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इससे पूर्व जनप्रतिनिधियों से पहले ही उनके क्षेत्र के लिए जरूरी और जल्द एक्जीक्यूट हो सकने वाली घोषणाओं का खाका पहले ही मांग लिया गया था और उन पर खासा होमवर्क किया गया है. जिलों और विधानसभा क्षेत्रों की घोषणाओं के अलावा राज्य स्तर की बड़ी घोषणाओं का मसौदा तैयार किया जा चुका है. बजट में इन घोषणाओं की संभावना मानी जा सकती है.

– महिला सुरक्षा थाने व चौकी खोलना.
– इंदिरा प्रियदर्शिनी योजना में हजार करोड़ का फंड है जो आगे बढ़ेगा. जनप्रतिनिधियों की इसे लेकर मांग होगी.
– तहसील व उप तहसील खोलने को लेकर खाका बजट में सामने आ सकता है या घोषणाएं हो सकती हैं. इसे लेकर भी जनप्रतिनिधियों की ओर से डिमांड मिली है.
– ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में शाहपुरा ने बाजी मारी है जिसे अन्य जगहों पर भी लागू किया जा सकता है.
– बजट में जिलेवार पॉपुलर डिमांड्स शामिल होने की ज्यादा संभावना है. इनमें विधायकों और खास तौर पर सरकार को समर्थन देनेवाले निर्दलीय विधायकों का ख्याल रखा जा सकता है.
– प्रशासन शहरों के संग व गांव के संग अभियान शुरू होने की पूरी संभावना है.
– स्थानीय निकायों को वित्तीय सहायता देने और उन्हें उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए फंड में राज्य सरकार पैसे दे सकती है. इस बार के बजट में इसकी संभावना मानी जा रही है.
– नई आवासीय योजनाओं के बारे में बजट में प्रावधान संभव है.
– जनसूचना पोर्टल के जरिये सभी विभागों से जुड़ी अहम सूचनाएं,सर्कुलर, आदेश आम लोगों को एक ही वेबसाइट पर क्लिक करने पर मिल सकेंगी. इसकी घोषणा बजट में संभावित है.
– विभागों को सेवाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दिया जाएगा. इसके तहत विभागों को बजट आवंटित किया जा सकता है.
– आरटीआई में आवेदन की प्रक्रिया पेपरलैस हो गई है और अब आवेदन पर एक्शन क्या हुआ या उसका जवाब ऑनलाइन देने को लेकर बजट में घोषणा की जा सकती है.
– समानीकरण के नाम पर बंद स्कूल्स को वापस खोलने को लेकर बजट में प्रावधान संभव है.
– ऐसी घोषणाएं ज्यादा होने की संभावना है जिसमें सरकार को ज्यादा वित्तीय प्रावधान नहीं करना पड़े. इसके तहत नए सरकारी कॉलेज खोलने, सरकारी स्कूल्स में नए संकाय या विषय खोलने की घोषणाएं संभावित है. साथ ही जनप्रतिनिधियों की डिमांड अनुसार स्कूल-कॉलेज क्रमोन्नत किए जा सकेंगे.
– इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए सरकार की ओर से बजट में प्रावधान करने की उम्मीद है. खास तौर पर परिवहन क्षेत्र में राशि दी जा सकती है. ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण परिवहन सेवाओं पर जोर दिया जा सकता है.
– मेट्रो के दूसरे चरण की डीपीआर के लिए राशि का प्रावधान बजट में संभव है.
– कोरोना से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एमएलए फंड अनिवार्य किया गया है जिसे बजट में और व्यवस्थित रूप दिया जा सकता है.
– चिकित्सा का बजट 20 से 30 प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है.
– इसमें भी मोहल्ला क्लिनिक और ज्यादा शुरू करने की घोषणा हो सकती है। इसमें भी ज्यादा बजट का प्रावधान संभव है.
– जनप्रतिनिधियों की मांग अनुसार नए पीएचसी और सीएचसी खोलने की घोषणा होने की पूरी उम्मीद है.
महिला-बाल विकास विभाग:
– आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार की ओर से दिए आश्वासन अनुसार उनका मानदेय बढ़ाने की घोषणा बजट में संभावित है.
– फसली ऋण का आकार बढ़ सकता है. साथ ही जिन डिफॉल्टर किसानों को कर्ज नहीं मिल रहा उन्हें एक सीमा तक कर्ज देने को लेकर छूट दी जा सकती है.
– सोलर पैनल, स्प्रिंकलर जैसी सुविधाओं में कृषि अनुदान बढ़ सकता है जिसे इन्हें प्रोत्साहित किया जा सके.
– ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण पर बजट में ध्यान दिया जा सकता है.
– केन्द्र के कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विरोध के बीच राज्य के बजट में मंडी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है. मंडियों की ओर जानेवाली सड़कों के विकास में भी सरकार बजट में गौर कर सकती है.
– नए आरयूबी और आरओबी के लिए बजट में प्रावधान किया जा सकता है.
– 31 जिलों में जनता जल योजना के तहत पंचायतों को राशि देने की मांग है जिसे सरकार बजट में पूरा कर सकती है. जनप्रतिनिधियों का भी इस पर जोर रहा है.

– करीब 20 हजार भर्ती की घोषणा हो सकती है जिसमें कांस्टेबल के 8000 पदों और पटवारियों के खाली पदों पर भर्ती प्रमुख हैं.
– वैसे नया कर नहीं लगाने पर जोर रह सकता है लेकिन विलासिता कर में इजाफा किया जा सकता है.
– रजिस्ट्री की दर बढ़ाई जा सकती है. रियल एस्टेट को बढ़ावा देने के लिए डीएलसी की दर कम की जा सकती है.
– पिछली बार गहलोत सरकार ने 2 लाख 8 हजार 108 करोड का अनुमानित बजट पेश किया था जिसमें दिसंबर 2020 तक का आंकड़ा 1 लाख 28 हजार 641 करोड का है.
– सरकार का वर्ष 2020-21 में कुल खर्चा 2 लाख 7 हजार 368 करोड है जबकि ऋण और अग्रिम राशि 739.78 करोड है.
– सरकार का 2020-21 के लिए राजस्व घाटा 12345 करोड है जबकि दिसंबर 2020 तक ही यह आंकड़ा अनुमानित से ज्यादा 32023 करोड तक पहुंच गया है.
– सरकार का 2020-21 के लिए राजकोषीय घाटा 33922 करोड है और इसमें दिसंबर 2020 तक की ही यह आंकड़ा अनुमानित से ज्यादा यानि 40190 करोड पहुंच गया है.
कोरोना की अर्थव्यवस्था पर मार,राजस्व घाटे के हालात और सरकारी खजाने की स्थिति को देखते हुए बजट में ऐसी ही घोषणाओं की उम्मीद है जिसमें राशि का प्रावधान नहीं किया गया हो. इसमें विभागों के योजनावार सफलता प्रदर्शन भी देखा जाएगा.
