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विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक में आज 23 वर्षीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। नीरज चोपड़ा ने 87.58 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ ही, वह स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट और अभिनव बिंद्रा के बाद भारत के दूसरे व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बन गए। अभिनव बिंद्रा ने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। इस शानदार प्रदर्शन के साथ, नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में भारत के पदकों की संख्या सात तक पहुंचा दी, जो 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों में जीते अभी तक के सबसे ज्यादा छह पदकों से ज्यादा हैं। राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर और उत्साही देशवासियों ने भारत को गौरवान्वित करने के लिए नीरज चोपड़ा को बधाई दी।

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने नीरज चोपड़ा को बधाई दी और कहा, आपकी असाधारण उपलब्धि युवाओं की प्रेरित करेगी। राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, “नीरज चोपड़ा की असाधारण जीत! भाला फेंक में आपका स्वर्ण कई बाधाओं को तोड़ता है और इतिहास रचता है। अपने पहले ओलंपिक में आप भारत के लिए अभी तक का पहला ट्रैक एंड फील्ड पदक लेकर आए हैं। आपकी असाधारण उपलब्धि युवाओं को प्रेरित करेगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शानदार प्रदर्शन के लिए नीरज को बधाई दी और ट्वीट किया, “टोक्यो में इतिहास रचा गया है! नीरज चोपड़ा ने आज जो उपलब्धि हासिल की है, उसे हमेशा याद रखा जाएगा। युवा नीरज ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। वह असाधारण उत्साह के साथ खेले और बेजोड़ धैर्य का प्रदर्शन किया। स्वर्ण जीतने के लिए उन्हें बधाई।
खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने बधाई संदेश के साथ जीत के पल देखने की अपनी एक क्लिप साझा की। खेल मंत्री ने ट्वीट किया, “नीरज चोपड़ा, भारत के गोल्डन ब्वॉय! आपका शानदार थ्रो एक अरब तारीफों का हकदार है! आपका नाम इतिहास की पुस्तकों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

खेल: पुरुष भाला फेंक
जन्म तिथि: 24 दिसंबर 1997
गृह स्थान: पानीपत, हरियाणा
प्रशिक्षण शिविर: साई एनएसएनआईएस पटियाला
वर्तमान प्रशिक्षण शिविर: उप्साला, स्वीडन
राष्ट्रीय कोच: डॉ. क्लोस बार्टोनिट्ज
नीरज हरियाणा के खंडरा गांव के रहने वाले हैं। वह जब 12 वर्ष के थे, तब उनके शरीर का वजन सामान्य से अधिक था और उनके परिवार के लोग लगातार उनसे खेल की दुनिया में उतरने के लिए कहते रहे। आखिरकार नीरज ने अपने परिवार वालों की बात मानते हुए पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू कर दिया। कुछ सीनियर को स्टेडियम में भाला फेंकते हुए देखने के बाद, नीरज ने भाला फेंक खेल में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। सौभाग्य से नीरज को तंदुरुस्त बनने के लिए कठोर प्रशिक्षण करने के एक माध्यम के तौर पर इस खेल ने आकर्षित किया। इसके बाद वह 2018 राष्ट्रमंडल खेलों और 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले भाला फेंक खिलाड़ी बन गए।
– स्वर्ण पदक, एशियाई खेल 2018
– स्वर्ण पदक, राष्ट्रमंडल खेल 2018
– स्वर्ण पदक, एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2017
– स्वर्ण पदक, विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2016
– स्वर्ण पदक, दक्षिण एशियाई खेल 2016
– रजत पदक, एशियाई जूनियर चैंपियनशिप 2016
– वर्तमान राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक (88.07 मीटर – 2021)
– वर्तमान विश्व जूनियर रिकॉर्ड धारक (86.48 मीटर – 2016)
– यूरोप में प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए वीजा सपोर्ट लेटर
– स्पोर्ट्स गियर और रिकवरी इक्विपमेंट की खरीद के लिए वित्तीय सहायता
– नेशनल प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण के लिए बायो-मैकेनिस्ट विशेषज्ञ सह कोच की भर्ती और विदेशों में खेलने के अवसर
– महासंघ और एनजीओ के साथ इंजरी मैनेजमेंट और रिहैबिलिटेशन
– वर्तमान ओलंपिक चक्र में 26 अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए वित्तीय सहायता
| टाप्स | एसीटीसी | कुल |
| करीब 52,65,388 रुपये | करीब 1,29,26,590 रुपये | करीब 1,81,91,978 रुपये |
ग्रासरूट लेवल: श्री जय चौधरी
डेवलपमेंट लेवल: दिवंगत श्री गैरी कैलवर्ट और श्री यू होन
एलीट लेवल: डॉ. क्लोस बार्टोनिट्ज
]]>रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के रूप में जिलों की पहचान करने के मापदंड के बारे में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 30 अप्रैल, 2020 को जारी किए गए पत्र में विस्तार से बताया गया है। ग्रीन जोन ऐसे जिले होंगे जहां या तो अब तक संक्रमण का कोई भी पुष्ट (कन्फर्म) मामला नहीं आया है अथवा पिछले 21 दिनों में कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। रेड जोन के रूप में जिलों का वर्गीकरण करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, कन्फर्म मामले दोगुनी होने की दर, जिलों से प्राप्त कुल परीक्षण (टेस्टिंग) और निगरानी सुविधा संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा जाएगा। वे जिले, जिन्हें न तो रेड जोन और न ही ग्रीन जोन के रूप में परिभाषित किया गया है, उन्हें ऑरेंज जोन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के रूप में जिलों के वर्गीकरण को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हर सप्ताह या आवश्यकतानुसार पहले साझा किया जाएगा। वैसे तो राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश कुछ और जिलों को रेड व ऑरेंज जोन के रूप में शामिल कर सकते हैं, लेकिन वे किसी ऐसे जिले के वर्गीकरण को घटा नहीं सकते हैं जिसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रेड या ऑरेंज जोन की सूची में शामिल किया गया है।

देश के कई जिलों की सीमाओं में एक या एक से अधिक नगर निगम (एमसी) हैं। यह देखा गया है कि नगर निगमों के भीतर जनसंख्या घनत्व अधिक होने और लोगों का मिलना-जुलना अधिक होने के कारण नगर निगम की सीमा के भीतर कोविड-19 के मामले जिले के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक हैं। अतरू नए दिशा-निर्देशों में यह उल्लेख किया गया है कि ऐसे जिलों को दो जोन में वर्गीकृत किया जाएगा, अर्थात, नगर निगम की सीमा के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के लिए एक जोनय और नगर निगम की सीमा के बाहर आने वाले क्षेत्र के लिए एक अन्य जोन। यदि नगर निगम की सीमा के बाहर आने वाले क्षेत्र में पिछले 21 दिनों से कोई मामला सामने नहीं आया है, तो इसे रेड या ऑरेंज जोन के रूप में जिले के समग्र वर्गीकरण से एक पायदान नीचे के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। अतरू इस क्षेत्र को ऑरेंज के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यदि जिला समग्र रूप से रेड हैय या ग्रीन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यदि जिला समग्र रूप से ऑरेंज है। इस वर्गीकरण से जिले के उस क्षेत्र में और भी अधिक आर्थिक एवं अन्य गतिविधियां या कार्य किए जा सकेंगे, जो कोविड-19 के मामलों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं और इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि निरंतर पूरी सावधानी बरती जाए, ताकि ये क्षेत्र आगे भी कोविड-19 के मामलों से मुक्त रहें। यह व्यवस्था केवल नगर निगम वाले जिलों के संबंध में ही की गई है।
कोविड-19 के फैलाव और रेड एवं ऑरेंज जोन के अंतर्गत आने की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों को नियंत्रण क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) के रूप में निर्दिष्ट किया गया है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां संक्रमण फैलने का व्यापक जोखिम है। कंटेनमेंट जोन को संबंधित जिला प्रशासन द्वारा परिभाषित किया जाएगा और ऐसा करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, उनके भौगोलिक फैलाव और कार्यान्वयन की दृष्टि से सुव्यवस्थित सीमांकन करने की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाएगा। स्थानीय प्राधिकारी कंटेनमेंट जोन के निवासियों के बीच आरोग्य सेतु एप की 100ः कवरेज सुनिश्चित करेगा। कंटेनमेंट जोन के लिए गहन निगरानी प्रोटोकॉल होंगे जिनमें मरीज के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना, घर-घर की निगरानी, किसी व्यक्ति से जुड़े जोखिम के आकलन के आधार पर उसका होमध्संस्थागत क्वारंटाइन और नैदानिक प्रबंधन भी शामिल हैं। सख्त दायरा नियंत्रण को सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी, ताकि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति और आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति बनाए रखने को छोड़कर इस जोन के भीतर और बाहर लोगों की आवाजाही न हो सके। कंटेनमेंट जोन के भीतर किसी भी अन्य गतिविधि या कार्य की अनुमति नहीं है।

नए दिशानिर्देशों के अंतर्गत, जोन के आधार पर देश भर में सीमित संख्या में गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। इनमें हवाई, रेल, मेट्रो और सड़क द्वारा अंतर-राज्यीय आवाजाही के द्वारा यात्राय विद्यालय, महाविद्यालय और अन्य शैक्षणिक तथा प्रशिक्षणध् कोचिंग संस्थानों के लिए जानाय होटल और रेस्टोरेंट सहित आतिथ्य सेवाएंय सिनेमाघरों, मॉल, जिम, खेल परिसरों आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों का इकट्ठा होनाय सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और अन्य प्रकार की सभाएंय और धार्मिक स्थलों पर लोगों के लिए पूजा का आयोजन शामिल है। हालांकि, चुनिंदा उद्देश्यों और एमएचए द्वारा स्वीकृत उद्देश्यों के लिए हवा, रेल और सड़क द्वारा लोगों की आवाजाही को स्वीकृति दे दी गई है।
नए दिशानिर्देशों में लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए कुछ उपाय भी सुझाए गए हैं। इस प्रकार सभी गैर आवश्यक गतिविधियों के लिए लोगों की आवाजाही पर शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक सख्ती से प्रतिबंध जारी रहेगा। स्थानीय अधिकारियों को इस उद्देश्य और सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 के अंतर्गत निषेध आदेश (कर्फ्यू) जैसे कानून के उचित प्रावधानों के अंतर्गत आदेश जारी करने होंगे। सभी जोन में 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के व्यक्तियों, बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आवश्यक जरूरतों और स्वास्थ्य उद्देश्यों को छोड़कर घर पर ही रहना होगा। रेड, ऑरेंज, ग्रीन जोन में बाह्य रोगी विभागों (ओपीडी) और मेडिकल क्लीनिकों को सामाजिक दूरी के नियमों के पालन और अन्य सुरक्षा सावधानियों के साथ परिचालन की अनुमति होगी, हालांकि रोकथाम (कंटेनमेंट) वाले जोन में इसकी अनुमति नहीं होगी।
कंटेनमेंट जोन से इतर रेड जोन में देश भर में प्रतिबंधित गतिविधियों के अलावा चुनिंदा गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। ये इस प्रकार हैं रू साइकिल रिक्शा और ऑटो रिक्शा चलानाय टैक्सी और कैब एग्रीगेटर्स का परिचालनय बसों का जिलों के भीतर और अंतर जिला परिचालनय और नाई की दुकानें, स्पा और सैलून।
रेड जोन में आने वाले क्षेत्रों में कुछ बंदिशों के साथ कुछ अन्य गतिविधियों को स्वीकृति दे दी गई है। स्वीकृत गतिविधियों के लिए लोगों को वाहनों की आवाजाही को अनुमति दे दी गई है, जिसमें चार पहिया वाहनों में अधिकतम 2 लोगों (चालक के अलावा) का होना और दोपहिया वाहन पर पीछे की सीट पर कोई सवारी नहीं बिठाने की शर्त शामिल है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड), निर्यात केन्द्रित इकाइयों (ईओयू), औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक नगरों जैसे शहरी क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सीमित पहुंच के साथ स्वीकृति दे दी गई है। अन्य स्वीकृत औद्योगिक गतिविधियों में दवाओं, फार्मास्युटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, उनसे जुड़े कच्चे माल और मध्यवर्ती सामानों सहित आवश्यक वस्तुओं की विनिर्माण इकाइयांय निरंतर चलने वाली उत्पादन इकाइयां और उनकी आपर्ति श्रृंखलाय आईटी हार्डवेयर का विनिर्माणय कई पालियों और सामाजिक दूरी के साथ जूट उद्योगय और पैकेजिंग सामग्री की विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को इन-सीटू निर्माण (जहां मजदूर निर्माण स्थल पर रहकर काम करते हैं और किसी भी मजदूर को बाहर नहीं जाना पड़ता है) और नवीनीकृत ऊर्जा परियोजनाओं तक सीमित रखा गया है। शहरी क्षेत्रों में मॉल, बाजारों और व्यावसायिक परिसरों में गैर जरूरी सामानों की दुकानों को अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में आने वाली सभी एकल दुकानों, पड़ोस (कॉलोनी) की दुकानों और आवासीय परिसरों में स्थित दुकानों को आवश्यक और गैर आवश्यक के अंतर के बिना खोलने की अनुमति दे दी गई है। रेड जोन में सिर्फ आवश्यक वस्तुओं के मामले में ई-कॉमर्स गतिविधियों को अनुमति दे दी गई है। निजी कार्यालय आवश्यकता के आधार पर 33 प्रतिशत क्षमता के साथ परिचालन कर सकेंगे और बाकी घर से काम कर सकते हैं। सभी सरकारी कार्यालय उप सचिव और उससे ऊपर के स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे। शेष 33 प्रतिशत तक कर्मचारी जरूरत के आधार पर काम करेंगे। हालांकि, रक्षा एवं सुरक्षा सेवाएं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पुलिस, पेंशन, होम गार्ड, नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन और आपात सेवाएं, आपात प्रबंधन और संबंधित सेवाएं, राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (एनआईसी), सीमा शुल्क, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), राष्ट्रीय कैडेट कॉर्प (एनसीसी), नेहरू युवा केन्द्र (एनवाईके) और नगर निकाय सेवाएं बिना किसी बंदिशों के काम करते रहेंगेय सार्वजनिक सेवाओं की डिलिवरी सुनिश्चित करनी होगी और इन उद्देश्यों के लिए आवश्यक संख्या में कर्मचारी लगाए जाएंगे।

रेड जोन में बड़ी संख्या में अन्य गतिविधियों की अनुमति दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा कार्यों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और ईंट-भट्टों सहित सभी औद्योगिक और निर्माण गतिविधियों की अनुमति दी गई हैय इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं की प्रकृति के भेद के बिना, शॉपिंग मॉल को छोड़कर सभी दुकानों की अनुमति दी गई है। कृषि आपूर्ति श्रृंखला में सभी कृषि गतिविधियों, जैसे, बुवाई, कटाई, खरीद और विपणन परिचालन की अनुमति दी गई है। अंतर्देशीय (इनलैंड) और समुद्री मत्स्य पालन सहित पशुपालन गतिविधियों को पूरी तरह से अनुमति दी गई है। सभी प्रकार की बागान गतिविधियों को उनके प्रसंस्करण और विपणन सहित अनुमति दी गई है। समस्त स्वास्थ्य सेवाएं (आयुष सहित) चिकित्सा कर्मियों और मरीजों को एयर एंबुलेंस के माध्यम से ट्रांसपोर्ट करने सहित चालू रहेंगी। वित्तीय क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा खुला रहेगा, जिसमें बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), बीमा और पूंजी बाजार की गतिविधियां और ऋण सहकारी समितियां शामिल हैं। बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, निराश्रितों, महिलाओं और विधवाओं आदि के लिए गृहों के संचालन और आंगनवाड़ियों के कामकाज की भी अनुमति दी गई है। सार्वजनिक उपयोगिताओं जैसे, बिजली, पानी, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, दूरसंचार और इंटरनेट खुले रहेंगे तथा कूरियर और डाक सेवाओं को परिचालन की अनुमति दी जाएगी।
रेड जोन में अधिकांश व्यावसायिक और निजी प्रतिष्ठानों को अनुमति दी गई है। इनमें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, आईटी और आईटी सक्षम सेवाएं, डेटा और कॉल सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग सेवाएं, निजी सुरक्षा और सुविधा प्रबंधन सेवाएं और नाई आदि को छोड़कर जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है,स्व-नियोजित व्यक्तियों द्वारा प्रदान की गई सेवाएं शामिल हैं। दवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरणों, उनके कच्चे माल और मध्यवर्ती सहित आवश्यक वस्तुओं की विनिर्माण इकाइयोंय निरंतर प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता वाली उत्पादन इकाइयोंय अलग-अलग पारियों में और सामाजिक दूरी के साथ जूट उद्योगय और आईटी हार्डवेयर के विनिर्माण और पैकेजिंग सामग्री की विनिर्माण इकाइयों को अनुमति दिया जाना जारी रहेगा।
ऑरेंज जोन में, रेड जोन में स्वीकृत की गई गतिविधियों के अलावा, टैक्सी और कैब एग्रीगेटर्स को केवल 1 ड्राइवर और 2 यात्रियों के साथ अनुमति दी जाएगी। एक जिले से दूसरे जिले में आने वाले लोगों और वाहनों को केवल स्वीकृत गतिविधियों के लिए अनुमति दी जाएगी। फोर व्हीलर वाहनों में ड्राइवर के अलावा अधिकतम दो यात्री होंगे, इसके अलावा दोपहिया वाहनों पर दूसरी सवारी की अनुमति होगी।
ग्रीन जोन में, उन गतिविधियों के अलावा जिनको समूचे देश में जोन की परवाह किए बगैर प्रतिबंधित किया गया है, को छोड़कर अन्य सभी गतिविधियों की अनुमति दी गई है, हालांकि बसों का परिचालन 50ः तक बैठने की क्षमता के साथ किया जा सकता है और बस डिपो अपनी 50ः क्षमता तक की बसों का परिचालन कर सकते हैं।
सभी वस्तुओं की ढुलाई की अनुमति होगी। कोई भी राज्य ध् संघशासित प्रदेश, पड़ोसी देशों के साथ संधियों के तहत सीमा पार व्यापार के लिए माल की आवाजाही को नहीं रोकेगा। ऐसी किसी भी ढुलाई के लिए अलग से किसी भी प्रकार के पास की आवश्यकता नहीं है, जो लॉकडाउन की अवधि के दौरान देश भर में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
अन्य सभी गतिविधियां स्वीकृत गतिविधियां होंगी, जिन्हें विशेष रूप से निषिद्ध नहीं किया गया है या जिन्हें इन दिशानिर्देशों के तहत विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिबंधों के साथ अनुमति दी गई है। हालांकि राज्योंध्संघ शासित प्रदेशों को स्थिति के आकलन के आधार पर और कोविड-19 को फैलने से रोकने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ, आवश्यक समझे जाने पर स्वीकृत गतिविधियों में से केवल चुनिंदा गतिविधियों को प्रतिबंधों के साथ अनुमति दे सकते हैं।
3 मई, 2020 तक के लॉकडाउन उपायों से संबंधित दिशा-निर्देशों के तहत जिन गतिविधियों की अनुमति दी गई थी, उन गतिविधियों के लिए अधिकारियों से अलग सेध्नई अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। भारत में विदेशी नागरिक (नागरिकों) के लिए पारगमन व्यवस्थाय क्वारंटीन व्यक्तियों को मुक्त करनेय राज्योंध्संघशासित प्रदेशों के भीतर फंसे श्रमिकों की आवाजाहीय भारतीय नाविकों के साइन-ऑन और साइन-ऑफ, फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य व्यक्तियों की सड़क और रेल द्वारा आवाजाही जैसी व्यवस्थाओं के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी मानक परिचालन प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी रहेंगे।
राज्य संघ शासित प्रदेशों की सरकारें लॉकडाउन दिशा निर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए अधिदेशित हैं और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत जारी इन दिशानिर्देशों को वे किसी भी तरीके से कमजोर नहीं करेंगे।