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विनय एक्सप्रेस समाचार, नागौर। पशुपालन विभाग की शासन सचिव डाॅ. आरूषी मलिक ने कहा कि पशुपालन परम्पराएं सदियों से चली आ रही है और ये परम्पराएं लुप्त न हो जाए, इसके लिए पशु मेलों को बढावा दें ताकि पशुपालकों का जुडाव निरन्तर बना रहे, इसका भरसक प्रयास राज्य स्तर पर किया जायेगा। शासन सचिव डाॅ. मलिक शनिवार को श्रीरामदेव पशु मेले के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित कर रही थीं।
डाॅ. आरूषी मलिक ने कहा कि मेले हमारी पुरातन लोक संस्कृति के द्योतक हैं, इनका आयोजन नई पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि मेलों में नागौर को विशेष पहचान दिलाने वाले श्रीरामदेव पशु मेले के आयोजन को लेकर संभावनाएं कम थीं लेकिन यहां के जिला कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी और टीम नागौर के प्रयासों और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए मेले के आयोजन का निर्णय लिया गया। शासन सचिव, पशुपालन विभाग ने कहा कि मेले के सफल आयोजन को लेकर जिला प्रशासन व पशुपालन विभाग, बधाई के पात्र हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को इस बात के लिए साधुवाद दिया कि उन्होंने अल्प समय में इस मेले के आयोजन की सूचना के बाद जिस प्रकार से मेले को बेहतर और अच्छी व्यवस्थाऐं बनाने में जिस प्रकार योगदान दिया वे सराहनीय रही ।

शासन सचिव डाॅ. आरूषी मलिक ने अतिरिक्त जिला कलक्टर मनोज कुमार द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर श्री रामदेव पशु मेले की 211 बीघा भूमि को विकसित करने का आश्वासन दिया गया और कहा कि मेला मैदान को संरक्षित कर इसमें पशुपालकों को मेले के दौरान बेहतर सुविधाएं दी जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि श्रीरामदेव पशु मेले में जिस तरह से पशुपालकों का जिला स्तर का कार्यक्रम रखा गया है, उसी तरह राज्य स्तर पर भी पशुपालकों के सम्मान का कार्यक्रम रखा जाएगा।

डाॅ. आरूषी मलिक ने राज्य पशु ऊंट की घटती संख्या पर चिंता जताई और कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए उष्ट्र कल्याण एवं समस्या समाधान शिविर जगाये जाएंगे, जिसमें पशुपालक उष्ट्र वंश की वृद्धि के लिए आ रही समस्याओं से निजात पा सके। उन्होनें 1 फरवरी से पूरे राज्य भर में ढाई हजार से अधिक पशु शिविरों का आयोजन करने की जानकारी दी जिसमें सैकड़ों पालको को लाभान्वित किया गया।
राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए शासन सचिव डाॅ. मलिक ने बताया कि दुग्ध संकलन के लिए अधिक से अधिक सेंटरों की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए किसान और पशुपालक अपने सुझाव देकर अपने यहां दुग्ध संकलन केन्द्र खोलने के प्रस्ताव भी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिला स्तर पशुपालकों का ग्रुप विकसित करेंगे और उस पर आने वाली प्रत्येक समस्या का समाधान करने का भरसक प्रयास किया जायेगा।
कार्यक्रम में पदमश्री हिम्मताराम भांभू ने मुख्य अतिथि डाॅ. आरूषि मलिक और कलक्टर डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी दोनांे का आभार जताया और कहा कि कोरोना काल में इस वर्ष श्रीरामदेव पशु मेले का आयोजन कठिन था लेकिन प्रशासन के समय रहते किए गए अथक प्रयासों से इस मेले का आयोजन सम्भव हो पाया। उन्होनें पशुपालन के महत्व व गाय की उपयोगिता की जानकारी दी।
अतिरिक्त जिला कलक्टर मनोज कुमार ने कहा कि श्रीरामदेव पशु मेले के आयोजन की सफलता में पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों के प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पशुपालन वर्तमान में एक बार फिर से प्रासंगिक हो रहा है, युवाओं को इस संबंध में संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।

श्रीरामदेव पशु मेला में शनिवार को आयोजित पारितोषिक वितरण समारोह में शासन सचिव, पशुपालन डाॅ. आरूषी मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद जवाहर चौधरी व अतिरिक्त जिला कलक्टर मनोज कुमार तथा पदमश्री हिम्मताराम भांभू ने पशुओं से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं से श्रेष्ठ आए पशुपालकों को नगद एवं प्रशंसा पत्र के साथ समृति चिह्न देकर भी सम्मानित किया। इस अवसर उन्होनें गौ सेवा क्षेत्र में उन्होंने नन्द किशोर ओझा, सुखराम सोलंकी(नन्दीशाला में योगदान), मंशाराम देवासी, भंवरलाल सारण बाजोली, रामनिवास खदाव, बाबुसिंह राजपूत, गणपत लाल सोनी खींवसर, कचरूराम गोदारा, अर्जुनराम मेघवाल, पेमाराम कड़वा, उमाराम भाबूं, हुक्माराम खड़काली, सुखराम, कु. पूजा विश्नोई पुत्री रामरतन विश्नोई श्रीबालाजी, मानाराम जाखड़, हरकरण बेडा जायल, नरेश सैन पशु-पक्षी प्रेमी, बलदेव सांखला, भींयाराम जावला, ओमाराम सांगवा साडोकन व शिव करण डेलू का प्रशंसा-पत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में मेला रिपोर्ट का पठन पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक श्री जगदीश प्रसाद बरवड़ ने किया। कार्यक्रम में मेले में सुव्यवस्था बनाने एवं विभिन्न आयोजनों में पशुपालन विभाग के अधिकारीयों व कर्मचारियों, मेलें में पशुपालकों को राज्य गतिविधियों की जानकारी के लिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के लिए उनके कार्मिक मितेश सोनी व मुनिराम को प्रशस्ति-पत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. मनोज बरवड़(जयपुर), उपनिदेशक पशुपालन डाॅ. जयपाल सिंह , पशु चिकित्सक डाॅ. शौकत अली, वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डाॅ. सुरेन्द्र चौधरी को भी सम्मानित किया गया। समारोह में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा, नागौर पंचायत समिति के पूर्व प्रधान ओमप्रकाश सैन, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक सुशील छाबड़ा, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डाॅ. गुलजार सहित पशुपालन विभाग के अन्य अधिकारी व कार्मिक मौजूद रहे।
पशुपालन विभाग की शासन सचिव डाॅ. आरूषी मलिक शनिवार को श्रीरामदेव पशु मेला के पारितोषिक वितरण समारोह में शिरकत करने के बाद मानासर स्थित श्रीनाथुराम मिर्धा ग्रामोथान चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से संचालित छात्रावास में गईं। यहां डाॅ. मलिक ने छात्रावास में रह रहे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी लक्ष्य बनाकर करने तथा प्रतिदिन डायरी मैंटेन करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं, उनसे गाइडेंस लें। डाॅ. आरूषी मलिक ने यहां छात्रावास में पुस्तकालय विकसित करने का सुझाव दिया तथा छात्रावास में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पांच जरूरतमंद बच्चों की सहायता अपने स्तर पर करने की घोषणा भी की। यहां विद्यार्थियों को अतिरिक्त जिला कलक्टर मनोज कुमार, पद्मश्री हिम्मताराम भांभू, उपखण्ड अधिकारी अमित चैधरी व बलदेवराम मिर्धा राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य एस.एल. जाखड़ ने भी विचार व्यक्त किए।

पशुपालन विभाग की शासन सचिव डाॅ. आरूषी मलिक ने खरनाल में निर्माणधीन वीर तेजाजी महाराज पैनोरमा को देखा और यहां पर अतिरिक्त जिला कलक्टर मनोज कुमार व अन्य जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के साथ पौधरोपण भी किया। इसके बाद डाॅ. मलिक ने खरनाल गांव में स्थित वीर तेजाजी महाराज के मंदिर भी दर्शन किए और धोक लगाई। उनके साथ उपखण्ड अधिकारी अमित चौधरी भी मौजूद रहे।
