ने जिला कलक्टर को जानकारी देते हुए बताया कि आगामी दो से 3 दिन पश्चात 3 एमएलडी पानी उद्योग इकाइयों को देना प्रारंभ किया जाएगा।
जिला कलक्टर ने प्लांट के अवलोकन के पश्चात कहा कि किसानों ,उद्यमियों एवं शहर के सभी वर्गों के लिए यह प्लांट फायदेमंद रहेगा। उन्होंने प्रदूषण निवारण की समस्या का स्थाई समाधान करने के प्रयास पर सीईटीपी अधिकारियों की सराहना की।
श्री मेहता ने निर्देश दिए कि यूनिट से सभी औद्योगिक इकाइयों को जोड़ा जाए साथ ही जिन औद्योगिक इकाइयों द्वारा नियमों की अवहेलना की जा रही है उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सीईटीपी के अध्यक्ष श्री अनिल गुलेच्छा ने बताया कि यूनिट संख्या 6 में 12 एमएलडी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर अपग्रेडेशन का कार्य सूरत की मैसर्स सौराष्ट्र एनवारो प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा किया गया है।
इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारियो व उद्यमीगणों के साथ की बैठक
अवलोकन के पश्चात जिला कलक्टर ने जिले के इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारियो व उद्यमीगणों के साथ बैठक की जहां उन्होंने इंडस्ट्री से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली व उद्योगों से जुड़े प्रत्येक समस्याओं को जल्द दूर किया जाएगा।
उन्होंने इंडस्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारियों व उद्यमी गणों को स्वयं की औद्योगिक इकाइयों को सीईटीपी यूनिट से जोड़े जाने की अपील की।
अवलोकन के दौरान पाली उपखंड अधिकारी श्री ललित गोयल, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी श्री राहुल शर्मा, सचिव श्री अरुण जैन सहित इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पदाधिकारीगण व उद्यमीगण मौजूद रहे।


इस अवसर पर कार्मिको सहित आमजन ने उन्हें विदा करते हुए अपने अनुभव साझा करते हुए उनके कार्यो की सराहना की। इस दौरान जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि पदस्थापन होना तो स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन उन्होंने जिले के लिए दूरदृष्टि सोच रखते हुए कार्य किया, जिसकी बदौलत हर विभाग में कार्मिको व अधिकारियों की टीम भावना से कार्य करने की सोच के चलते नागौर जिले को प्रदेश में अव्वल रखा। इस दौरान उन्होंने जिले के सभी ब्लाॅक स्तरीय अधिकारियों विकास अधिकारी, तहसीलदार, उपखण्ड अधिकारी व नगर निकायों के अधिशाषी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलाव लाने के लिए पूर्ण जुनून के साथ कार्य करें। इसके लिए समय प्रबंधन होना जरुरी है।

इस दौरान उन्होंने अधिकारियों में काम के प्रति लगाव व कार्यकुशलता का जोश भरते हुए कहा कि काम करते है तो परिणाम अवश्य मिलता है। इसलिए समानुभूति के भाव से कार्य करते रहें। उन्होंने कहा कि व्यवहारिक भाव से किया गया कार्य आपकी कुशलता को प्रकट करता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यो में बदलाव लाना हो तो जमीर की अदालत में जुनून के साथ जुटे रहे। किसी भी काम को सार्थक बनाने के लिए उसके पीछे पड़कर अभियान के रुप में प्रभावी बनाएं। किसी काम को हाथ में लेने के बाद उसे अंजाम तक पहुंचाएं, तभी सुकून मिलेगा।
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जिला कलक्टर को दिल से विदाई देते हुए सभी ब्लाॅक स्तरीय अधिकारियों ने कहा कि उनके कुशल प्रबंधन व मॉनिटरिंग की बदौलत नागौर में जन कल्याण की योजनाओं व कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रगति के सौपान तक पहुंचाया गया। इस दौरान सभी विभागीय अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग में किए गए नवाचार व इससे आए नवीन बदलावों की मिसाल देते हुए जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी का दिल से आभार जताया।
इस अवसर पर नगरपरिषद आयुक्त श्रवणराम चैधरी ने कहा कि जिला कलक्टर नंे रुटीन के अलावा जनहित के कार्य भी किए, जिससे आज उन्हें विदा करते समय लोगों का अलग ही उत्साह दिख रहा है। उन्होंने जिलंे में डाॅ. सोनी द्वारा झड़ा तालाब, बख्तसागर सहित सेल्फी पाॅईन्ट के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यो को लेकर आभार जताया। इस अवसर पर एडीएम डीडवाना, नागौर, अधिशाषी अधिकारी डेगाना, विकास अधिकारी भैरुंदा, मेड़ता, तहसीलदार मूण्डवा, खींवसर, उपखण्ड अधिकारी नागौर, खींवसर, नावां, लाडनूं सहित सभी अधिकारियों ने जिला कलक्टर के कार्यो व उनके आदर्शो को मानकर उनसे सीख लेने की प्रेरणा लेते हुए अपने मन के भाव प्रकट किए। इस अवसर पर सभी अधिकारियों ने कहा कि जिला कलक्टर द्वारा वीसी के माध्यम से उन्हें मोटिवेट मिलता रहा तथा उन्होंने राजनैतिक पेचिदगियों को किनारे कर टीम भावना से कार्य किया। जिससे जिले में प्रशासनिक सुधार हुए। डाॅ. सोनी ने पंचायतीराज व्यवस्था पर मजबूत पकड़ रखते हुए आॅडिट से लेकर उच्च स्तर तक के कार्य किए, जिसकी सराहना प्रदेशभर में हो रही है। उनका कार्यकाल हमेशा नवाचार की ओर रहा। जिससे जिले में लाडेसर अभियान, रास्ता खोलो अभियान, मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी, हरा-भरा तालाब, चरण पादूका सहित वैक्सीनेशन आदि अनेक कार्यो को गति मिली। इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि जिला कलक्टर की बेहतरीन लीडरशिप, कुशल समय प्रबंधन व कार्य करने की क्षमता में दूरदृष्टिता आदि से प्रेरणा मिली। जिससे जिले में प्रशासनिक सुधार होने के साथ विभागीय कार्यो को गति मिली।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर मोहनलाल खटनावलिया, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीरालाल मीणा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेराम महिया, नगरपरिषद आयुक्त श्रवणराम चैधरी सहित जिले के सभी ब्लाॅक स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

परीक्षा की पूर्व तैयारियों के संबंध में सोमवार को जिला कलक्टर नमित मेहता की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित हुई। इस दौरान मेहता ने कहा कि परीक्षा के दौरान सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहें तथा किसी भी परीक्षार्थी को बेवजह परेशानी नहीं हो। परीक्षा का आयोजन पूर्ण पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप हो, इसके मद्देनजर इससे जुड़े प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी गंभीरता से कार्य करें। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों एवं उनके परिजनों के लिए आवागमन, ठहराव, भोजन, पेयजल तथा शौचालय सहित प्रत्येक व्यवस्था का ध्यान रखा जाए।

जिला कलक्टर ने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा बसों के ठहराव केन्द्रों तथा नगर निगम द्वारा धर्मशालाओं और रैनबसेरों का चिन्हीकरण किया जाए। इन आश्रय स्थलों पर इंदिरा रसोई के काउंटर लगाए जाएं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक परीक्षा केन्द्र, बस स्टेंड सहित प्रमुख स्थानों पर सीएचए नियुक्त किए जाएं। मोबाइल मेडिकल टीमें तथा एम्बूलेंस की व्यवस्था हो। बस स्टेंड पर प्रोपर पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, शिक्षा विभाग, परिवहन तथा नगर निगम के नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएं। इनमें राउंड द क्लाॅक आधार पर कार्मिक नियुक्त किए जाएं। सभी नियंत्रण कक्ष आपस में भी समन्वय रखें।

मेहता ने केन्द्र पर्यवेक्षक, वीक्षक एवं अन्य कार्मिकों की नियुक्ति, परीक्षा सामग्री एवं प्रश्न पत्रों की सुरक्षा सहित विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान अवांछित गतिविधि किसी भी स्तर पर नहीं हो, इसके मद्देनजर पूर्ण सतर्कता रखी जाए। परीक्षा केन्द्रों में प्रवेश के समय परीक्षार्थियों के संबंध में रखी जाने वाली सावधानियों का ध्यान रखा जाए।

पुलिस अधीक्षक प्रीति चंद्रा ने कहा कि परीक्षा केन्द्रों की थानावार सूची उपलब्ध करवाई जाए, जिससे पुलिस से संबंधित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा सकें। उन्होंने कहा कि परीक्षा केन्द्रों पर नियुक्त प्रत्येक कार्मिक को परीक्षा से संबंधित आवश्यक नियमों की जानकारी हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि निर्धारित परीक्षा केन्द्रों में 64 निजी तथा 34 सरकारी भवन हैं। प्रत्येक परीक्षा केन्द्र के लिए प्रत्येक पारी के लिए आॅब्जर्वर तथा फील्ड सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई है। प्रत्येक कक्ष के लिए दो-दो वीक्षक लगाए जाएंगे। परीक्षा के जिला समन्वयक डाॅ. बिट्ठल बिस्सा ने परीक्षा के लिए निर्धारित अन्य नियमों की जानकारी दी।

इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर (नगर) अरुण प्रकाश शर्मा, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमप्रकाश, नगर विकास न्यास सचिव नरेन्द्र पुरोहित, नगर निगम आयुक्त पंकज शर्मा, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी ज्ञानदेव विश्वकर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ. राजकुमार शर्मा, भूप सिंह तिवाड़ी आदि मौजूद रहे।




विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। राजस्थान के सरकारी विभाग में पेपरलैस आदेश निकाले जा रही है, जिससे अधिकारियों का काम बहुत आसान हो रहा है. राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस डॉ. समित शर्मा ने इस पहल की शुरूआत की है.
सरकारी दफ्तरों में जाते ही हमे फाइलों का अंबार देखने को मिलता है, जिसमें नई पुरानी फाइलों से सरकारी दफ्तर भरे रहते है, लेकिन राजस्थान के सरकारी विभाग में भारी भरकम फाइलों से मुक्ति मिल गई है. राजस्थान में तकनीक के जरिए पूरे सिस्टम को पेपरलैस करने की कोशिश की जा रही है, जिसकी शुरूआत वरिष्ठ आईएएस डॉ. समित शर्मा ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से की. विभाग के सचिव डॉ समित शर्मा ने अपने विभाग में पूरे सिस्टम को बहुत आसान बना दिया है

दरअसल समित शर्मा अपने विभाग में ऐसे आदेश निकाल रहे हैं, जिमसें क्यू-आर कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है. यानि अधिकारियों को अपने मोबाइल में क्यूआर कोड का सिर्फ स्कैन करना है और पूरा आदेश मोबाइल में ओपन हो जाएगा. आदेश के साथ-साथ विभाग में चाहे डेटा की बात हो या फिर योजनाओं की. सभी कार्यों में डॉ. समित शर्मा स्कैनिंग सिस्टम को आजमाकर अपने विभाग का काम बहुत आसान कर रहे हैं. समित शर्मा के इस प्रयास से पूरा सिस्टम तो अपडेट होगा ही, इसके साथ साथ पूरी सरकारी प्रक्रिया पेपरलेस भी होगी.
अमूमन ये प्रक्रिया आपने अब तक प्राइवेट दफ्तरों में देखी होगी, लेकिन संभवतया राजस्थान के किसी भी सरकारी विभाग में इस तरह की कार्यशैली पहली बार शुरू हुई है. समित शर्मा ने इससे पहले भी वाट्सअप और दूसरे साफ्टवेयर के जरिए विभाग के काम को आसान बनाने की कोशिश की थी. प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी लगातार यही कह रहे हैं कि तकनीक को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, ताकि काम आसान और तेजी से हो सके.
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विनय एक्सप्रेस समाचार,नागौर। जिला कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी की अभिनव पहल अभियान लाडेसर ने रंग दिखाना शुरू किया कर दिया है । एक माह के फोलोअप से यह पता चला है कि इस अभियान से 699 बच्चों को अत्यधिक लाभ पहुंचा है । यह अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों की श्रेणी से निकलकर सामान्य बच्चों की श्रेणी में आ गए हैं । उल्लेखनीय है कि नागौर जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी द्वारा 27 मई से नागौर जिले में अभियान लाडेसर का शुभारंभ किया गया । इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कोरोना की तीसरी लहर की आशंका से जिले के नौनिहालों को सुरक्षित रखना था। इसके लिए जरूरी था कि उन में कुपोषण और एनीमिया को पहचान कर समय रहते इलाज किया जाए और उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास किया जाए ।

जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में आईसीडीएस , चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग तथा शिक्षा विभाग के समन्वित इस कार्यक्रम में जीरो से 5 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग करके उनमें से अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों को चिह्नित करना था । इसी प्रकार से इससे अधिक उम्र के बच्चों विशेष रूप से रक्ताल्पता वाली किशोरी बालिकाओं को भी चिह्नित करके उनका डेटाबेस तैयार करना व उनको फोलिक एसिड , आयरन की टेबलेट भी उपलब्ध करवाना इस अभियान में शामिल रहा । साथ ही जीरो से 5 वर्ष तक के कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को भामाशाहों के सहयोग से लाडेसर पोषण किट उपलब्ध करवाना था। इस लाडेसर पोषण किट में चार प्रकार की दालें , गुड़ , चावल , भुने हुए चने , मूंगफली व सोयाबीन का तेल शामिल था ।
इस अभियान लाडेसर में 13 ब्लॉकों के 5 वर्ष से कम 395186 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें से 144 बच्चों को अति कुपोषित व 4010 बच्चों को कुपोषित बच्चों के रूप में चिह्नित किया गया । इसमें सर्वाधिक नागौर ब्लॉक में 51662 व मकराना ब्लॉक में 50810 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई । आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा सहयोगिनी द्वारा वेट मशीन से वजन लेकर एवं एमयूएसी टेप मिड अपर आर्म सरकम्फ्रेंस टेप , मध्य ऊपरी बांह नापने की टेप के माध्यम से इन बच्चों की पोषणता जांच की गई तथा ऐसे अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों को लाडेसर पोषण किट के द्वारा पौष्टिक आहार से भी संबल दिया गया । साथ ही अतिकुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय के एमटीसी वार्ड में भी भर्ती करके पोस्टिक आहार व मेडिसिन से भी इलाज किया गया । एक माह तक दिए गए लाडेसर पोषण आहार से नागौर ब्लॉक में 138 , रिंया बड़ी ब्लॉक में 169 बच्चे अति कुपोषित व कुपोषित श्रेणी से निकलकर सामान्य बालकों की श्रेणी में आ गए । इसी प्रकार डीडवाना ब्लॉक का आंकड़ा भी सौ के पार रहा । वही नावां व परबतसर ब्लॉक में भी सराहनीय कार्य रहा । अब पूरे जिले में 79 अति कुपोषित व 3376 कुपोषित बच्चे शेष रहे हैं । इस प्रकार कुल 3455 बालकों को पोषण की दृष्टि से सामान्य बच्चों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य शेष है जिनका प्रत्येक एक-एक माह के अंतराल पर फॉलो अप किया जाना है । इसलिए कहा गया है लक्ष्य तक पहुंचे बिना , पथ में पथिक विश्राम कैसा ।।
अभियान लाडेसर के नोडल अधिकारी एवं बाल विकास परियोजना नागौर के सीडीपीओ दुर्गा सिंह उदावत ने फॉलोअप के परिणाम जारी करते हुए बताया अभियान लाडेसर के तहत चिह्नित बालक बालिकाओं में इस पोषण किट का और चिकित्सा सुविधाओं का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है ।
जो इस बात से स्पष्ट है कि जिले के 144 अति कुपोषित बच्चों में से इस अल्पावधि में एमटीसी पर उपचार के पश्चात 12 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं वहीं घर पर लाडेसर पोषण किट का उपभोग करते हुए एवं विशेष देखरेख के चलते 53 बच्चे अति कुपोषित से कुपोषित की श्रेणी में यानी रेड जोन से येलो जोन में शिफ्ट हो गए हैं । वही 4010 कुपोषित बच्चों में से लाडेसर पोषण किट का उपयोग करते हुए एवं विशेष देखरेख के चलते 687 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं।
354 किशोरी बालिकाएं रक्ताल्पता की श्रेणी से निकली बाहर -हुई सामान्य
वहीं एनीमिक किशोरी बालिकाओं में भी सुधार नजर आया है । अब तक कुल 2049 किशोरी बालिकाएं रक्ताल्पता से पीड़ित पाई गई थी । उनमें से 354 बालिकाएं रिकवर हो चुकी है । इसका अगला फॉलोअप 1 से 7 अगस्त के मध्य होना है और अगर इसी तरह से इन बच्चों को विशेष पूरक पोषाहार और चिकित्सकीय देखभाल जारी रही तो वह दिन दूर नहीं जब नागौर जिला देश का ऐसा प्रथम जिला हो जाएगा, जो पूरी तरह से कुपोषण मुक्त कहलाएगा ।
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उन्होंने बताया कि शासन सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग नवीन जैन के अनुसार जिले में अवैध बॉयोडीजल पंप पाए जाने पर सीज करने की कार्यवाही के निर्देश दिए हुए हैं।
दस्तावेज प्रस्तुत नही किये जाने पर शोभाणा में संचालित विष्णु फ्यूल सेंटर को सील किया गया । मौके पर भंडारित प्रोडक्ट के सैंपल लिए गए जिसको प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। इस कार्यवाही में प्रवर्तन निरीक्षक योगेश चौधरी भी शामिल थे।

बैठक में योजना से जुड़ी सभी तैयारियों की गहन समीक्षा करते हुए श्रीमती गुहा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की मंशा है कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आमजन औषधीय पौधों का उपयोग करते हुए अपने परिवार का स्वास्थ्य बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि वितरण के लिए नर्सरी में औषधीय पौधे तैयार हो चुके हैं। वन विभाग के स्टाफ ने पौधे तैयार करने में कड़ी मेहनत की है और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए योजना की जानकारी भी आमजन तक पहुंचाई जा रही है। इन सब प्रयासों की बदौलत योजना को लेकर प्रदेश भर में सकारात्मक माहौल बना है। उन्होंने इसी सकारात्मकता को बनाए रखते हुए सभी से योजना की सफलता में योगदान देने का आह्वान किया।

बैठक में श्रीमती गुहा ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत पौध वितरण की जिम्मेदारी जिला कलक्टर के स्तर पर पूरी की जानी है। पौध वितरण के बाद संबंधित जानकारी मॉनिटरिंग फॉर्मेट में संधारित की जाएगी। इस दौरान श्रीमती गुहा ने सभी उप वन संरक्षकों से योजना की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन-बल प्रमुख) श्रीमती श्रुति शर्मा ने मानसून की देरी के मद्देनजर नर्सरी में तैयार पौधों को धूप से बचाने के लिए निर्देश दिए।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने बैठक का संचालन करते हुए बताया कि वन विभाग द्वारा वितरण टीम के माध्यम से स्वस्थ पौधे आमजन तक पहुंचाए जाएंगे। इसलिये उनके वितरण और निगरानी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। पौध वितरण के संभावित रूट चार्ट सहित अन्य व्यवस्थाएं जल्दी पूर्ण की जाएं।

इसके अलावा डॉ. पाण्डेय ने विभागीय पौधारोपण के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि योजना को लेकर जैसा उत्साह अभी तक देखा जा रहा है, उसे बरकरार रखते हुए सभी मिलकर योजना को सफल बनाएं।
इसके पश्चात घर-घर औषधि योजना क्रियान्वयन समिति की बैठक प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन-बल) प्रमुख श्रीमती श्रुति शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इस अवसर पर एपीसीसीएफ (कैंपा) श्रीमती शिखा मेहरा, एपीसीसीएफ (उत्पादन) श्री आनंद मोहन, एपीसीसीएफ (विकास) श्री अरिंदम तोमर, एपीसीसीएफ (सुरक्षा) श्री वेंकटेश्वर शर्मा, एपीसीसीएफ (वन सुरक्षा) श्री उदय शंकर, एपीसीसीएफ (मॉनिटरिंग एंड इवेलुएशन) श्री मुनीश कुमार गर्ग सहित अन्य मौजूद रहे जबकि सीसीएफ़, घर-घर औषधि योजना से जुड़े जिला और ब्लॉक स्तर तक उपलब्ध वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की राजकीय सुविधा के माध्यम से अधिकारी ऑनलाइन जुड़े रहे।

इस बैठक की विशेष बात यह रही कि इसमें वन विभाग का प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी सम्मिलित हुए। फील्ड लेवल के प्रत्येक वनरक्षक, वनपाल, क्षेत्रीय वन अधिकारी, सहायक वन संरक्षक, उप वन संरक्षक, वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।
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विनय एक्सप्रेस समाचार, नागौर। जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी की अध्यक्षता में गुरूवार को कलेक्ट्रेट में भारत निर्माण राजीव सेवा केंद्र सभागार में जिला जनअभाव अभियोग एवं सतर्कता समिति की बैठक संपन्न हुई जिसमें रखे गए 17 प्रकरणों में 1 प्रकरण में निराधार शिकायत पाये जाने पर इस पर विचार नहीं किया गया तथा शेष अन्य प्रकरणों पर विचारोपरांत संबंधित अधिकारियों को जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
जिला कलक्टर डाॅ. सोनी ने उपखण्ड़ अधिकारी मकराना एवं खनिज अभियंता मकराना से संबंधित प्रकरण श्रीमती मुन्नी देवी पत्नी स्वर्गीय किशन द्वारा आवाप्त की गई कृषि भूमि का मुआवजा भुगतान नहीं मिलने के प्रकरण में अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लाभार्थी को भुगतान करा दिए जाने के लिए इन अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रशंसा की गई।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद नागौर के 2 प्रकरण जो हरसौल तहसील डेगाना के तेजकरण व कैलाशचन्द्र पुत्र स्व. औकारलाल सोनी के प्रधानमंत्री आवास योजना (बीपीएल परिवार) में भूखण्ड़ आबादी क्षेत्र में दिए जाने का निर्णय लिया गया और इस परिवार को आगामी बैठक से पूर्व लाभान्वित कराने के निर्देश दिए गए। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी से संबंधित 1 प्रकरण रामावि मांझवास का परिक्षा परिणाम खराब होने के लिए सामने आया जिस पर जिला कलक्टर ने शिक्षा अधिकारी को समुचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में नागौर शहर के देहली गेट स्थित आराजी वक्फ सम्पति से संबंधित कार्यवाही की शिकायत निराधार पाये जाने पर इस प्रकरण को बंद करने का निर्णय लिया गया। बैठक में डेगाना तहसील से संबंधित 1 प्रकरण कोर्ट में लंबित होने के कारण विचार नहीं किया जा सका।

इस बैठक में उपखण्ड़ अधिकारी जायल, नावां, मेड़ता, मकराना, डीडवाना एवं तहसीलदार खींवसर व डेगाना, साथ ही कोषाधिकारी व उपरजिस्ट्रार सहकारी समितियां, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, अतिरिक्त जिला परियोजना समंवयक, विकास अधिकारी पंचायत समिति लाडनूं व मकराना से संबंधित प्रकरण विचार विमर्श के लिए प्रस्तुत किए गए।
इस बैैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जवाहर चौधरी, सहायक जिला कलक्टर रामजस विश्नोई, सीएमएचओ मेहराम महिया, नगर परिषद आयुक्त श्रवण चौधरी, सहायक निदेशक समाज कल्याण रामदयाल, शिक्षा विभाग, पुलिस सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

