js_composer domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home2/vokunju1/public_html/vinayexpress.in/wp-includes/functions.php on line 6170संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया की हम लोग पिछले 9-10 वर्षों से राजस्थान सरकार द्वारा चलायी जा रही जन लोक कल्याणकारी व विश्व प्रसिद्व मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं जांच योजना के सफल क्रियान्वयन में सम्पूर्ण राजस्थान प्रदेश के सीएमएचओध्पीएमओ कार्यालयों के अधीन संचालित चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत हैए हमारी कुल संख्या 4750 है, कोरोना महामारी के दौर मे भी हम सभी ने अपनी सेवाओं का विशेष योगदान रहा है और भविष्य में भी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि ये ऑपरेटर्स स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम जनता के लिए चलाई जा रही महत्वकांक्षी योजना मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं जांच योजना के E-aushodhi सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड संधारण के साथ-साथ अपने कार्यस्थल पर CHC/PHC/CITY DISP./PMO कार्यालयों में इस योजना के साथ राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य ऑनलाइन सॉफ्टवेयर जैसे-PCTS, Asha Soft, ECTS, OJAS, FP-LMIS, E-Upkaran, Pehachan, Covid-19 Vaccination Verifier सॉफ्टवेयर के साथ कार्यालय में कम्प्यूटर संबंधित अन्य समस्त प्रकार के कार्य वर्ष 2012 से करते आ रहे हैं।

1. नियमितीकरण- वर्तमान कांग्रेस सरकार के विधानसभा चुनाव 2018 जन घोषणा पत्र में संविदा कर्मियों को नियमित करने के किये गये वादे के अनुसार इस योजना में कार्यरत (संविदा मशीन विद मैन) को नियमित पद क्लीनिकल अभिलेख सहायक : ( Clinical Record Assistant ) CRA पद पर समायोजित कर नियमित किया जावे। निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, राजस्थान के आदेश क्रमांकःई-18/एम/(सीधी भर्ती)/2013/1311, दिनांक 10.07.2013 के तहत यह भर्ती पूर्व में भी होनी थी लेकिन अटक गई थी, इस भर्ती के CRA पद विलोपित कर दिये गये है, अतः उपरोक्त पद को पुर्नजीवित कर नये सिरे से भर्ती सम्पन्न करवाई जाये।
2. नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं जांच योजना में कार्यरत संविदा मशीन विद मैन (कम्प्यूटर ऑपरेटर MNDY/MNJY) का कैडर बनाकर वेतन 18000/-प्रति माह किया जावें तथा नियमानुसार प्रतिवर्ष वेतन में वृद्धि की जाये।
मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं जांच योजना में कार्यरत संविदा मशीन विद् मैन कम्प्यूटर ऑपरेटर्स द्वारा उपरोक्त मांगों को पूरी करने की अपील राजस्थान सरकार से की गयी है।
]]>संडे को होने वाले कर्फ्यू में इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद रहेगा। पेट्रोल पंप खुले रहेंगे। इसके अलावा छूट वाली कैटेगरी को छोड़कर सभी बाजार, दुकानें, शॉपिंग मॉल, जिम, क्लब बंद रहेंगे। कोरोना की तीसरी लहर में पहली बार वीकेंड कर्फ्यू लगा है। संडे कर्फ्यू में आम जरूरत की चीजों की दुकानें खुली रहेंगी। दूध की दुकानें, डेयरी बूथ, फल-सब्जी दुकानें, किराना की दुकानें खुली रहेंगी। आम जरूरत की दुकानें रात 8 बजे तक ही खुली रहेंगी।
सेंचुरी और टाइगर रिजर्व भी रहेंगे बंद
वीकेंड कर्फ्यू के दिन प्रदेश भर के सेंचुरी और टाइगर रिजर्व और सफारी भी बंद रहेंगे। वन विभाग ने इसके आदेश जारी किए हैं। जयपुर में लेपर्ड सफारी और नाहरगढ बायोलॉजिकल पार्क बंद रहेंगे। इसके अलावा संडे कर्फ्यू में छूट की कैटेगरी बनाई है। इनमें दूध की दुकान, डेयरी बूथ, फल-सब्जी मंडी की दुकानें, किराना की दुकानें, लगातार प्रोडक्शन वाली फैक्ट्रियां, नाइट शिफ्ट वाली फैक्ट्रियां, आईटी, टेलीकॉम सेवाएं, मेडिकल दुकान, शादी समारोह, इमरजेंसी सेवाओं वाले ऑफिस, माल लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों के साथ रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को छूट रहेगी। वैक्सीनेशन के लिए आने-जाने वालों को छूट रहेगी। मेडिकल सेवाओं से जुड़े ऑफिस कर्फ्यू के दायरे से बाहर रहेंगे। स्ट्रीट वेंडर्स, थड़ी-ठेले वालों को छूट नहीं दी गई है। संडे कर्फ्यू में स्ट्रीट वेंडर्स सामान नहीं बेच सकेंगे।
घर पर रहने की हिदायत
वीकेंड कर्फ्यू में इमरजेंसी को छोड़ घर पर रहने की ही हिदायत दी गई है। बेवजह बाहर घूमने वालों के खिलाफ पुलिस महामारी एक्ट में कार्रवाई करेगी। गाइडलाइन में इसका प्रावधान है। पुलिस और प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर लोगों से घरों में रहकर सहयोग करने की अपील की है। एक्सपर्टस का सुझाव है कि कोरोना की चैन तोड़ने के लिए मिनी लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध कारगर हो सकते हैं।


इस दौरान राजस्थान ग्रामीण ओलंपिक खेलों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) अरुण प्रकाश शर्मा ने कहा कि इन खेलों की सभी 6 स्पर्धाओं में अधिक से अधिक खिलाड़ी भागीदारी निभाएं, इसके मद्देनजर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदानों का चिन्हीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने में यह प्रतियोगिताएं महत्ती भूमिका निभाएगी।

अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) बलदेव राम धोजक ने कहा कि खेलों के सफल आयोजन के लिए ग्राम पंचायत तथा ब्लॉक स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, शीघ्र ही इनकी बैठकें आयोजित कर कार्यक्रमों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाए तथा अधिक से अधिक खिलाड़ियों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए।

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमप्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की पालना में आयोजित होने वाले इन खेलों में कबड्डी,शूटिंग वॉलीबॉल (बालक वर्ग) टेनिस बॉल क्रिकेट, खो-खो (बालिका वर्ग) वॉलीबॉल, हॉकी की स्पर्धाएं होंगी।



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इस नीति में कनिष्ठ तकनीकी सहायकों के चयन के लिए सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री अथवा डिप्लोमाधारी तथा कृषि इंजीनियरिंग में बीई या बी टेक अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करते हुए शैक्षणिक योग्यता के 70 प्रतिशत अंक तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में कार्य का अनुभव रखने वाले संविदा कार्मिकों को नियोजन में प्राथमिकता देने के उददेश्य से 20 अंक एवं गृह जिले के निवासी को जिले में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उददेश्य से 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।

लेखा सहायक के चयन की योग्यता में बी.ए./बी.कॉम /बी.एस.सी. के साथ कम्प्यूटर डिग्री अथवा डिप्लोमाधारी आवेदकों को अवसर प्रदान करते हुए शैक्षणिक योग्यता के 70 प्रतिशत अंक तथा राज्य सरकार के किसी भी सरकारी कार्यालय में लेखा कार्य के अनुभव के अधिकतम 20 अंक तथा गृह जिले के निवासी के लिए 10 अंक रखे गए हैं।
मुख्यमंत्री की इस स्वीकृति से प्रत्येक 6 ग्राम पंचायतों पर एक कनिष्ठ तकनीकी सहायक तथा 10 ग्राम पंचायतों पर एक लेखा सहायक उपलब्ध हो सकेंगे। जिससे मनरेगा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सुगमता होगी।
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मांग संख्या 1: राजस्थान स्टेट पैरीटी के आधार पर कनिष्ठ सहायक की ग्रेड पे 3600 लेवल-10 करने की मांग।
मांग संख्या 2: राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी संघर्ष समिति एवं राज्य सरकार की ओर से गोविन्द शर्मा तात्कालीन प्रमुख शासन सचिव वित्त के मध्य हुए शासन से समझौते के निर्णय दिनांक 16.08.2013 के अनुरूप मंत्रालयिक संवर्ग के अराजपत्रित एवं राजपत्रित पदों का नवीन सृजन करने की मांग।
मांग संख्या 3: शासन सचिवालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत मंत्रालयिक संवर्ग के अराजपत्रित एवं राजपत्रित पदों में व्याप्त असमानता को दूर करते हुए पद, पदौन्नति प्रावधान एवं वेतन में समानता की करने एवं नियमों मे संशोधन करने की मांग।
मांग संख्या 4: पुनरीक्षित वेतनमान के लाभ की वसूली एवं नियमों में संशोधन के कारण कार्मिकों में रोष को देखते हुए वूसली की अधिसूचना तत्काल प्रभाव से प्रतिहारित करने की मांग।

मांग संख्या 5: शिक्षा विभाग के निदेशालय सहित समस्त राज्य स्तरीय, संभाग, जिला एवं ब्लाॅक स्तरीय कार्यालयों से शैक्षिक संवर्ग के स्टाफ यथा अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता (स्कूल शिक्षा) एवं समकक्ष पदों को समाप्त करके इन पदों पर कार्यरत शैक्षिक स्टाफ को अन्यत्र पद सहित स्थानान्तरित करने की मांग एवं कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शैक्षिक स्टाफ की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हे शालाओं में भेजने की मांग, कार्य महत्ता को देखते हुए पी.ई.ओ. सहित समस्त कार्यालयों में मंत्रालयिक संवर्ग के पदों का सृजन कर पदस्थापन कराने की मांग।

इस दौरान कर्मचारी संघ के प्रदेश संरक्षक राजेश व्यास, प्रदेशाध्यक्ष गिरजाशंकर आचार्य, पंकज भटनागर प्रदेश महामंत्री, कमल नारायण आचार्य संभाग अध्यक्ष अविकान्त पुरोहित जिलाध्यक्ष बीकानेर सहित अन्य सदस्य विष्णु पुरोहित प्रवीण गहलोत राजेंद्र मौजूद रहे।


डॉ. अग्रवाल ने बताया कि ओएनजीसी इस क्षेत्र में क्रूड ऑयल एवं प्राकृतिक गैस की खोज पर फेज मेनर में करीब 74 करोड़ रु. का निवेश करेगी और 150 से 200 लोगों को प्रत्यक्ष व 500 से 700 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही उत्पादन आरंभ होने पर क्रूड ऑयल के उत्पादन पर 12.5 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस के उत्पादन पर 10 प्रतिशत की दर से प्रदेश को राजस्व प्राप्ति होगी। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी द्वारा जैसलमेर बेसिन में पहले से ही खोज व खनन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ओएनजीसी द्वारा को जैसलमेर में आरजे-ओएनएचपी-2019/1 ब्लॉक का आवंटन किया गया है। इस क्षेत्र में ओएनजीसी द्वारा खनिज क्रूड ऑयल व प्राकृतिक गैस की खोज व उत्पादन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वेदांता द्वारा इस क्षेत्र में 3 कुओं की खुदाई खोज व उत्पादन कार्य के लिए की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक कुएं की एक हजार मीटर गहराई तक खुदाई की जा सकेगी। जियो फिजिकल 2 डी व 3 डी सर्वे में 2 डायमेंशन में 100 लाइन किलोमीटर व 3 डायमेंशन में 300 लाइन किलोमीटर में सर्वे किया जा सकेगा।
डॉ. अग्रवाल गुरुवार को सचिवालय में ओएनजीसी के अधिकारियों के साथ प्रगति समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने ओएनजीसी के जैसलमेर क्षेत्र के कुओं में उत्पादन कार्य पुनः शुरु करने के निर्देश दिए।
ओएनजीसी के गु्रप महाप्रबंधक रजत बसु ने बताया कि ओएनजीसी राजस्थान में विगत 65 वर्षों से खोज कार्य में लगी हुई है। ओएनजीसी 5 माइनिंग लीज पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी ने जैसलमेर क्षेत्र में 87 कुओं की खुदाई की है जिसमें से 32 कुओं में गैस है। वर्तमान में तकनीकी कारणों से उत्पादन कार्य बाधित है और करीब 45 किलोमीटर का गैस पाइपलाईन और गैस शुद्धीकरण संयत्र का कार्य चल रहा है जिसे 2021 में पूरा कर लिया जाएगा।
रजत बसु, महा प्रबंधक (उत्पादन) श्री शकील व अधीक्षण भू-वैज्ञानिक रामदेव बड़ियासर ने बताया कि पुरानी फील्ड में गैस का पुनः उत्पादन और नए क्षेत्रों में गैस का उत्पादन 2022 तक शुरु हो जाएगा।
बैठक में निदेशक पेट्रोलियम व जेएस माइंस ओम प्रकाश कसेरा, उपसचिव नीतू बारुपाल, अतिरिक्त निदेशक पेट्रोलियम बीएस राठौड़ सहित ओएनजीएसी व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

विनयएक्सप्रेस समाचार,जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ’कोई भूखा ना सोए’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए 20 अगस्त से प्रदेश केे नगरीय क्षेत्रों में इंदिरा रसोई योजना की शुरूआत करने के निर्देश दिए हैं। गहलोत ने कहा कि देश की महान नेता स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी का पूरा जीवन गरीब कल्याण को समर्पित रहा। राज्य सरकार ऎसे महान व्यक्तित्व के नाम पर मानव सेवा की ऎसी योजना शुरू करने जा रही है जिसमें गरीबों एवं जरूरतमंद लोगों को मात्र 8 रूपए में शुद्ध पौष्टिक भोजन मिलेगा।
गहलोत रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर बैठक में इस योजना की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योजना को जनसेवा की भावना, पारदर्शिता एवं जनभागीदारी के साथ लागू किया जाए ताकि यह पूरे देश में निर्धन वर्ग को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक मिसाल बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस योजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रूपए खर्च करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के संचालन में सेवाभावी संस्थाओं एवं स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला कलक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द ऎसी संस्थाओं का चयन करें। साथ ही, रसोई के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन भी करें। ऎसी संस्थाओं तथा स्वयंसेवी संगठनों को प्रोत्साहित किया जाए जो निस्वार्थ भाव से मानव सेवा के क्षेत्र में काम कर रही हों। मुख्यमंत्री ने भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने केे लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कमेटी गठित करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि देश के अन्य राज्य जहां इस प्रकार की योजना चल रही है वहां के अध्ययन एवं अनुभवों को शामिल करते हुए इंदिरा रसोई योजना की शुरूआत की जा रही है। इसमें दोनों समय का भोजन रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार प्रति थाली 12 रूपए अनुदान देगी। प्रदेश के सभी 213 नगरीय निकायों में 358 रसोइयों का संचालन किया जाएगा, जहां जरूरतमंद लोगों को सम्मान के साथ बैठाकर भोजन खिलाया जाएगा।
योजना का प्रस्तुतीकरण देते हुए स्वायत्तशासन विभाग के शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने बताया कि प्रतिवर्ष 4 करोड़ 87 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। आवश्यकता के अनुरूप इसे और बढ़ाया जा सकता है। रेल्वे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल, चौखटी आदि ऎसे स्थानों पर रसोइयां खोली जाएंगी जहां लोगों की अधिक उपस्थिति रहती है। भोजन में प्रति थाली 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम चपाती एवं अचार का मेन्यू निर्धारित किया गया है। स्थानीय आवश्यता के अनुरूप मैन्यू व भोजन के चयन की स्वतंत्रता रहेगी। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए रसोइयों में आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे। योजना की आईटी आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी। लाभार्थी को कूपन लेते ही मोबाइल पर एसएमएस से सूचना मिल जाएगी। मोबाइल एप एवं सीसीटीवी से रसोईयों की निगरानी की जाएगी।
बैठक में मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी, स्वायत्त शासन निदेशक दीपक नंदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस आदेश के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव, रोकथाम, इसके संक्रमण की श्रंखला को जांच, उपचार तथा इसके संक्रमण से होने वाली मृत्यु को न्यूनतम किये जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी सम्भव प्रयास निरन्तर किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 20 राजकीय चिकित्सा संस्थानों में कोविड-19 की जांच निःशुल्क की जा रही है तथा एनएबीएल मान्यता प्राप्त एवं आईसीएमआर से अनुमोदित 4 निजी जांच प्रयोगशालाओं में कोविड- 19 की जांच की जा रही है ।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि आईसीएमआर के निर्देशों पर निजी जांच प्रयोगशालाओं में कोविड की जांच की उच्चतम सीमा 4500 रूपए प्रति जांच निर्धारित की गई थी। देश में ही आरटी-पीसीआर टेस्टिंग किट के विनिर्माण एवं सहज उपलब्धता तथा आमजन को कम कीमतों पर सहज एवं सुलभ जांच सुविधा उपलब्ध कराने को दृष्टिगत रखते हुए सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, निजी मेडिकल कॉलेजों, निजी अस्पतालों, निजी जांच प्रयोगशालाओं के प्रतिनिधियों एवं विषय-विशेषज्ञों के साथ विचार – विमर्श के उपरान्त, आरटी-पीसीआर किट एवं अन्य उपभोग्य की दरों तथा अन्य राज्यों द्वारा कोविड की जांच हेतु निर्धारित की गई दरों और राजस्थान महामारी अध्यादेश, 2020 की धारा 4 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा राज्य में एनएबीएल मान्यता प्राप्त एवं आईसीएमआर से कोविड- 19 जांच हेतु अनुमोदित निजी जांच प्रयोगशालाओं में कोविड-19 की आरटी-पीसीआर जांच की अधिकतम दर 2200 रूपए ( जीएसटीध्सभी कर सहित) निर्धारित की गई है।

मान्यता प्राप्त एवं आईसीएमआर से कोविड – 19 जांच हेतु अनुमोदित निजी प्रयोगशालाओं द्वारा सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए जांच किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विनयएक्सप्रेस समाचार, जयपुर। सहकारिता मंत्री श्री उदयलाल आंजना ने बताया कि कोविड़-19 महामारी को देखते हुए गौण मंडी घोषित 592 ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों के संचालन में लगे कार्मिकों को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस निर्णय से विपरीत परिस्थतियों में खरीद से जुड़े कार्य कर रहे सहकारी समितियों के कार्मिकों को संबल मिलेगा।
आंजना ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने किसानों से अपने खेत के नजदीक उपज बेचान की सुविधा देने के लिए नियमों में शिथिलता देकर 592 ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों को निजी गौण मंडी घोषित किया है। उन्होंने बताया कि सहकारिता विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी इस कार्य में लगातार सहयोग कर सहकारी समितियों को सक्रिय कर रहे है।
प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता श्री नरेश पाल गंगवार ने बताया कि आज तक 390 सहकारी गौण मंडियों द्वारा किसानों को अपने गांव के नजदीक ही उपज बेचान की सुविधा देना प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि निजी गौण मंडी का कार्य समितियों द्वारा वर्तमान में किये जा रहे कार्यो के अतिरिक्त नवीन कार्य है। अतः मंडी व्यवसाय में वृद्धि एवं कार्मिकों के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए समिति को प्राप्त मंडी शुल्क आय (समिति का हिस्सा) 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में समिति कार्मिकों को मिलेगा।
गंगवार ने बताया कि महामारी के दौर में किसानों से सुगम खरीद के लिए उठाए गए इस ऎतिहासिक कदम का फायदा सहकारी समितियों को मिल रहा है। कई ऎसी समितियां है जिन्होंने निजी गौण मंडी के रूप में 2-2 करोड़ रूपये से अधिक का व्यवसाय कर लिया है। कार्मिकों को प्रोत्साहन राशि का वितरण त्रैमासिक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गंगानगर जिले की गौण मंडी घोषित सहकारी समितियां लगातार अच्छा कार्य कर रही है। विभाग इस बात का भी आंकलन कर रहा है कि अच्छा कार्य करने वाली सहकारी समितियों को विभाग की अन्य योजनाओं से प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाएगा।