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vinay expresss news – Vinay Express https://vinayexpress.in खबर हमारी विश्वास आपका Wed, 13 Jul 2022 14:21:12 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 शिक्षा मंत्री डाॅ. कल्ला ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों का लिया जायजा https://vinayexpress.in/2022/07/13/taking-stock-of-the-preparations-for-the-proposed-tour-of-cm-ashok-gehlot/ Wed, 13 Jul 2022 14:20:56 +0000 https://vinayexpress.in/?p=39222 विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। शिक्षा मंत्री डाॅ. बी. डी. कल्ला ने मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के प्रस्तावित बीकानेर दौरे के मद्देनजर बुधवार को महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय और डाॅ. करणी सिंह स्टेडियम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।


इस दौरान जिला कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल, पुलिस अधीक्षक योगेश यादव, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति विनोद कुमार सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर (नगर) पंकज शर्मा, कुलसचिव यशपाल आहूजा, उप कुलसचिव डाॅ. बिट्ठल बिस्सा आदि मौजूद रहे।


महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में डाॅ. कल्ला ने हैलीपेड, आॅडिटोरियम, इंडोर स्पोर्ट्स काॅम्पलेक्स और अहिंसा पार्क का मुआयना किया। उन्होंने सभी इंतजाम माकूल रखने के निर्देश दिए। उन्होंने डाॅ. करणी सिंह स्टेडियम में पुर्नगठित शहरी जल योजना शिलान्यास समारोह की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बैठक, निकासी, पेयजल और प्रवेश सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को देखा।

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गोवा में परमाणु सक्षम ‘राफेल मरीन’ का INS विक्रांत के लिए किया गया परीक्षण https://vinayexpress.in/2022/01/08/new-delhi-49/ Sat, 08 Jan 2022 13:25:12 +0000 https://vinayexpress.in/?p=22495 विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने गोवा में आईएनएस हंसा में समुद्री लड़ाकू विमान ‘राफेल मरीन’ का परीक्षण किया है। नौसेना स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) विक्रांत के लिए समुद्री लड़ाकू जेट राफेल का एक बैच खरीदने की योजना बना रही है। भारत की जरूरतों के लिहाज से फ्रांसीसी कंपनी ने लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक परमाणु सक्षम ‘राफेल मरीन’ भेजा। पिछले महीने भारत यात्रा पर आईं फ्रांस की रक्षा मंत्री ने आईएसी के लिए जेट विमानों की आपूर्ति करने के संकेत दिए थे।

दिसंबर में भारत आईं फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने समुद्री विमानों की आपूर्ति के दिए थे संकेत

दिसंबर, 2021 में भारत की यात्रा पर आईं फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने कहा था कि उनका देश भारत को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत-प्रशांत एक बहुत विस्तृत क्षेत्र है और चीन के साथ संबंधों में तनाव के कारण इस बड़े क्षेत्र के पूर्वी हिस्से पर राजनीतिक ध्यान अधिक है। फ्रांस और भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के महत्वपूर्ण मुद्दों पर समान विचार साझा करते हैं। फ्रांस इंडो पैसिफिक में पड़ोसी देशों के साथ बहुपक्षीय संबंधों को विकसित करना चाहता है। इस रणनीति के केंद्र में भारत है।

फ्रांस ने समुद्र में लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक ‘राफेल मरीन’ भारत भेजा

फ्रांसीसी रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारतीय नौसेना के लिए समुद्री लड़ाकू जेट राफेल-एम देने की पेशकश की है। नौसेना भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत को अपने बड़े में शामिल करने से पहले रूसी मिग-29के को बदलना चाहती है। इसीलिए फ्रांस ने भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के साथ अपनी लड़ाकू क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए समुद्री लड़ाकू विमान राफेल-एम भेजा, ताकि स्की-जंप करने की क्षमता का प्रदर्शन किया जा सके।

नौसेना ने 2017 में 57 नए लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी कंपनियों को सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया था। तभी से कंपनी भारत में राफेल एम विमानों की क्षमता का प्रदर्शन करना चाहती है। आज हुए परीक्षण के दौरान राफेल एम ने आईएनएस हंसा, गोवा में तट-आधारित परीक्षण सुविधा (एसबीटीएफ) से उड़ान भरी। इससे पहले अमेरिकी कंपनी बोइंग इंडिया भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों के लिए अपने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान का आधिकारिक तौर पर अगस्त, 2021 में स्की जंप परीक्षण का प्रदर्शन कर चुकी है। कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक वीडियो में दिखाया गया है कि यूएस के नेवल एयर स्टेशन में पेटक्सेंट रिवर के किनारे सुपर हॉर्नेट शॉर्ट टेकऑफ अरेस्ट रिकवरी सिस्टम से सफलतापूर्वक लॉन्च हो रहा है। यह डेक आधारित लड़ाकू जेट आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत से भी लॉन्च किया जा सकता है।

भारतीय नौसेना मिग-29 का कर रही उपयोग

भारतीय नौसेना मौजूदा समय में मिग-29के का उपयोग कर रही है, लेकिन इन विमानों में रखरखाव, सेवा उपलब्धता और तकनीकी कठिनाई से संबंधित कई मुद्दे हैं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले एक वर्ष में तीन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। देश का पहला स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत फिलहाल समुद्री परीक्षण के अंतिम चरण में है और इसके गणतंत्र दिवस तक नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसलिए नौसेना इससे पहले आईएसी विक्रांत के लिए समुद्री लड़ाकू जेट राफेल का एक बैच खरीदने की योजना को अंतिम रूप देना चाहती है।

फाइटर जेट राफेल के मुकाबले ‘राफेल मरीन’ की खासियत

भारतीय वायुसेना के उपयोग में आने वाले राफेल जेट के समुद्री संस्करण ‘राफेल मरीन’ में एक अंडरकारेज और नोज व्हील, एक बड़ा अरेस्टर हुक, एक एकीकृत सीढ़ी जैसे कई अन्य मामूली अंतर हैं। स्की टेक-ऑफ के लिए राफेल-एम चार-पांच टन बाहरी भार (पूर्ण आंतरिक ईंधन के साथ) तक ले जा सकता है। कम आंतरिक ईंधन के साथ, यह मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर अधिक हथियार ले जा सकता है। इस प्रकार यह सभी भूमिकाओं को पूरा कर सकता है, जिसमें लड़ाकू हवाई गश्त, अवरोधन, एडी एस्कॉर्ट, साथ ही समुद्र और भूमि-हड़ताल पूर्ण आंतरिक ईंधन के साथ शामिल हैं। परीक्षण के लिए भेजा गया राफेल-एम भारत-विशिष्ट संवर्द्धन के साथ लड़ाकू का नवीनतम संस्करण है। परमाणु सक्षम राफेल-एम हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल उल्का, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें स्कैल्प और हैमर प्रिसिजन गाइडेड गोला बारूद ले जा सकता है।

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जानें बूस्टर डोज की कैसी है तैयारी और किन्हें दिया जाएगा यह टीका https://vinayexpress.in/2022/01/08/new-delhi-48/ Sat, 08 Jan 2022 13:17:51 +0000 https://vinayexpress.in/?p=22492 विनय एक्सप्रेस समाचार, नई दिल्ली। 3 जनवरी 2022 से देश में 15-18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया। वहीं अब आगामी ’10 जनवरी’ से देश में कोरोना वैक्सीन की ‘बूस्टर डोज’ लगाई जाएगी। इसे लेकर सारी तैयारियां कर ली गई हैं। याद हो पीएम मोदी ने कोरोना से सीधी लड़ाई लड़ रहे अग्रिम मोर्चे के कर्मियों (फ्रंटलाइन वर्कर्स) और हेल्थकेयर वर्कर्स को वैक्सीन की प्रिकॉशनरी डोज देने की बात कही थी। इसके साथ-साथ जो लोग 60 साल से ऊपर के हैं उन्हें वैक्सीन की तीसरी डोज यानि बूस्टर डोज दी जाएगी। गौरतलब हो देश के भीतर अभी तक 90 प्रतिशत व्यस्क जनता को पहली डोज दी जा चुकी है। वहीं 62 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें दोनों डोज दी जा चुकी है।

बता दें, भारत में तीसरी खुराक को बूस्टर डोज नहीं ‘एहतियाती खुराक’ कहा गया है। एहतियाती खुराक के निर्णय से स्वास्थ्य सेवा और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों का विश्वास मजबूत होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 10 जनवरी, 2022 से डॉक्टरों की सलाह पर सह-रुग्णता वाले 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एहतियाती खुराक लेने का विकल्प उपलब्ध होगा।

देश में कैसी है तैयारी?

जैसे-जैसे वायरस के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं, चुनौती का सामना करने की देश की क्षमता और आत्मविश्वास भी अभिनव भावना के साथ कई गुना बढ़ रहा है। आज देश में 18 लाख आइसोलेशन बेड, 5 लाख ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड, 1 लाख 40 हजार आईसीयू बेड, 90 हजार आईसीयू और नॉन आईसीयू बेड विशेष रूप से बच्चों के लिए, 3 हजार से ज्यादा पीएसए ऑक्सीजन प्लांट, 4 लाख ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। टीकाकरण और जांच तेज करने के लिए राज्यों को सहायता प्रदान की जा रही है।

किन्हें और क्यों दी जा रही बूस्टर डोज ?

’10 जनवरी’ से शुरू हो रही बूस्टर डोज प्रक्रिया में कोरोना वैक्सीन की एहतियाती खुराक अभी केवल फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स को ही लगाई जाएगी। इनकी संख्या करीब 3 करोड़ के आसपास है। इनके अलावा 60 साल से ऊपर के ऐसे बुजुर्ग जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें भी तीसरी डोज दी जाएगी। डॉक्टर से परामर्श लेकर बुजुर्ग तीसरी डोज ले सकते हैं। बता दें, बुजुर्गों को तीसरी डोज दिए जाने की यह क्रम 9 महीने अर्थात 39 सप्ताह का होगा। क्योंकि इन्हें सबसे ज्यादा खतरा है। फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थ केयर वर्कर्स कोरोना से सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे लोगों को वैक्सीन लगे कई महीने हो चुके हैं। क्योंकि देश में जब वैक्सीनेशन शुरू हुई थी तब भी सबसे पहले ही इन्हें ही वैक्सीन लगाई गई थी। समय के साथ इम्युनिटी कम होने लगती है। वहीं, कोरोना से बुजुर्गों को ज्यादा खतरा है। ऐसे बुजुर्ग जो किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनकी जान जाने का खतरा ज्यादा है। इसलिए इन्हें तीसरी डोज लगाई जा रही है।

कितने अंतर से लगेगी वैक्सीन की तीसरी डोज

सरकारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, बूस्टर डोज उन्हें दी जाएगी जिन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज लगे 9 महीने बीत गए हैं। मतलब यह है कि अगर आपने पिछले साल जनवरी से मार्च के बीच दूसरी डोज लगवाई होगी तो आप तीसरी डोज के पात्र होंगे।

कोई बीमारी नहीं, तब भी लगवा सकते हैं तीसरी डोज

अभी केवल उन्हीं बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाई जाएगी जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे बुजुर्ग अपने डॉक्टर की सलाह पर तीसरी डोज ले सकते हैं। इसके लिए ‘कोमोरबिडिटी सर्टिफिकेट’ जरूरी नहीं होगा।

कौन होंगे तीसरी डोज के पात्र

यदि आप तीसरी डोज के दायरे में आते हैं तो आपको सरकार की ओर से एक मैसेज भेजा जाएगा। जी हां, तीसरी डोज का यह मैसेज कोविन प्लेटफॉर्म की ओर से भेजा जाएगा।

कौन सी वैक्सीन दी जाएगी

बूस्टर डोज में वही वैक्सीन दी जाएगी जिसकी पहली दो डोज पात्र को लगी होगी। अगर पात्र ने पहली दो डोज कोवैक्सीन की ली होंगी तो तीसरी डोज भी कोवैक्सीन की ही लगेगी। इसी तरह अगर पहली दो डोज कोविशील्ड की लगवाई होगी तो तीसरी डोज भी कोविशील्ड की ही लगेगी।

कैसे होगा रजिस्ट्रेशन

बूस्टर डोज के लिए अब फिर से रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि कोविन पर आपका अकाउंट बन चुका है। अब बस मैसेज आने के बाद आप कोविन के जरिए बूस्टर डोज के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं।

बूस्टर डोज का सर्टिफिकेट भी मिलेगा

जैसे वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लगने पर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मिला है, ठीक उसी तरह बूस्टर डोज का सर्टिफिकेट भी मिलेगा। वैक्सीन की यह बूस्टर डोज बेहद जरूरी है। इसलिए इससे चूकिए मत। कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट ने इसकी जरूरत को और बढ़ा दिया है। यदि आप इसकी पात्रता के दायरे मे आते हैं तो इस वैक्सीन को जरूर लीजिए।

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घर-घर में औषधीय पौधों को उगाने में सहयोगी बनें बच्चे और अभिभावक -विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए आयोजित जागरूकता सत्र में बोले वक्ता https://vinayexpress.in/2021/07/11/forest-dept-news-raj/ Sun, 11 Jul 2021 13:05:47 +0000 https://vinayexpress.in/?p=11446 विनय एक्सप्रेस समाचार, जयपुर। घर-घर औषधि योजना के व्यापक प्रचार के उद्देश्य से राजस्थान की समृद्ध जैव विविधता और परंपरागत आयुर्वेदिक ज्ञान से विद्यार्थियों व अभिभावकों को जागरूक करने के लिए रविवार को जयश्री पेड़ीवाल ग्लोबल स्कूल की ओर से जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसमें वन विभाग, राजस्थान के अधिकारियों ने राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की जा रही घर-घर औषधि योजना के बारे में जानकारी देते हुए आह्वान किया कि घर-घर में औषधीय पौधों को उगाने और स्वयं को स्वस्थ रखने में बच्चे और अभिभावक मिलकर सहयोगी बनें।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने कहा कि विभिन्न शोधपत्रों से यह प्रमाणित है कि घर-घर औषधि योजना के तहत वितरित किए जाने वाले चारों औषधीय पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर हैं। इसलिए इन औषधीय पौधों को उत्साहपूर्वक उगाते हुये वैद्यों की सलाह से उपयोग करना कल्याणकारी रहेगा । उन्होंने आगे कहा कि यह कोई कोरा ज्ञान नहीं है बल्कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से स्वास्थ्य की मुस्कान लाने का ठोस विचार है।

डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने कहा कि योजना को अमलीजामा पहनाने में बहुत से लोगों ने शोध किया है, कइयों ने मेहनत की है और विशेषज्ञों के अनुभव के बाद तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा और कालमेघ के रूप में 4 औषधीय पौधे तैयार किए गए हैं। डॉ. पाण्डेय ने किसानों का जिक्र करते हुए बताया कि अगर किसान अपने बच्चों को खेती करना ना सिखाए तो हमें बाजार में खाने के लिये खाद्यान्न नहीं मिले। इसलिए बच्चों तक इन औषधीय पौधों को उगाने और रखरखाव की जानकारी और दादी-नानी के घरेलू उपचार के नुस्खे की जानकारी पहुंचाई जानी आवश्यक है। उन्होंने बच्चों से भी आह्वान किया कि वे इन पौधों के साथ बड़े हों। उनका ध्यान रखें। उन्हें जीवित रखें, समय-समय पर उनमें पानी देते रहें और उनका संरक्षण करें। धरती के चेहरे पर हरियाली की मुस्कान लाने के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक बताते हुये डॉ. पाण्डेय ने उम्मीद जताई कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से आमजन इसमें अपना सक्रिय सहयोग देंगे।

राजस्थान फॉरेस्ट्री एंड वाइल्ड लाइफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की अतिरिक्त निदेशक श्रीमती शैलजा देवल ने पहला सुख निरोगी काया की महत्ता और प्रजेंटेशन के जरिए घर-घर औषधि योजना की रूपरेखा बताते हुए स्कूल, विद्यार्थियों और बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की योजना में भूमिका बतलाई। श्रीमती देवल ने चित्रों के जरिए औषधीय पौधों की जानकारी देते हुए बताया कि इन पौधों को घरों में उगाने से पर्यावरण संरक्षण तो होगा ही, बच्चों तक भी परंपरागत ज्ञान पहुंचेगा और उनमें पर्यावरण संरक्षण को लेकर समझ विकसित होगी। श्रीमती देवल ने कहा कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम में भी इन पौधों की उपयोगिता प्राचीन काल से बनी हुई है। इन औषधीय पौधों के माध्यम से आयुर्वेद और परंपरागत ज्ञान को आम जन तक पहुंचाने के लिए राजस्थान सरकार ने घर-घर औषधि योजना शुरु की है।

इससे पहले, स्कूल प्रबंधन की ओर से श्रीमती कोमल किशनानी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का परिचय दिया। प्राचार्य श्रीमती मंजू खोसला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मेघा शर्मा, शिखा जैन सहित पूर्व-प्राथमिक स्तर से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी और उनके अभिभावक ऑनलाइन शामिल हुए।

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