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साध्वीश्री पावनप्रभाजी ने अपने उद्बोधन में क्षमा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कल क्षमापना का महत्वपूर्ण अवसर हमारे सामने है| हमारा जिस किसी के साथ भी कटु व्यवहार हो गया हो तो हमें आगे बढ़कर उससे अवश्य क्षमायाचना करनी चाहिए| उन्होंने “समता का समंदर” व्याख्यान के अंतर्गत भगवान् अरिष्टनेमि के जीवनकाल के प्रसंगों में मुनि गजसुकुमाल व मुनि मेघकुमार के प्रसंग सुनाये तथा भगवान महावीर को दिए गए उपसर्गों की जानकारी दी| उन्होंने उपस्थित तपस्वियों को प्रत्याख्यान करवाए| साध्वी श्री आत्मयशाजी व साध्वी श्री रम्यप्रभाजी ने मंगलाचरण किया| साध्वी श्री गौरवप्रभाजी, साध्वी श्री उन्नतयशा जी व साध्वी श्री अक्षयप्रभाजी तीर्थंकर परम्परा व आचार्य परम्परा आदि के बारे में अपने विचार व्यक्त किये | तेरापंथी सभा गंगाशहर के अध्यक्ष अमर चन्द सोनी ने उपस्थित सभी तपस्वियों का स्वागत व तपस्या का अनुमोदन किया| उन्होंने गंगाशहर जैन तेरापंथ समाज जनगणना कार्य के बारे में बताया|
