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new delhi – Vinay Express https://vinayexpress.in खबर हमारी विश्वास आपका Sat, 08 Jan 2022 13:25:12 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 गोवा में परमाणु सक्षम ‘राफेल मरीन’ का INS विक्रांत के लिए किया गया परीक्षण https://vinayexpress.in/2022/01/08/new-delhi-49/ Sat, 08 Jan 2022 13:25:12 +0000 https://vinayexpress.in/?p=22495 विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने गोवा में आईएनएस हंसा में समुद्री लड़ाकू विमान ‘राफेल मरीन’ का परीक्षण किया है। नौसेना स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) विक्रांत के लिए समुद्री लड़ाकू जेट राफेल का एक बैच खरीदने की योजना बना रही है। भारत की जरूरतों के लिहाज से फ्रांसीसी कंपनी ने लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक परमाणु सक्षम ‘राफेल मरीन’ भेजा। पिछले महीने भारत यात्रा पर आईं फ्रांस की रक्षा मंत्री ने आईएसी के लिए जेट विमानों की आपूर्ति करने के संकेत दिए थे।

दिसंबर में भारत आईं फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने समुद्री विमानों की आपूर्ति के दिए थे संकेत

दिसंबर, 2021 में भारत की यात्रा पर आईं फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने कहा था कि उनका देश भारत को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत-प्रशांत एक बहुत विस्तृत क्षेत्र है और चीन के साथ संबंधों में तनाव के कारण इस बड़े क्षेत्र के पूर्वी हिस्से पर राजनीतिक ध्यान अधिक है। फ्रांस और भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के महत्वपूर्ण मुद्दों पर समान विचार साझा करते हैं। फ्रांस इंडो पैसिफिक में पड़ोसी देशों के साथ बहुपक्षीय संबंधों को विकसित करना चाहता है। इस रणनीति के केंद्र में भारत है।

फ्रांस ने समुद्र में लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक ‘राफेल मरीन’ भारत भेजा

फ्रांसीसी रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारतीय नौसेना के लिए समुद्री लड़ाकू जेट राफेल-एम देने की पेशकश की है। नौसेना भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत को अपने बड़े में शामिल करने से पहले रूसी मिग-29के को बदलना चाहती है। इसीलिए फ्रांस ने भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के साथ अपनी लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए समुद्री लड़ाकू विमान राफेल-एम भेजा, ताकि स्की-जंप करने की क्षमता का प्रदर्शन किया जा सके।

नौसेना ने 2017 में 57 नए लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी कंपनियों को सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया था। तभी से कंपनी भारत में राफेल एम विमानों की क्षमता का प्रदर्शन करना चाहती है। आज हुए परीक्षण के दौरान राफेल एम ने आईएनएस हंसा, गोवा में तट-आधारित परीक्षण सुविधा (एसबीटीएफ) से उड़ान भरी। इससे पहले अमेरिकी कंपनी बोइंग इंडिया भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों के लिए अपने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान का आधिकारिक तौर पर अगस्त, 2021 में स्की जंप परीक्षण का प्रदर्शन कर चुकी है। कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक वीडियो में दिखाया गया है कि यूएस के नेवल एयर स्टेशन में पेटक्सेंट रिवर के किनारे सुपर हॉर्नेट शॉर्ट टेकऑफ अरेस्ट रिकवरी सिस्टम से सफलतापूर्वक लॉन्च हो रहा है। यह डेक आधारित लड़ाकू जेट आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत से भी लॉन्च किया जा सकता है।

भारतीय नौसेना मिग-29 का कर रही उपयोग

भारतीय नौसेना मौजूदा समय में मिग-29के का उपयोग कर रही है, लेकिन इन विमानों में रखरखाव, सेवा उपलब्धता और तकनीकी कठिनाई से संबंधित कई मुद्दे हैं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले एक वर्ष में तीन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। देश का पहला स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत फिलहाल समुद्री परीक्षण के अंतिम चरण में है और इसके गणतंत्र दिवस तक नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसलिए नौसेना इससे पहले आईएसी विक्रांत के लिए समुद्री लड़ाकू जेट राफेल का एक बैच खरीदने की योजना को अंतिम रूप देना चाहती है।

फाइटर जेट राफेल के मुकाबले ‘राफेल मरीन’ की खासियत

भारतीय वायुसेना के उपयोग में आने वाले राफेल जेट के समुद्री संस्करण ‘राफेल मरीन’ में एक अंडरकारेज और नोज व्हील, एक बड़ा अरेस्टर हुक, एक एकीकृत सीढ़ी जैसे कई अन्य मामूली अंतर हैं। स्की टेक-ऑफ के लिए राफेल-एम चार-पांच टन बाहरी भार (पूर्ण आंतरिक ईंधन के साथ) तक ले जा सकता है। कम आंतरिक ईंधन के साथ, यह मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर अधिक हथियार ले जा सकता है। इस प्रकार यह सभी भूमिकाओं को पूरा कर सकता है, जिसमें लड़ाकू हवाई गश्त, अवरोधन, एडी एस्कॉर्ट, साथ ही समुद्र और भूमि-हड़ताल पूर्ण आंतरिक ईंधन के साथ शामिल हैं। परीक्षण के लिए भेजा गया राफेल-एम भारत-विशिष्ट संवर्द्धन के साथ लड़ाकू का नवीनतम संस्करण है। परमाणु सक्षम राफेल-एम हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल उल्का, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें स्कैल्प और हैमर प्रिसिजन गाइडेड गोला बारूद ले जा सकता है।

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जानें बूस्टर डोज की कैसी है तैयारी और किन्हें दिया जाएगा यह टीका https://vinayexpress.in/2022/01/08/new-delhi-48/ Sat, 08 Jan 2022 13:17:51 +0000 https://vinayexpress.in/?p=22492 विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। 3 जनवरी 2022 से देश में 15-18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया। वहीं अब आगामी ’10 जनवरी’ से देश में कोरोना वैक्सीन की ‘बूस्टर डोज’ लगाई जाएगी। इसे लेकर सारी तैयारियां कर ली गई हैं। याद हो पीएम मोदी ने कोरोना से सीधी लड़ाई लड़ रहे अग्रिम मोर्चे के कर्मियों (फ्रंटलाइन वर्कर्स) और हेल्थकेयर वर्कर्स को वैक्सीन की प्रिकॉशनरी डोज देने की बात कही थी। इसके साथ-साथ जो लोग 60 साल से ऊपर के हैं उन्हें वैक्सीन की तीसरी डोज यानि बूस्टर डोज दी जाएगी। गौरतलब हो देश के भीतर अभी तक 90 प्रतिशत व्यस्क जनता को पहली डोज दी जा चुकी है। वहीं 62 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें दोनों डोज दी जा चुकी है।

बता दें, भारत में तीसरी खुराक को बूस्टर डोज नहीं ‘एहतियाती खुराक’ कहा गया है। एहतियाती खुराक के निर्णय से स्वास्थ्य सेवा और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों का विश्वास मजबूत होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 10 जनवरी, 2022 से डॉक्टरों की सलाह पर सह-रुग्णता वाले 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एहतियाती खुराक लेने का विकल्प उपलब्ध होगा।

देश में कैसी है तैयारी?

जैसे-जैसे वायरस के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं, चुनौती का सामना करने की देश की क्षमता और आत्मविश्वास भी अभिनव भावना के साथ कई गुना बढ़ रहा है। आज देश में 18 लाख आइसोलेशन बेड, 5 लाख ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड, 1 लाख 40 हजार आईसीयू बेड, 90 हजार आईसीयू और नॉन आईसीयू बेड विशेष रूप से बच्चों के लिए, 3 हजार से ज्यादा पीएसए ऑक्सीजन प्लांट, 4 लाख ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। टीकाकरण और जांच तेज करने के लिए राज्यों को सहायता प्रदान की जा रही है।

किन्हें और क्यों दी जा रही बूस्टर डोज ?

’10 जनवरी’ से शुरू हो रही बूस्टर डोज प्रक्रिया में कोरोना वैक्सीन की एहतियाती खुराक अभी केवल फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स को ही लगाई जाएगी। इनकी संख्या करीब 3 करोड़ के आसपास है। इनके अलावा 60 साल से ऊपर के ऐसे बुजुर्ग जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें भी तीसरी डोज दी जाएगी। डॉक्टर से परामर्श लेकर बुजुर्ग तीसरी डोज ले सकते हैं। बता दें, बुजुर्गों को तीसरी डोज दिए जाने की यह क्रम 9 महीने अर्थात 39 सप्ताह का होगा। क्योंकि इन्हें सबसे ज्यादा खतरा है। फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थ केयर वर्कर्स कोरोना से सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे लोगों को वैक्सीन लगे कई महीने हो चुके हैं। क्योंकि देश में जब वैक्सीनेशन शुरू हुई थी तब भी सबसे पहले ही इन्हें ही वैक्सीन लगाई गई थी। समय के साथ इम्युनिटी कम होने लगती है। वहीं, कोरोना से बुजुर्गों को ज्यादा खतरा है। ऐसे बुजुर्ग जो किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनकी जान जाने का खतरा ज्यादा है। इसलिए इन्हें तीसरी डोज लगाई जा रही है।

कितने अंतर से लगेगी वैक्सीन की तीसरी डोज

सरकारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, बूस्टर डोज उन्हें दी जाएगी जिन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज लगे 9 महीने बीत गए हैं। मतलब यह है कि अगर आपने पिछले साल जनवरी से मार्च के बीच दूसरी डोज लगवाई होगी तो आप तीसरी डोज के पात्र होंगे।

कोई बीमारी नहीं, तब भी लगवा सकते हैं तीसरी डोज

अभी केवल उन्हीं बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाई जाएगी जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे बुजुर्ग अपने डॉक्टर की सलाह पर तीसरी डोज ले सकते हैं। इसके लिए ‘कोमोरबिडिटी सर्टिफिकेट’ जरूरी नहीं होगा।

कौन होंगे तीसरी डोज के पात्र

यदि आप तीसरी डोज के दायरे में आते हैं तो आपको सरकार की ओर से एक मैसेज भेजा जाएगा। जी हां, तीसरी डोज का यह मैसेज कोविन प्लेटफॉर्म की ओर से भेजा जाएगा।

कौन सी वैक्सीन दी जाएगी

बूस्टर डोज में वही वैक्सीन दी जाएगी जिसकी पहली दो डोज पात्र को लगी होगी। अगर पात्र ने पहली दो डोज कोवैक्सीन की ली होंगी तो तीसरी डोज भी कोवैक्सीन की ही लगेगी। इसी तरह अगर पहली दो डोज कोविशील्ड की लगवाई होगी तो तीसरी डोज भी कोविशील्ड की ही लगेगी।

कैसे होगा रजिस्ट्रेशन

बूस्टर डोज के लिए अब फिर से रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि कोविन पर आपका अकाउंट बन चुका है। अब बस मैसेज आने के बाद आप कोविन के जरिए बूस्टर डोज के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं।

बूस्टर डोज का सर्टिफिकेट भी मिलेगा

जैसे वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लगने पर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मिला है, ठीक उसी तरह बूस्टर डोज का सर्टिफिकेट भी मिलेगा। वैक्सीन की यह बूस्टर डोज बेहद जरूरी है। इसलिए इससे चूकिए मत। कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट ने इसकी जरूरत को और बढ़ा दिया है। यदि आप इसकी पात्रता के दायरे मे आते हैं तो इस वैक्सीन को जरूर लीजिए।

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अग्नि प्राइम : भारत ने किया सबसे नई पीढ़ी की मिसाइल का तीसरा परीक्षण https://vinayexpress.in/2021/12/18/new-delhi-47/ Sat, 18 Dec 2021 14:10:55 +0000 https://vinayexpress.in/?p=21279 विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। भारत ने शनिवार सुबह अग्नि शृंखला की सबसे नई पीढ़ी की ”अग्नि प्राइम” मिसाइल का तीसरा सफल परीक्षण ओडिशा तट पर किया। अत्याधुनिक अग्नि प्राइम को 4,000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-4 और 5,000 किलोमीटर की अग्नि-5 मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किया गया है। यह अग्नि श्रेणी की मिसाइलों की नई पीढ़ी का उन्नत संस्करण है। कनस्तर वाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच है।

अग्नि प्राइम, एक नई पीढ़ी का उन्नत संस्करण

प्रवक्ता के अनुसार रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आज सुबह 10:55 बजे ओडिशा के बालासोर तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल ”अग्नि प्राइम” का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। पूर्वी तट पर स्थित विभिन्न टेलीमेट्री और रडार स्टेशनों ने मिसाइल पर नजर रखी। मिसाइल ने उच्च स्तर की सटीकता के साथ सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। ”अग्नि प्राइम” अग्नि श्रेणी की मिसाइलों का एक नई पीढ़ी का उन्नत संस्करण है। यह एक कनस्तर वाली मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच है।

अत्याधुनिक तकनीक से विकसित

डीआरडीओ ने पिछले साल सितम्बर और अक्टूबर में छह सप्ताह के भीतर 12 मिसाइलें लॉन्च करके दुनिया को अचंभित कर दिया था। डीआरडीओ ने कोरोना महामारी से पहले पहला परीक्षण 05 मार्च को और दूसरा परीक्षण इसी साल 28 जून को ओडिशा तट के एकीकृत परीक्षण रेंज में किया था। यह मिसाइल तकनीक सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) थी, जो भारत को लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल विकसित करने में मदद करेगी। ”अग्नि प्राइम” को 4000 किलोमीटर की दूरी वाली अग्नि-4 और 5000 किलोमीटर की अग्नि-5 मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किया गया है।

अग्नि प्राइम’ मिसाइल दो चरणों वाली

अग्नि परियोजना से जुड़े एक रक्षा अधिकारी ने कहा कि अग्नि-I सिंगल-स्टेज की मिसाइल है जबकि ”अग्नि प्राइम” मिसाइल दो चरणों वाली है। ठोस ईंधन वाली इस मिसाइल को उन्नत रिंग-लेजर गायरोस्कोप पर आधारित जड़त्वीय नेविगेशन सिस्टम के जरिये निर्देशित किया जाएगा। दोनों चरणों में समग्र रॉकेट मोटर्स और मार्गदर्शन प्रणाली इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्ट्यूएटर्स से लैस हैं। डबल-स्टेज अग्नि प्राइम में एक कनस्तर संस्करण होगा, जिससे इसे सड़क और मोबाइल लॉन्चर दोनों से फायर किया जा सकता है। नई प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के कारण पिछले संस्करण की तुलना में कम वजन वाली यह मिसाइल मारक क्षमता के मामले में अधिक घातक होगी।

भारत के पास फिलहाल सबसे महत्वाकांक्षी अग्नि शृंखला में पांच मिसाइलें

भारत की पहली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में अग्नि- I का पहला परीक्षण मई 1989 में किया गया था। 700 किलोमीटर से 900 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली अग्नि-I को 2004 में सशस्त्र बलों में शामिल किया गया था। सफल प्रायोगिक परीक्षणों के बाद अग्नि प्राइम मिसाइल के सशस्त्र बलों में अग्नि-I मिसाइल की जगह लेने की उम्मीद है। भारत के पास फिलहाल सबसे महत्वाकांक्षी अग्नि शृंखला में पांच मिसाइलें हैं।

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ऊर्जा मंत्री बी डी कल्ला की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात https://vinayexpress.in/2021/09/07/rajasthan-state-news/ Tue, 07 Sep 2021 18:01:10 +0000 https://vinayexpress.in/?p=14128

जल जीवन मिशन के लिए अतिरिक्त फंड और एनआरडीडब्ल्यूपी की बकाया भुगतान देनदारियों को जारी करें केंद्र सरकार – ऊर्जा एवं जलदाय मंत्री श्री बी.डी.कल्ला

विनय एक्सप्रेस समाचार,नई दिल्ली । राजस्थान के ऊर्जा , जलदाय एवं भूजल मंत्री श्री बी डी कल्ला ने नई दिल्ली के श्रम शक्ति भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की।
श्री कल्ला ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान जैसे विस्तृत भू-भाग वाले राज्य में दूरदराज के इलाकों तक पेयजल पहुंचाने के लिए संसाधनों की भारी समस्या आती है, इसलिए केंद्र सरकार को जल जीवन मिशन के अंतर्गत राजस्थान को अतिरिक्त फंड आवंटित करना चाहिए साथ ही उन्होंने जेजेएम के पूर्ववर्ती नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वॉटर प्रोग्राम के तहत केंद्र सरकार के हिस्से के बकाया भुगतान देनदारियों को भी जल्द जारी करने की बात रखी।
उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के पूर्ववर्ती नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वॉटर प्रोग्राम के तहत 1136 .07 करोड़ रुपए बड़ी परियोजनाओं का और 145 .09 करोड़ अन्य परियोजनाओं की बाकी भुगतान देनदारियों को केंद्र सरकार द्वारा जल्द जारी करना चाहिए ताकि वर्तमान में चल रहे जल जीवन मिशन के कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान श्री बी डी कल्ला ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से केंद्रीय मंत्री को राजस्थान में जल जीवन मिशन और इसके पूर्ववर्ती कार्यक्रम नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम के तहत हुए और हो रहे कार्यो की विस्तार से जानकारी दी इस अवसर पर जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधांशु पंत भी मौजूद रहे।
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कोविड-प्रभावित विश्व में योग आशा की किरण बना हुआ है: प्रधानमंत्री मोदी https://vinayexpress.in/2021/06/21/new-delhi/ Mon, 21 Jun 2021 07:49:43 +0000 https://vinayexpress.in/?p=10457 विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर महामारी के दौरान योग की भूमिका के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में योग लोगों के लिए एक शक्ति और आत्मविश्वास का साधन सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान देशों के लिए योग दिवस को भूलना आसान था क्योंकि यह उनकी संस्कृति का आंतरिक अंग नहीं है, परन्तु इसके विपरीत, विश्व स्तर पर योग के प्रति उत्साह में वृद्दि हुई है।

प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में दृढ़ता,योग के प्रमुख घटकों में से एक है। जब महामारी से सामना हुआ तो कोई भी क्षमताओं, संसाधनों या मानसिक रूप से इसके लिए तैयार नहीं था। योग ने लोगों को विश्व भर में महामारी से लड़ने के लिए आत्मविश्वास और क्षमता बढ़ाने में सहायता की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि कि कैसे अंग्रिमपक्ति के कोरोना योद्धाओं ने योग को अपना सुरक्षा कवच बनाते हुए योग के माध्यम से स्वयं को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और नर्सों ने भी वायरस के प्रभावों से निपटने के लिए योग को अपनाया। अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सों द्वारा आयोजित योग सत्रों के उदाहरण हर जगह दिखाई दिए। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि विशेषज्ञ हमारे श्वसन तंत्र को मजबूत करने के लिए प्राणायाम और अनुलोम-विलोम जैसे श्वसन से संबंधित व्यायाम के महत्व पर बल दे रहे हैं।

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होम आइसोलेशन में सर्तकता और भयमुक्त होकर बचाएं कोविड मरीज की जान : डॉ. राजू व्यास https://vinayexpress.in/2021/05/22/helth-article-by-dr-raju-vyas/ Sat, 22 May 2021 16:03:27 +0000 https://vinayexpress.in/?p=8705 विनय एक्सप्रेस स्वास्थ्य आलेख,नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण होने के बाद मरीज के साथ परिजनों में व्याप्त भय सभी के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। मरीजों की संख्या बहुत अधिक होने से अस्पतालों में सभी मरीजों को भर्ती करना संभव नहीं है। इससे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता भी नहीं है।
यह कहना है फोर्टिस कार्डियक साइंसेज के प्रमुख डॉ. राजू व्यास का। डॉ.व्यास के अनुसार अगर मरीज कोविड पॉजटिव है और उसमें संक्रमण के लक्षण नहीं के बराबर है या हल्का बुखार है तो ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के बजाय उनका घर पर इलाज किया जा सकता है।

डॉ. व्यास के अनुसार किन मरीजों का इलाज अस्पताल में होगा और किन मरीजों का घर पर इसके लिए चिकित्सक की सलाह के बाद ही फैसला करें। इसके साथ ही मरीज को क्वारंटीन करने के साथ परिजनों को सेल्फ आइसोलेशन की व्यवस्था घर में होनी चाहिए, क्योंकि परिवार के दूसरे सदस्यों के संक्रमित होने की आशंका रहती है।


चिकित्सक की सलाह के बाद मरीज के आइसोलेशन के लिए के हवादार कमरें उसकी व्यवस्था करें। कुछ जरूरी चीजों जैसे मरीज के शरीर का तापमान, ऑक्सीजन का स्तर, ब्लड प्रेशर आदि की जांच समय समय पर लिया जाना चाहिए।


कुछ सावधानियां
– मरीज से परिवार के अन्य सदस्य उचित दूरी रखें।
– मरीज को तीन लेयर का मास्क लगाएं, उसे हर 8 घंटे बाद बदलें और पहले के मास्क को साफ करें या उसे नष्ट करें।
– मरीज का शौचालय अलग होना चाहिए, अलग नहीं होने की दशा में पहले परिवार के अन्य सदस्य शौचालय जाएं। उसके बाद मरीज।
– मरीज को शौचालय जाने के बाद उसे अच्छी तरह से सुबह-शाम सैनिटाइज करें। उसके बाद शौचालय को बंद कर दें।
– मास्क पहनकर शौचालय जाएं।
– मरीज के जाने के बाद उसे अच्छी तरह से साफ किया जाए।
– होम आइसोलेशन रोगी को परिवार के सदस्यों से नहीं मिलना चाहिए।
– नियमित मास्क के प्रयोग लगाने के साथ मरीजों को दिन में कई बार साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोना चाहिए।
– जिन रोगियों का ऑक्सीजन स्तर 94 से कम होता है तो सामान्य व्यायाम से उसे बढ़ा सकते हैं। 90 तक ऑक्सीजन स्तर होने पर ऐसा कर सकते हैं, अगर इसके बाद ऑक्सीजन का स्तर नहीं बढ़ता है ऑक्सीजन का प्रयोग करें और चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
– जिन्हें लंबे समय से लगातार तेज बुखार हो उन्हें डॉक्टरी सलाह पर ही ऐसी दवाइयों का सेवन करना चाहिए।
– चिकित्सक की सलाह से दवाओं के साथ समय समय पर जांच कराएं ताकि उससे मरीज के हालत और उसके ठीक होने का पता चलता रहेगा।
– मरीज दिन में दो बार गर्म पानी से गरारे करे और भाप ले।

कब अस्पताल ले जाना है जरूरी
– सांस लेने में तकलीफ होने पर
– ऑक्सीजन स्तर में गिरावट होने पर
– छाती में लगातार दबाव बने रहने पर
– शारीरिक रूप से उठने अक्षमता या मानसिक भ्रम की स्थिति होने पर

होम आइसोलेशन कब समाप्त करें

– कोविड लक्षण की शुरूआत के बाद 10 दिन बीत जाने के बाद
– तीन दिन तक लगातार बुखार नहीं आने की स्थिति में
– मरीज की तबीयत ठीक है तो जांच की आवश्यकता नहीं होती है|

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दिल्ली में भूकंप के तेज झटके https://vinayexpress.in/2020/05/29/earthquake/ Fri, 29 May 2020 16:05:06 +0000 https://vinayexpress.in/?p=1305 विनय एक्सप्रेस समाचार नई दिल्ली । अभी कुछ देर पहले दिल्ली एनसीआर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए । नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.6 दर्ज की गई । भूकंप का केंद्र हरियाणा में रोहतक था।

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जनता लड़ रही है कोरोना के खिलाफ जंग: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी https://vinayexpress.in/2020/04/26/national-man-ki-baat/ Sun, 26 Apr 2020 14:38:43 +0000 https://vinayexpress.in/?p=707 विनयएक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ भारत में जारी जंग को पूरी तरह से जनता द्वारा जनता के नेतृत्व में लड़ी जा रही लड़ाई बताया है। लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों को बीमारी की वापसी के प्रति आगाह करते हुए कहा है कि शुरुआती सफलता के बाद अब जरा सी भी लापरवाही बेहद घातक साबित हो सकती है।

pm modi

मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा, ‘‘कोरोना वायरस वैश्विक महामारी से निपटने की जंग ‘जन-प्रेरित’ है और जन-जन इस लड़ाई में सिपाही बनकर इसका नेतृत्व कर रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोग एक दूसरे की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं, और यह लड़ाई हम सब मिलकर देश की जनता के नेतृत्व में लड़ रहे हैं।’’ उन्होंने इस अभियान में कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने में मिली शुरुआती कामयाबी का जिक्र करते हुये देशवासियों को अति आत्मविश्वास में आने से बचने के प्रति आगाह भी किया। उन्होंने पूरी सतर्कता बरतने की जरूरत पर बल देते हुये कहा, ‘‘हमारे यहां कहा भी गया है कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में समाज के सभी वर्गों के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक दूसरे की मदद के लिये हर गली में लोग आगे आ रहे हैं। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान इस संक्रमण के खिलाफ जनभावनाओं को समेकित करने के लिये ताली थाली बजाने और दीया मोमबत्ती जलाने के अभियान को मददगार बताते हुये कहा कि इन गतिविधियों ने जनभावनाओं को जज्बे में तब्दील कर दिया।

prime minister narendra modi

उन्होंने कहा कि हर गांव और शहर में लोगों ने कोरोना के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। मोदी ने कहा, ‘‘महामारी के बीच किसान खेतों में मेहनत कर रहे हैं, शहरों में कोई किराया माफ कर रहा है, कोई अपनी पुरस्कार राशि पीएम केयर फंड में दान कर रहा है, कहीं मजदूर जिस स्कूल में क्वारंटाइन में हैं, उस स्कूल की रंगाई पुताई कर रहे हैं।’’ मोदी ने कहा कि यह सेवाभाव ही कोरोना के खिलाफ भारत को ताकत दे रहा है और इस लड़ाई को जनता के नेतृत्व वाली लड़ाई में तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जन भावनाओं को वह आदरपूर्वक नमन करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई की दुनिया में जब कभी भी चर्चा होगी तब भारत की जंग को जनता के नेतृत्व (पीपुल्स ड्रिविन) वाली लड़ाई के रूप में याद किया जायेगा।’’ इस दौरान मोदी ने इस लड़ाई में कोविड वॉरियर बनने के लिये सरकार द्वारा शुरु किये गए नये प्लेटफार्म का जिक्र करते हुये कहा कि ‘‘कोविड वॉरियर डॉट जीओवी डॉट इन’’ नामक इस पोर्टल पर अब तक लगभग 1.25 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिये डाक्टर, नर्स, राष्ट्रीय केडिट कोर (एनसीसी) राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), आशा कर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता तथा अनगिनत वॉलेंटियर सेवा भाव के साथ आगे आ रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से ‘कोविड वॉरियर’ बनने की अपील करते हुये इस पोर्टल से जुड़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये हाल ही में जारी अध्यादेश को जरूरी कदम बताते हुये कहा, ‘‘स्वास्थ्य सेवाओं को अबाध रूप से सुचारु बनाने के लिये लागू हुये अध्यादेश पर देश ने संतोष व्यक्त किया है।’’ उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश में स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हमलों के विरुद्ध सख्त सजा का प्रावधान है। समय की जरूरत को देखते हुये इसे लागू करना जरूरी था।

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बीमारी ने विभिन्न क्षेत्रों में समाज की सोच को भी बदला है। उन्होंने कहा कि भले ही कारोबार हो, कार्यालय की संस्कृति हो, शिक्षा हो या चिकित्सा क्षेत्र हो, हर कोई कोरोना वायरस महामारी के बाद की दुनिया में बदलावों के अनुरूप खुद को ढाल रहा है।

मोदी ने कहा, ‘‘हर लड़ाई कुछ सबक देती है और नयी मंजिल की दिशा भी प्रदान करती है। इसी का नतीजा है कि भारत नयी संकल्प शक्ति के साथ नये तकनीकी बदलावों की ओर ‘टीम भावना’ से आगे बढ़ रहा है। इसमें हर इनोवेटर कुछ नया बना रहा है।’’ इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ राज्य सरकारों के योगदान की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने इस अभियान में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने केन्द्र, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की सराहना करते हुये कहा कि डाक विभाग से लेकर उड्ययन और रेल मंत्रालय सहित अन्य संबद्ध महकमे राहत एवं चिकित्सा सामग्री को देश के कोने कोने में जरुरतमंद लोगों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने संकट की इस घड़ी में कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने के लिये जरूरतमंद देशों को दवाइयों की आपूर्ति करने के फैसले को मुसीबत में दूसरों का भी साथ देने की भारत की संस्कृति और मूल चरित्र पर आधारित बताया।

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उन्होंने कहा, ‘‘जब विश्व भर के नेता कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच सहायता मुहैया कराने के लिए भारत और उसके लोगों का धन्यवाद देते हुये ‘थेंक्यू इंडिया’ कहते हैं, तो गर्व का भाव बढ़ जाता है।’’

मोदी ने इस संकट के दौरान सभी वर्गों के लोगों द्वारा अपने पर्व घरों में ही मनाने की भी प्रशंसा करते हुये देशवासियों से रमजान के पवित्र माह में दुनिया को इस महामारी से मुक्ति दिलाने की दुआयें करने का आह्वान किया। उन्होंने उम्मीद जतायी कि अगली ‘मन की बात’ जब हम करेंगे तब कोरोना संकट से मुक्ति मिलने की चर्चा हो सकेगी।

गौरतलब है कि देश में कोविड-19 के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर रविवार को 824 हो गई, वहीं संक्रमण के कुल मामले 26,496 हो गए हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अति आत्मविश्वास में आने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘इस महामारी के बीच आपके परिवार के सदस्य के नाते मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूं। हम इस अति आत्मविश्वास में न पड़ जायें कि हमारे घर, गली, मुहल्ले या दफ्तर में कोरोना नहीं पहुंचा है तो आगे भी यह नहीं पहुंचेगा।

उन्होंने आगाह किया कि ‘‘हल्के में लेकर छोड़ दी गयी आग, कर्ज और बीमारी, मौका पाकर खतरनाक हो जाते हैं। इसलिये इनका पूरा इलाज जरूरी है।’’ उन्होंने ‘दो गज दूरी’ बनाये रखने का आह्वान दोहराते हुये कहा, अति उत्साह में कोई लापरवाही न हो । दो गज दूरी, बहुत है जरूरी। ऐसी कोई भूल बिल्कुल न करें, जिससे बीमारी को लौटने का मौका मिले। हमारे यहां कहा भी गया है कि ‘सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी।

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