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विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। खबर हमारी विश्वास आपका. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल एवं चिकित्सा मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में राजस्थान को मेडिकल ट्यूरिज्म के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं। इस दिशा में जल्द ही ‘हील इन राजस्थान‘ पॉलिसी लाई जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयार किए गए पॉलिसी के प्रारूप पर शनिवार को सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा कर सुझाव लिए गए। इन सुझावों के आधार पर नीति को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती शुभ्रा सिंह की अध्यक्षता में स्वास्थ्य भवन में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश में मेडिकल वेल्यू ट्यूरिज्म बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। श्रीमती सिंह ने कहा कि राज्य सरकार राजस्थान में चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात कर रही है। इसी सोच के साथ इस वर्ष के बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कुल बजट का 8.26 प्रतिशत प्रावधान स्वास्थ्य के लिए किया गया है। यह अब तक का सर्वाधिक बजट प्रावधान है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान में चिकित्सा के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास किया जा रहा है। विश्व स्तरीय संस्थानों का निर्माण यहां हो रहा है। होलिस्टिक एप्रोच के साथ ऐलोपैथी एवं आयुष चिकित्सा तथा वैलनेस गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सवाई मानसिंह अस्पताल में आयुष्मान टॉवर का निर्माण, दो मेडिसिटी एवं मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना, हर जिले में मेडिकल कॉलेज एवं नर्सिंग कॉलेज, टेलीमेडिसिन को बढ़ावा, निजी क्षेत्र में भी कई उच्च श्रेणी के चिकित्सा संस्थानों का प्रदेश में आना ऐसे कदम हैं, जिनसे राजस्थान मेडिकल ट्यूरिज्म की दिशा में नई ऊंचाइयां छुएगा। साथ ही, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में भी पोर्टेबिलिटी का प्रावधान जल्द ही होने से यहां बाहर के राज्यों के रोगी उपचार के लिए आ सकेंगे।
श्रीमती सिंह ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का निरंतर उत्थान होने, वाजिब दरों पर सुगमतापूर्वक उपचार उपलब्ध होने से प्रदेश मंे मेडिकल ट्यूरिज्म की संभावनाएं तेजी से विकसित हुई हैं। नीतिगत निर्णयों के माध्यम से राज्य सरकार इन संभावनाओं को और अधिक विस्तार देना चाहती है। इससे प्रदेश न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में मॉडल स्टेट के रूप में सामने आएगा, बल्कि निवेश एवं रोजगार के भी बडे़ अवसर सृजित होंगे। फार्मा, होटल व्यवसाय सहित अन्य उद्यमों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा। हील इन राजस्थान पॉलिसी इन संभावनाओं को धरातल पर लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
बैठक में चिकित्सा के क्षेत्र से जुडे़ विशेषज्ञों ने प्रदेश में मेडिकल ट्यूरिज्म बढ़ाने के लिए राजधानी के साथ-साथ अन्य जिलो में भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने, सड़क एवं एयर कनेक्टिविटी को बेहतर करने, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अवसर बढ़ाने, रोगियों एवं उनके परिजनों के लिए आवास की समुचित सुविधाएं उपलब्ध करवाने, निजी क्षेत्र के चिकित्सा संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों को अधिक सुगम व निवेश अनुकूल बनाने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल सांइसेज के चेयरपर्सन डॉ. विकास स्वर्णकार ने कहा कि चिकित्सा विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रारूप में मेडिकल ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों को बेहतर तरीके से शामिल किया गया है। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे नीतिगत निर्णय भी प्रशंसनीय हैं। मणिपाल अस्पताल के निदेशक श्री रंजन ठाकुर ने कहा कि मेडिकल ट्यूरिज्म के लिए बेहतर नीति लाने पर चिकित्सा विभाग के प्रयासों को सराहा। इण्यिन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रजनीश शर्मा ने कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान में लागू की जा रही नीतियां ज्यादा प्रभावी हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. धनंजय अग्रवाल, मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. एमके आसेरी, आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ. आनंद शर्मा, निदेशक होम्योपैथी डॉ. राजरानी यादव, अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन डॉ. सुशील परमार, संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील सिंह, अतिरिक्त प्रधानाचार्य एसएमएस मेडिकल कॉलेज डॉ. भारती मल्होत्रा, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. एमएल स्वर्णकार, इटरनल हॉस्पिटल के डॉ. अजीत बाना, राजस्थान हॉस्पिटल के एमडी डॉ. सर्वेश अग्रवाल, भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के कार्यकारी निदेशक डॉ. एससी पारीक, सीके बिरला हॉस्पिटल के श्री सचिन सिंह एवं भूपेन्द्र सिंह, शैलबी हॉस्पिटल के श्री विशाल शर्मा, फोर्टिस हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. माला एरून, प्रियुष हॉस्पिटल के डा योगेश गुप्ता, सीआईआई के कार्यकारी अधिकारी श्री आशीष पाठक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं विभिन्न निजी चिकित्सा संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश माथुर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। देश में आज से लागू नए आपराधिक कानूनों के तहत प्रदेश में पाली के सादड़ी पुलिस थाने में पहली एफआईआर (नम्बर 0117) सोमवार को दर्ज की गई। महानिदेशक पुलिस, साइबर अपराध एवं एससीआरबी श्री हेमंत प्रियदर्शी ने बताया कि यह एफआईआर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173 के तहत रास्ता
रोककर मारपीट करने एवं सम्पत्ति को नुक़सान पहुंचाने की घटना के सम्बन्ध में दर्ज की गई। यह घटना सुबह 7.30 बजे की है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 115 (2), 126 (2), 324 (4) एवं 324 (5) में प्रकरण दर्ज किया गया।
श्री प्रियदर्शी ने बताया कि प्रदेश में नए आपराधिक कानूनों की न्याय प्रणाली के तहत दोनों संहिताओं बीएनएसएस एवं बीएनएस का सुचारू क्रियान्वयन आरम्भ कर दिया गया है। पुराने कानूनों के स्थान पर नए कानूनों में सिस्टम का सही तरीके से ट्रांजिशन हो गया है। सीसीटीएनएस पर बीएनएस एवं बीएनएसएस का इंटीग्रेशन पूरा हो चुका है। प्रदेश के नागरिकों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।
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विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। ए.सी.बी. मुख्यालय के निर्देश पर जोधपुर इकाई द्वारा आज कार्यवाही करते हुये श्रवण कुमार (प्राईवेट व्यक्ति) को योगेन्द्र सिंह पटवारी हल्का कोसाणा, तहसील पीपाड़, जिला जोधपुर के लिये परिवादी से 1500 रुपये रिश्वत राशि लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक श्री भगवान लाल सोनी ने बताया कि ए.सी.बी. की जोधपुर इकाई को परिवादी द्वारा शिकायत दी गई कि कृषि भूमि का नामान्तकरण ऑनलाईन दर्ज करने की एवज में योगेन्द्र सिंह पटवारी हल्का कोसाणा, तहसील पीपाड़, जिला जोधपुर द्वारा 4 हजार रुपये रिश्वत राशि मांग कर परेशान किया जा रहा है।

आरोपी पटवारी द्वारा परिवादी से 2 हजार रुपये पहले ही रिश्वत के रूप में वसूल कर लिये है तथा अब अपने दलाल श्रवण कुमार (प्राईवेट व्यक्ति) के माध्यम से 1500 रुपये रिश्वत और मांग कर परेशान किया जा रहा है। जिस पर एसीबी जोधपुर इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री भोपाल सिंह लखावत के नेतृत्व में शिकायत का सत्यापन किया जाकर आज पुलिस निरीक्षक श्री रूपसिंह एवं उनकी टीम द्वारा ट्रेप कार्यवाही करते हुये श्रवण कुमार पुत्र श्री माधुराम मेधवाल निवासी पटवार भवन के पास कोसाणा, तहसील पीपाड़, जिला जोधपुर (प्राईवेट यक्ति) को परिवादी से 1500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। आरोपी योगेन्द्र सिंह पटवारी हल्का कोसाणा, तहसील पीपाड़, जिला जोधपुर ए.सी.बी. की कार्यवाही की भनक लगने पर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि आरोपी पटवारी योगेन्द्र सिंह के निवास की तलाशी में 1 लाख 45 हजार रुपये अतिरिक्त नगद मिले हैं।

एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री दिनेश एम.एन. के निर्देशन में आरोपी से पूछताछ जारी है। एसीबी द्वारा मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत प्रकरण दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान किया जायेगा।

एसीबी महानिदेशक, श्री भगवान लाल सोनी ने समस्त प्रदेशवासियों से अपील की है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टोल-फ्री हैल्पलाईन नं. 1064 एवं वॉट्सएप हैल्पलाईन नं. 94135-02834 पर 24X7 सम्पर्क कर भ्रष्टाचार के विरूद्ध अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। एसीबी आपके वैध कार्य को करवाने में पूरी मदद करेगी। विदित रहे कि एसीबी राजस्थान राज्य में राज्य कर्मियों के साथ-साथ केन्द्र सरकार के कार्मिकों के विरूद्ध भी कार्यवाही करने को अधिकृत है।

ट्रेन में 1200 से ज्यादा यात्री सवार
ट्रेन में करीब 1200 यात्री सवार थे जिसमें 700 करीब राजस्थान के यात्री हैं। रेलवे के सीपीआरओ कैप्टन शशि किरण ने बताया की इस ट्रेन में बीकानेर से 308 पैसेंजर सवार हुए थे।

ये है बीकानेर एक्सप्रेस का रूट
इस ट्रेन का रूट काफी लंबा है और ट्रेन राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और असम के कई जिलों से गुजरकर गुवाहाटी पहुंचती है। ये ट्रेन बीकानेर, नोखा, नागौर, मकराना, जयपुर, भरतपुर, आगरा, टुंडला, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज, पटना, बख्तियारपुर, मोकोना, न्यू बरौनी, खगड़िया, नवगछिया, कटिहार, दालकोला, किशनगंज, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूच बिहार, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू बोआईगांव, कामख्या होते हुए गुवाहाटी पहुंचती है।
पीएम मोदी ने ममता बनर्जी से की बात
इस दौरान बीकानेर एक्सप्रेस 5 राज्यों के 34 रेलवे स्टेशनों से गुजरती है। बीकानेर एक्सप्रेस के हादसा ग्रस्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की है। इसके अलावा ममता बनर्जी ने न्यू जलपाईगुड़ी और आसपास के इलाकों के शीर्ष अधिकारियों को मौके पर पहुंचने और लोगों की मदद करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से घायलों के इलाज के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को पास के मेडिकल कॉलेज अस्पताल को तैयार रखने के लिए कहा गया है। घटना स्थल पर बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिया गया।
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सीएम अशोक गहलोत ने राज्य के पांच विद्युत कंपनियों के कर्मचारियों को भी दिवाली गिफ्ट दिया है. कर्मचारियों को बोनस, एक्स-ग्रेशिया का भुगतान किया जाएगा. विद्युत विभाग से प्राप्त प्रस्ताव का सीएम गहलोत ने अनुमोदन कर दिया है. इसके तहत विपरीत प्रतिनियुक्ति पर पद स्थापित कार्मिकों को भी देय लाभ होगा. मैट्रिक्स लेवल-12 अथवा ग्रेड पे- 4800 और इससे नीचे के लेवल का वेतन ले रहे विद्युत कम्पनियों के कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. प्रत्येक कार्मिक को अधिकतम 6 हजार 774 रुपए तदर्थ बोनस मिलेगा. विद्युत कम्पनियों के करीब 60 हजार 700 कर्मचारियों को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा. हालांकि कहा जा रहा है कि इससे करीब 40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार सरकार पर आएगा


दीपावली पर राजस्थान के रोडवेज कर्मियों की भी बल्ले-बल्ले हो गई है. पहले बोनस और अब बढ़ा डीए
7 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है. रोडवेज कर्मियों का महंगाई भत्ता 189 प्रतिशत से बढ़कर 196 प्रतिशत कर दिया गया है. रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. इसके अलावा राज्य के कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए भी अच्छी खबर है. पांचवें एवं छठे वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ते का लाभ कर्मचारियों को मिलेगा. कार्मिकों को जुलाई से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिलेगा. वित्त विभाग के प्रस्ताव का सीएम गहलोत ने अनुमोदन कर दिया है. अब क्रमशः 196 प्रतिशत और 368 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा.



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ज्ञापन में नर्सेज संविदाकर्मीयों के मिलने वाले आकस्मिक अवकाश कोविड़ स्वास्थ्य सहायकों को भी देने की मांग की गई है इसके अतिरिक्त कोविड़ स्वास्थ्य सहायकों को नर्स ग्रेड़-2 पदनाम करवाने की मांग सीएचए संगठन के पदाधिकारियों द्वारा की गई है। ज्ञापन देते समय प्रतिनिधिमंडल में लेखचंद भील, ललित शर्मा, मदन लाल मेघवाल, संदीप कुमार, अजय कुमार, अभिषेक जोशी , गोपीराम, फारूक उस्ता, आरिफ खान सहित अन्य सीएचए संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहें।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राजकीय चिकित्सालयों में बढ़ रहे डेंगू रोगीयों की देखभाल में भी कोविड़ स्वास्थ्य सहायक प्रदेश भर में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है, कोविड स्वास्थ्यों की सेवा भावना और दीपावली पर्व को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारीयों को यथाशीघ्र कोविड़ स्वास्थ्य सहायकों की सेवा अवधि बढ़ाई जानी चाहिए और जल्द मानदेय दिया जाना चाहिए।


इस वर्ष अब तक ऐसे 36 कक्ष बनाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा खारिया बास जागरूक गांव है। यहां के लोगों ने शिक्षा का महत्त्व समझा है। उन्होंने कहा कि यदि हम बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं देंगे तो वे आगे कैसे बढ पाएंगे? इसके मद्देनजर उन्होंने सभी बच्चों को पढा-लिखाकर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांव के सर्वांगीण विकास में शिक्षा का बड़ा योगदान होता है। यदि किसी गांव के शत-प्रतिशत लोग शिक्षित होते हैं तो वह गांव आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि कोलायत क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान खुलें। उच्च शिक्षा के मामले में भी क्षेत्र को लाभ हो। उन्होंने कहा कि हदां में कॉलेज खुलने से 15 ग्राम पंचायतों के विद्यार्थियों को सहूलियत होगी।

इस अवसर पर मंत्री भाटी ने गांव के अस्पताल की भूमि के लिए 3 लाख रुपये देने वाले भामाशाह पाबूराम का सम्मान किया। इस अवसर पर भंवर लाल सेठिया, उपखंड अधिकारी प्रदीप चाहर, विकास अधिकारी दिनेश सिंह भाटी, सहायक परियोजना समन्वयक कैलाश बडगूजर, बीकमपुर सरपंच संग्राम सिंह, खारिया बास सरपंच भंवरलाल विश्नोई, खारिया पतावतान सरपंच भवानी शंकर सोनी, पंचायत समिति सदस्य हेतराम कड़वासरा, अतिरिक्त विकास अधिकारी अमर सिंह बीका, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी अधिशासी अभियंता नफीस खान तथा दुर्गेश सोनी आदि मौजूद रहे।





विनय एक्सप्रेस, व्यक्ति विशेष आलेख।चित्तौड़गढ में आईएएस डॉ. समित शर्मा की पहली कलेक्टर की पोस्टिंग हो या नागौर में दूसरी । जोधुपर में संभागीय आयुक्त या एनएचएम के एमडी । सभी स्थानों में वे अनुशासन से चलने वाले, नियमों की पाना करने वाले और आमजन के हित के काम करने वाले अधिकारी के रूप में कार्य करते रहे। उनके द्वारा पारदर्शी प्रशासन देने के साथ ही आमजन को मदद करने वाली छवी उन्हे लोकप्रिय बनाती रही। लोकप्रियता के साथ ही अन्य कारणों से कामचोर सरकारी कर्मचारियों और नेताओं को वे खटकने लगे।
राजनीति में वोट की महत्ता होती है और वोट बैंक के कारण सरकार के कई निर्णय प्रभावित होते है। यही कारण है कि योग्य, न्यायप्रिय और समाज व देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे को नजर अन्दाज कर कई नेताओं के हितों को साधने का साधन बनकर डॉ. शर्मा जैसे अधिकारियों का समाज हित उपयोग सरकार नहीं ले पाती है । कई घटनाओं से जानाकरी मिलती है कि डॉ. समित शर्मा की योग्यता का भी समाजहित में पूरा उपयोग सरकारें नहीं ले पा रही है। यही कारण है कि दबाव के कारण उनका बार-बार तबादला किया गया और सिस्टम को पूरी तरह सुधारने का मौका ही नहीं दिया गया। शायद ऐसी राजनीतिक बाध्यताए और मजबूरियां ही देश के विकास की राह पर आगे बढ़ने से रोक रही हैं। यदि सरकारें, अधिकारी-कर्मचारी और जनता मिलकर प्रण लें कि हमें सरकारी व्यवस्थाओं और लोक सेवाओं का सुधारना है तो यह संभव है की आम लोगों को सरकारी सुविधाएं सुलभता से मिलने लगे, सरकारी अस्पतालों में भी प्राइवेट हॉस्पिटल की तरह उपचार होने लगे, सराकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होने लगे, किसानों मजदूरों और गरीब लोगों के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें बिना चक्कर कटवाए और बिना सुविधा शुल्क के उपलब्ध हो। हमारे देश में भी विदेशों की तरह आधारभूत सुविधाएं हो यहां के मानव अधिकार सूचकांको में भी सुधार आये, राजस्थान अन्य क्षेत्रों में भी पूरे देश के लिए मिसाल कायम करें और भारत विकासशील की श्रेणी से छंलाग लगाते हुए एक सुविधा सम्पन्न, समृद्ध व विकसित राष्ट्र बने।

21 फरवरी 1972 को राजस्थान के अजमेर में जन्में भारतीय प्रशासनिक सेवा के राजस्थान कैडर 2004 बैच के अधिकारी डॉ. समित शर्मा लोक सेवा के प्रति अपने समर्पण, सिद्धान्तों और नवाचारों के लिए जाने जाते है। सच तो यह है कि यह ऐसे अधिकारी है जिन्होनें जिन्होनें प्रशासनिक सेवाओं में अपने सिद्धान्तों और नियमों से कभी समझौता नहीं किया, भले ही किसी का भी दबाव हो, चाहे उन्हें इससे नुकसान ही उठाना पड़ा हो।
उन्होनें जून 2008 से लेकर सितम्बर 2009 मतबल मात्र 15 माह में चित्तौडगढ जिला कलक्टर रहते हुए कई रिकॉर्ड-तोड़ कार्य किये । जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं। सर्वाधिक उल्लेखनीय कार्य यह था कि इन्होंने कुछ माह में ही जिले भर में 27 अस्पतालों में न्यूनतम कीमत की जेनेरिक दवाईयों के विक्रय हेतु उचित मूल्य की दवा दुकानें खुलवाई जिसका सुखद परिणाम यह हुआ कि 100 रूपये की दवा 10 रूपये में मिलने लगी और 20 रूपये की दवा 2 रूपये में । उपचार सुलभ और सस्ता हो गया, गरीब व्यक्ति भी अपना अपना इलाज कराने में सक्षम हो सके। यह एक ऐसा प्रयोग था जिससे चित्तौड़गढ़ जिले को देशभर में पहचान मिली और उसका नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानचित्र पर आ गया।
जिले को हरा-भरा बनाने के लिए आमजन और संस्थाओं के सहयोग से मिशन हरित चित्तौड़गढ़ के दौरान 15 लाख पौधों का पौधारोपण करवाया गया। आम लोगों को इससे जोड़ने के लिए अनेक स्थानों पर श्रमदान आयोजित किया गया जिसमें वे स्वयं भी सम्मिलित होते। इसके साथ ही मनरेगा को प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वित करवाया । उन्होनें लोक प्रशासन के महत्वपूर्ण सिद्धान्त संवेदनशीता, पारदर्शिता और जवाबदेहीता को अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में उतारा।
डॉ समित शर्मा चित्तौड़ जिला कलेक्टर रहते हुए ऐसे अधिकारी के रूप में चर्चित हुए, जो आमजन से सीधे जुड़े हुए थे और जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे । इसी कारण जब राजनीतिक कारणों से उनका कम समय में स्थानान्तरण हुआ तो चित्तौड़गढ़ की जनता सड़कों पर आ गई। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी कलक्टर को रोकने के लिए जनता ने आन्दोलन किया और राजस्थान में कांग्रेस सरकार होते हुए भी इस आन्दोलन में कांग्रेसी नेता भी सम्मिलित हुए। अपने प्रिय कलक्टर को रोकने के लिए चित्तौड़गढ पूरे 5 दिन बंद रहा स्वयं समित शर्मा ने चित्तौड़ के आमजन को समझाया तब जाकर मामला शांत हुआ।

सितम्बर 2009 से लेकर जनवरी 2011 तक मात्र लगभग 16 माह नागौर कलक्टर रहते हुए जिले की जनता के बीच विकासवादी छवि व लोकहितकारी कार्यों से वे जल्दी ही लोकप्रिय हो गये। उन्होने नागौर में भी पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी लोक प्रशासन दिया। लोक शिकायतों के निवारण हेतु नई प्रभावशाली प्रणाली को विकसित कर क्रियन्वित करवाया। प्रत्येक आगंतुक को व्यक्तिगत रूप से सुनकर उसकी संबंधित अधिकारी से बात कराई जाती और फिर प्रत्येक लिखित आवेदन की रसीद दी जाती, और कहा जाता कि यदि आपका काम ना हो या आप संतुष्ट नहीं हो तो अमुक समय बाद वापस आ जाएं। सभी शिकायतों को कम्प्यूटर में दर्ज किया जाता और प्रभावी मॉनिटरिंग की जाती, जिससे कि आमजन के वाजिब काम हो सके और उन्हें न तो काई चक्कर लगवाए और न उनसे रिश्वत मांगे। सभी अधिकारी और कर्मचारी समय पर दफ्तर पहुंचने लगे और शिक्षक गण समय पर स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने लगे। जिला कलेक्टर का कभी भी कहीं भी आकस्मिक निरीक्षण का ऐसा खौफ था कि कोई भी कर्मचारी देर से जाने या ड्यूटी से गैरहाजिर होने का ख्याल भी मन में नहीं आने देता था। जनता की सुनवाई कार्यक्रम को निरन्तर करते रहने, शासन व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और आमजन की समस्या को त्वरित गति से हल करने के कारण नागौर में उन्हे ’’जनता का कलक्टर’’ कहा जाने लगा।

नागौर से भी डॉ. समित शर्मा का स्थानान्तरण होने पर वहां की जनता रोषित होकर सड़कों पर आ गई और वापस नागौर लगाने की मांग करने लगी। एक बार फिर समित शर्मा को नागौर की जनता को समझाना पड़ा तब जाकर वहां के लोग समझे और 4 दिन बाद आन्दोलन खत्म किया गया। बार-बार ऐसा संयोगवश नहीं हो सकता था, यह जनता से सीधे जुड़ाव का परिणाम था।

डॉ. शर्मा की कलक्टर के पद पर पहली पोस्टींग 2008 मे राजस्थान के चितौड़गढ़ में हुई। चिकित्सा क्षेत्र में उनके कार्यों के कारण चितौड़गढ़ का नाम विश्व के सबसे बड़े स्वास्थ्य संगठन, 172 राष्ट्रों की संस्थान विश्व स्वास्थ्य संगठन में बडे गर्व से सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है।
डॉ. समित शर्मा राजस्थान में निःशुल्क दवा वितरण योजना लाने वाले आई.ए.एस. है । कई उदाहरण है जिनसे जानकारी मिलती है कि उनके नवाचारों का सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि भारत ओर विदेशों में भी अनुसरण किया गया और पहचान भी मिली।
वर्तमान में देखा जा रहा है कि कई युवा मेडिकल क्षेत्र में पैसा कमाने ही आते है लेकिन डॉ. समित शर्मा ने एक शिशु रोग विशेषज्ञ होने के बाद भी गरीब और जरूरतमंद लोगों की लाचारी को समझा और निःशुल्क दवा वितरण योजना और जेनरिक दवाईयों के लिए अभियान चलाया।
डॉ. शर्मा के इस अभियान से चिकित्सा माफिया उनसे नाराज भी हुआ और उन्होनें कई बार षडयंत्र रचने का प्रयास भी किया लेकिन डॉ. शर्मा का बाल भी बांका नहीं कर पाए। चितौडगढ़ व नागौर जिले में सफल रही किफायती जेनेरिक दवा योजना से राजस्थान सरकार प्रभावित हुई। सरकार ने समित शर्मा को निःशुल्क दवा वितरण योजना बनाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी । अल्प समय में ही योजना बनाकर 2 अक्टूबर 2011 को मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा वितरण योजना लागू की गयी। यह योजना इतने सुनियोजित और सुव्यवस्थित तरीके से बनाकर लागू की गई की सिर्फ भारत में ही नहीं वरन् विश्व भर में एक रो मॉडल योजना बनकर उभरी।

डॉ. समित शर्मा ने यू.के., बैंकॉक, कनाड़ा, नेपाल सहित कई देशों की कॉन्फ्रेंस में भाग लिया । इसके साथ ही संसद में स्वास्थ्य की स्थाई समिति व राज्यसभा की वाणिज्य समिति के समक्ष भी आमजन के लिए उपचार सुलभ बनाने हेतु दवाओं के मूल्य नियंत्रण के पक्ष में अपना प्रजेंटेशन दिया, जिसे दोनों समितियों ने अपनी सिफारिशों में सम्मिलित किया। इसके अतिरिक्त अनेक राज्यों यथा यू.पी., महाराष्ट्र, प.बंगाल, गुजरात के मुख्यमंत्री/स्वास्थ्य मंत्री , उच्च अधिकारियों व अनेक समितियों के समक्ष भी निःशुल्क दवा योजना के संबंध में प्रजेंटेशन दिया। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्हें एक स्पेशलिस्ट के रूम मे आमंत्रित किया गया और दवओं के मूल्य कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हुई।

डॉ. समित शर्मा के द्वारा की गई दिन-रात की मेहनत से भारत में पहली बार सार्वजनिक क्षेत्र के माध्यम से किफायती जेनेरिक दवा योजना लाई गई । यह योजना इतनी प्रभावी ओर सफल रही की सिर्फ राजस्थान सरकार ही नहीं वरन् भारत के सभी राज्यों का ध्यान इस योजना पर गया।
राज्यसभा में सन् 2010 मे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग की स्टेडींग कमेटी द्वारा 45वीं रिपार्ट जेनेरिक दवा की उपयोगिता आवश्यकता, महत्व और प्रभाव पर पेश की गई । इस रिपोर्ट में डॉ. समित शर्मा द्वारा चितौड़गढ़ व नागौर जिले में किफायती जेनेरिक दवा योजना पर स्टेडिंग कमेटी द्वारा कई समीक्षा, अध्ययन, विवेचन व अनुसंधान पर भारत में जेनेरिक दवा की आवश्यकता, जरूरत, उपयोगिता, महत्ता व प्रभाव पर प्रकाश डाला गया ओर इस पर योजना बनाने की सिफारिश की गई।
रिपोर्ट को आधार मानते हुए केन्द्र सरकार ने स्वास्थ्य संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए। आमजन को उपचार उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना ओर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना लागू की गई।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के तहत अभी तक केन्द्र सरकार द्वारा 3000 से ज्यादा जेनेरिक दवा स्टोर खोले जा चुके है। जहां किफायती दर पर 700 प्रकार की जेनेरिक दवा, केन्द्र सरकार उपलब्ध करा रही है। अब केन्द्र सरकार के चिकित्सक सिर्फ किफायती जेनेरिक दवा ही लिखे, ऐसा कानून लाने की तैयारी हो रही हैं, इस आशय की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री जी कर चुके हैं। जेनेरिक दवा लिखने का कानून बनाने हेतु ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। 10 वर्ष पूर्व राजस्थान में निःशुल्क दवा योजना की सफलता के फलस्वरूप भारत के 16 राज्यों में निःशुल्क दवा वितरण योजना अलग-अलग स्वरूप मे संचालित हो रही है और इन राज्यों के प्रतिनिधियों ने पहले राजस्थान आकर इस निःशुल्क दवा योजना की स्टडी की, इसके बाद ही इसे अपने-अपने राज्यों में लागू किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में सिर्फ देश ही प्रतिनिधित्व करते है लेकिन किफायती जेनेरिक दवा योजना और निःशुल्क दवा योजना के लिए राजस्थान राज्य को आमंत्रित किया गया। राजस्थान भारत का पहला राज्य है जिसने (डब्ल्यूएचओ) में भारत का प्रतिनिधितव किया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधियों ने राजस्थान आकर जेनेरिक दवा योजना और निःशुल्क दवा पर अध्ययन कर समीक्षा की और न्दपअमतेंस।बबमे जव उमकपबपदम पद पदकपं की 22 पेज की रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने प्रकाशित की । जिसमें राजस्थान निःशुल्क दवा योजना के बारे में छापा गया और विश्व भर के विकासशील, प्रगतिशील और पिछडे राष्ट्रों को जेनेरिक दवा योजना ओर निःशुल्क दवा योजना अपनाने की सलाह दी। इसके बाद कई देशों के प्रतिनिधियों ने राजस्थान आकर निःशुल्क दवा वितरण योजना की जानकारी लेकर समीक्षा की। एक साधारण से आदमी के द्वारा किये गये असाधारण प्रयास ेस आज करोड़ों लोगों के जीवन में प्रकाश हुआ और इसलिए डॉ. समित शर्मा को किफायती जेनेरिक दवा योजना और निःशुल्क दवा वितरण योजना का जन्मदाता और मेडिसिन मैन के उपनाम से भी देश-विदेशों में जाना जाता है।

डॉ. शर्मा के कार्यों की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी तो टेलिविजन के प्रचलित शो सत्यमेव जयते में अभिनेता आमिर खान ने उन्हे बुलाया। डॉ. समित शर्मा को सन् 2010 में भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के द्वारा औषधियों को किफायती बनाने के लिए 21 अप्रेल को नागरिक सेवा दिवस पर प्रधानमंत्री लोक प्रशासन में उत्कृष्टता अवॉर्ड दिया गया।विश्व स्वास्थ्य संगठन के राष्ट्र प्रमुख और भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा बेस्ट हेल्थ केयर अवॉर्ड 2012 प्रदान किया गया।इसके बाद उत्तर पद्रेश के राज्यपाल द्वारा रोटरी एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 2013 को निःशुल्क दवा योजना के सॉफ्टवेयर ई-औषधि बनाने के लिए उन्हें राजस्थान ई-गवर्नेस अवार्ड से सम्मानित किया गया। आज यह सॉफ्टवेयर भी अन्य राज्यों द्वारा उपयोग में लिया जाता है। इसके अतिरिक्त भी डॉ. समित शर्मा कई पुरस्कारों से नवाजे गये।

डॉ. समित शर्मा सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि प्रत्येक क्षेत्र में असाधारण प्रतिभा के धनी है, जिन्हें सफल नवाचार करने और अनुशासन की मिसाल माना जाता है। सिविल सेवा क्षेत्र में आने के बाद आजतक ड्यूटी समय में अपना आईडी कार्ड पहने रखते है। डॉ. शर्मा भारत के सर्वश्रेष्ठ दस आईएएस में जगह प्राप्त राजस्थान के गौरव है। महिला एवं बाल विकास विभाग मे रहे तो उन्होंने आंगनबाडी के माध्यम से पहली बार प्राथमिक शिक्षा पर महत्व दिया। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर खेल-खेल में पढ़ाई मस्ती की पाठशाला कार्यक्रम शुरू किया, जिससे 3 से 6 वर्ष की आयु के 18 लाख बच्चों को आंगणबाड़ी पाठशाला के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा मिलने लगी जिसकी देशभर में प्रशंसा हुई। यूनिसेफ के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान के इस कार्यक्रम की समीक्षा की और तारीफ भी की। मनरेगा आयुक्त रहे तो भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और जो काम करेगा, उसे ही दाम मिलेगा पर कार्य किया। उनका सिद्धान्त था पूरा काम और पूरा दाम जिससे कि नरेगा के माध्यम से रोजगार के साथ-साथ गांवों में स्थाई परिसंपत्तियों का सृजन भी हो, और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास हो। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में रहे तो राजस्थान में पहली बार विभाग द्वारा संचालित सभी पेंशन योजना का डाटा ऑनलाइन अपग्रेडेशन किया।भारत मे राजस्थान को लाखों लाभार्थियों तक सीधे खाते में पेंशन पहुचाने में अव्वल स्थान मिला ओर इसके लिए डॉ. शर्मा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

डॉ. समित शर्मा जिस विभाग में रहे, वहां बायोमेट्रिक ऑनलाइन हाजरी सिस्टम शुरू किया और उसका खुद भी अनुसरण करते है। एनएचएम के एमडी रहते हुए अल्प कार्यकाल में ही राजस्थान के सभी स्तर के सरकारी अस्पतालों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया और इसके लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई। आकस्मिक निरीक्षण से अस्पतालां की वास्तविक स्थिति को जाना गया ओर अस्पतालों के गुणवत्ता सुधार के लिए संसाधन उपकरण बढ़ाने, सुविधाएं बढ़ाने, बजट बढ़ाने पर एनएचएम के द्वारा प्राथमिकता से काम कर योजना बनाई गई।

21 फरवरी 1972 को जन्मे आईएएस समित शर्मा मूलरूप से राजस्थान के अजमेर के रहने वाले हैं। समित शर्मा ने एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर रखी है। लोक सेवक बनने से पहे पांच साल तक समित शर्मा ने एक अस्पताल में चिकित्सक के रूप मे सेवाएं दी। समित शर्मा ने अपने पिता सुरेंद्र कुमार शर्मा के दोस्त डॉ. पीसी जैन की बेटी डॉ. सोनिका से शादी की। इनके दो बच्चे हैं।
समित शर्मा 2004 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। मंसूरी, जयपुर व झालावाड में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद समित शर्मा को जोधपुर में एसडीएम लगाया गया। फिर ये कोटा नगर निगम के सीईओ, अलवर व भिवाड़ी यूआईटी में सचिव, चित्तौड़गढ़ व नागौर में जिला कलक्टर, एनआरएचएम मिशन डायरेक्टर, आरएमएससी एमडी लगया गया। इनके अलावा खनिज, ईजीएस, संयुक्त सचिव, विशेष सचिव, जयपुर मेट्रो चेयरमैन, श्रम आयुक्त, जयपुर व जोधपुर संभागीय आयुक्त के पद पर सेवाएं दे चुके है।

आईएएस समित शर्मा अपने तबादलों के साथ-साथ अनूठे फैसलों की वजह से भी चर्चा में रहते हैं। जयपुर में चाह माह तक संभागीय आयुक्त रहने के दौरान समित शर्मा ने अपने कार्यालय के बाहर बोर्ड लगाकर मिलने का समय लिखा था- कार्यालय समय में कभी भी । बोर्ड की तस्वीर सोशल मीडिया में काफी वायरल हुई थी। लोगों ने समित शर्मा के इस फैसले की जमकर तारीफ भी की थी।



साथ ही रामावतार सैनी, नेमीचंद भाकर, रोशन मुथा, अनुराग पुरोहित व कपिल सेन को उपाध्यक्ष पद पर मनोनित किया गया। सुश्री संगीता रांकावत, पंकज सांखला, नेमीचंद सैनी, विरेन्द्र पुरोहित अणदराम मेघवाल व रोहित तिवाडी को महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी। ओम प्रकाश टाक, मनोज कुमार, श्रवण राम भांबु, मोहम्मद सोहेल, दिनेश शर्मा, एवं पृथ्वीराज को सचिव पद दायित्व दिया गया है।

प्रदेशाध्यक्ष व्यास ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार.प्रसार करने के साथ अधिक से अधिक पात्र लोगों को इनका लाभ दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही नागौर विधानसभावार ब्लॉक स्तर की कार्यकारिणी की अभिशंषा 15 दिवस के भीतर करने के आदेश बिस्सा को दिए है।
