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इस दौरान उनका विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनितिक संगठनों, मिडिया संस्थानों से जुड़े वरिष्ठ एवं कनिष्ठ पत्रकारों सहित शहर की आम जनता ने दिल खोलकर शर्मा का स्वागत सम्मान एवं सत्कार किया। मरूनगरी बीकानेर की जनता से मिले अपार प्यार व स्नेह को पाकर लोकेश शर्मा गदगद हुए और आत्मीयता के साथ शहर के प्रत्येक नागरिक का आभार प्रकट किया।

मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी लोकेश शर्मा ने लगभग 60 घंटे के अपने बीकानेर दौरे में दर्जनों कार्यक्रमों में शिरकत की। अनेक स्थानों पर उनका स्वागत सम्मान हुआ। आमजन, खासकर युवाओं में शर्मा के साथ फोटो और सेल्फी लेने का जुनून देखने लायक था। मानो पूरा शहर उनके स्वागत में पलक पावडे बिछा कर बैठा रहा। तीन दिनों के अपने दौरे में शर्मा ने जैसे ही जिले की सीमा में प्रवेश किया, उनके स्वागत और सम्मान का सिलसिला शुरू हुआ, जो तीसरे दिन उनकी वापसी तक जारी रहा।
Express Exclusive interview of Lokesh Sharma, OSD, CM Rajasthan with Vinay Express
खुद शर्मा ने भी बीकानेर को अपने बेहद नजदीक माना और कहा कि उन्हें सदैव यहां के लोगों का अपार स्नेह मिला है। उन्होंने होली से जुड़े कार्यक्रमों में शिरकत की तो युवाओं एवं खिलाड़ियों के साथ संवाद किया। हाल ही में दिवंगत हुए कांग्रेस परिवार के परिजनों से मिलकर सांत्वना दी और बताया कि दुःख की घड़ी में उनके साथ हैं। मोहता चौक से लेकर बारहगुवाड तक आमजन से मिले। सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। इनके प्रचार प्रसार का आह्वान किया और पात्र लोगों तक इनका लाभ पहुंचाने का आग्रह भी किया। शहर की तंग गलियों में बाइक पर घूमकर उन्होंने बीकानेर के प्रति अपने स्नेह को प्रकट किया।

अपने तीन दिवसीय बीकानेर प्रवास के दौरान युवा दिलों की धड़कन एवं कांग्रेस को सोशल मिडीया के माध्यम से राजस्थान के घर-घर पहूंचाने वाले आईटी एक्सपर्ट गुरू लोकेश शर्मा जी विनय एक्सप्रेस कार्यालय पधारें इस दौरान उन्होनें राजस्थान सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को लेकर वहां उपस्थित गणमान्य मेहमानों के साथ चर्चा की। इसके बाद आवाज के जादूगर एवं बीकानेर की शान ज्योति प्रकाश रंगा द्वारा लिए गए संक्षिप्त साक्षात्कार के दौरान शर्मा ने बड़ी बेबाकी से प्रत्येक प्रश्न का जवाब दिया एवं प्रदेशा की जनता को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जन हित से जुड़ी भावना से बड़ी सरलता से अवगत करवाया।

विनय एक्सप्रेस न्युज पोर्टल के संपादक विनय थानवी ने शर्मा के कार्यालय आने पर मारवाड़ी साफा पहनाकर एवं शॉल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया। थानवी ने कहा कि लोकश शर्मा द्वारा बड़ी ही सहजता के साथ कार्यालय आगमन के प्रस्ताव को न सिर्फ स्वीकार किया बल्कि बड़ी आत्मीयता से अमूल्य समय दिया, जैसे कोई घर का सदस्य ही कई दिनों बाद वापस घर आया हो, उनकी यही सरलता प्रदेश के युवा वर्ग के दिलों मे आपके और शासन के प्रति सकारात्मक छवि का निर्माण करती है ।

कुल मिलाकर अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान शर्मा ने शहर से जो दुलार पाया और युवा कार्यकर्ताओं के साथ जो स्नेह सांझा किया वह अविस्मरणीय रहा। तीन दिवसीय दौरे के दौरान शर्मा बीकानेर के रंग में रंगे नजर आए और इस स्नेह एवं प्यार को अमूल्य थाती बताया।
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जिला कलक्टर ने बताया कि एमसीएच विंग में 50 आईसीयू बैड के अलावा बच्चों के लिए आॅक्सीजन युक्त 100 बैड भी विकसित किए जाएंगे। इन वार्डों के लिए वेंटीलेटर, बाईपेप, पल्स आॅक्सीमीटर, विशेष मास्क सहित अन्य आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों तथा आॅक्सीजन सप्लाई से संबंधित चर्चा की गई। उन्होंने पीबीएम अधीक्षक को समूची व्यवस्थाओं की माॅनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डाॅक्टर्स की प्रभावी भूमिका के मद्देनजर जिले में दूसरी लहर पर प्रभावी अंकुश लग पाया है। अब तीसरी संभावित लहर को देखते हुए ‘टीम भावना’ के साथ काम किया जाए।

जिला कलक्टर ने कहा कि पीबीएम अस्पताल में विभिन्न मदों से बनने वाले आॅक्सीजन जनरेशन प्लांट का निर्माण एक महीने में करवाया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कोविड अस्पताल में वर्तमान में भर्ती मरीजों तथा उनकी स्थिति के बारे में जाना। इस दौरान नगर निगम आयुक्त एएच गौरी, मेडिकल काॅलेज प्राचार्य डाॅ. मुकेश चंद्र आर्य, पीबीएम अधीक्षक डाॅ. परमिंदर सिरोही, डाॅ. बी. के. गुप्ता, डाॅ. सुरेन्द्र वर्मा, मुकेश बेनीवाल, डाॅ. सोनाली, डाॅ. शंकर जाखड़, डाॅ. जीएस तंवर आदि मोजूद रहे।

थम्ब पूजन में मक्खन लाल व्यास, वल्लभ व्यास, श्रीकांत व्यास, कानू लाल व्यास, उमेश व्यास, शिव शंकर व्यास , विष्णु कांत व्यास, गिरधारी व्यास, सोनाराम व्यास राजकुमार व्यास, अजय कुमार पुरोहित, गिरिराज चुरा , दर्शील व्यास, केशव व्यास , तेजू, द्वारका दास व्यास , गोविंद आदि उपस्थित रहें।

मार्केटिंग कौशल, उत्पाद स्थिति, मूल्य निर्धारण रणनीति व उपभोक्ता व्यवहार को आभासी से वास्तविक तौर पर समझने के लिए अभियांत्रिकी महाविद्यालय बीकानेर के एमबीए प्रथम के वर्ष के छात्रों ने “मार्केटिंग सिमुलेशन” नवाचार के तहत महाविद्यालय में ही एक दिन की अलग-अलग कंपनियों के उत्पादों की दुकान लगा कर शिक्षकों, विद्यार्थियों व महाविद्यालय के कर्मचारियों को सत्रह हज़ार रुपयों के उत्पादों की बिक्री कर सृजनता का परिचय दिया l
इस मौके पर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन कर प्राचार्य जय प्रकाश भामू ने कहा कि सृजनता व नवाचार ही शिक्षा का मूल है, उद्यमिता सीखने के लिए किसी भी उत्पाद के प्रोडक्ट, प्राइस, प्लेस व प्रमोशन मिक्स को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है l कार्यक्रम संयोजक डॉ विजय शर्मा ने विद्यार्थियों से इस सिमुलेशन के माध्यम के द्वारा मार्केटिंग और सेलिंग की नई तकनीको और रणनीति को सीखने पर बल दिया l उन्होंने बताया की इस कार्यक्रम हेतु पतंजलि, डाबर व हिमालय के विभिन्न उत्पादों को लेकर तीन टीमें गठित की गयी तथा उन्हें उत्पादों को बेचने हेतु पांच घंटे का समय दिया गया l
कार्यक्रम में इन विद्यार्थियों की रही भागीदारी
यशवी बंसल, सौरभ परिहार, मुरली रंग, मंगल रामावत, पूजा राठौर, अभय करण, हिमांशी रावत, प्राची, नफीस अहमद, चिराग बंसल, भवानी राजपुरोहित, अनुराग गौतम, रक्षित सेठिया, अजीत जोर्ज, फैसल खान इत्यादि
ये संकाय सदस्य रहे शामिल
डॉ. ऋचा यादव, डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. अवधेश व्यास, डॉ. विजय मोहन, डॉ. मनोज कुड़ी, डॉ. शौकत अली, डॉ. ओम प्रकाश जाखड, डॉ. महेंद्र व्यास, डॉ. चक्र्वर्तिनारायण श्रीमाली, डॉ. निशा, डॉ. राधा माथुर, डॉ. प्रीती नरुका, डॉ. शिवांगी बिस्सा इत्यादि ने प्रतिभाग किया l

2. पहले जानें क्या है हेल्थ इंश्योरेंस ?:- मार्केट में कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां मौजूद हैं, जो एक तय प्रीमियम के भुगतान पर आपको हेल्थ कवर देती हैं। यानी आपके बीमार होने पर या किसी आकस्मिक सर्जरी के लिए ये कंपनियां उस तय प्रीमियम के एवज में पूर्ण अथवा आंशिक मेडिकल खर्च वहन करती हैं। हालांकि यह खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आपने
कितनी राशि वाला कवर लिया हुआ है। कुछ हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां
पॉलिसीधारक द्वारा इलाज के बाद क्लेम किए जाने पर पॉलिसी की तय राशि का भुगतान करती हैं तो कुछ पॉलिसीधारक के एक भी पैसा खर्च किए बिना शुरू से ही मेडिकल खर्च वहन करती हैं। हेल्थ इंश्योरेंस के दो प्लान बेसिक और टॉप अप उपलब्ध हैं। बेसिक प्लान में हर साल कवर की राशि समान रहती है. वहीं टॉप अप प्लान में अगर आप किसी साल हेल्थ इंश्योरेंस का अमाउंट क्लेम नहीं करते हैं तो अगले साल समान प्रीमियम के भुगतान पर कवर की राशि एक तय प्रतिशत के साथ बढ़ जाती है। इंश्योरेंस लगातार क्लेम न होने पर कवर साल दर साल बढ़ जाता है।

3.हेल्थ इंश्योरेंग /स्वास्थ्य बीमा के प्रकार
1. व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी: इस इंश्योरेंस प्लान में केवल उसी
व्यक्ति के इलाज का खर्च बीमा कंपनी उठाती है, जिसने हेल्थ इंश्योरेंस
लिया है। इस प्लान में हर व्यक्ति अपना अलग-अलग हेल्थ इंश्योरेंस ले सकता है। इस प्लान में हॉस्पिटल का खर्चा, डॉक्टर की फीस, इलाज का खर्चा,
भर्ती होने से पहले और उसके बाद के सभी खर्चें शामिल किए जाते हैं।
इंश्योरेंस की सम इंश्योर्ड वैल्यू के हिसाब से प्रीमियम तय होता है। ये
प्लान आपके लिए तब सही है, जब आप सिर्फ अपना इंश्योरेंस करा रहे हैं और
आपके माता-पिता या किसी अन्य सदस्य का पहले ही एक अलग हेल्थ इंश्योरेंस है।
2. फैमिली फ्लोटर पॉलिसीः इस प्लान में पूरी फैमिली के लिए एक ही हेल्थ
इंश्योरेंस कवर होता है। पूरे परिवार के लिए एक ही हेल्थ इंश्योरेंस लेने
से आप अलग-अलग प्रीमियम भरने के झंझट से बच जाते हैं। इस प्लान में आपके माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों के इलाज का खर्चा एक हेल्थ इंश्योरेंस के अंदर कवर हो जाता है। कुछ बीमा कंपनियां अन्य परिवारी जनों जैसे भाई-बहन, पोता-पोती, सास-ससुर आदि को भी कवर करती हैं।
3. सीनियर सिटीजन पॉलिसीः ये कवर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए ठीक रहेगा। बढ़ती उम्र के साथ अपनी सेहत का ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। ये इंश्योरेंस 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्तियों के लिए है इसलिए इस प्लान इसी उम्र को ध्यान में रखकर सभी सुविधाएं मिलती है। सीनियर सिटीजन द्वारा हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर उन्हें टैक्स में डिडक्शन भी मिलता है।
4. यूनिट लिंक्ड हेल्थ प्लान्सः इसके तहत आप हेल्थ इंश्योरेंस को निवेश
का जरिया भी बना सकते हैं। यानी स्वास्थ्य की सिक्योरिटी के साथ-साथ
रिटर्न पाने का भी माध्यम कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां यूनिट लिंक्ड
हेल्थ प्लान्स की पेशकश करती हैं। इनका रिटर्न स्टॉक मार्केट की
परफॉरमेंस पर निर्भर करता है।
5. मातृत्व योजनाएंः कुछ बीमा कंपनियां सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस प्लान
में मैटरनिटी कवर यानी मातृत्व स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध नहीं कराती हैं।
हालांकि कुछ बीमा कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस लेने के 4 साल के बाद
मैटरनिटी को कवर करती हैं। ऐसे में अलग से मिलने वाली मातृत्व स्वास्थ्य
बीमा योजना मातृत्व और अन्य अतिरिक्त खर्चों के लिए कवरेज प्रदान करती
है। ये पॉलिसी डिलीवरी से पहले और डिलीवरी के बाद मां और बच्चे दोनों की
देखभाल से जुड़े खर्चे कवर करती है।
6. क्रिटिकल इलनेस कवरः सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में आम तौर पर
गंभीर बीमारियां जैसे दिल का दौरा, कैंसर, स्ट्रोक, ऑर्गन ट्रांसप्लांट,
किडनी फेल्योर आदि कवर नहीं होती हैं। गंभीर बीमारियां क्रिटिकल इलनेस
कवर के तहत कवर होती हैं. इसके कवर के तहत आने वाली गंभीर बीमारियों के डायग्नोस्टिक पर एकमुश्त लाभ राशि का भुगतान किया जाता है।
7. अस्पताल दैनिक नकद लाभ योजनाएंः इसके तहत लिए गए कवर के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने के हर दिन के लिए एक निश्चित लिमिट तक कैश दिया जाता है। यह हॉस्पिटलाइजेशन खर्च से अलग होता है।
4.स्वास्थ्य बीमा पाॅलिसी खरीदते समय स्वास्थ्य बीमा के प्रकार और ध्यान
रखने योग्य बातें

हेल्थ इंश्योरेंस क्या कवर करते हैं ?
1 बीमारी या दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित मेडिकल
खर्च, जो 24 घंटे से अधिक की अवधि के लिए है।
2 मेडिकल खर्च जो अस्पताल में भर्ती होने से पहले के दिनों के दौरान
बीमारी के कारण होता है।
3 मेडिकल खर्च जो अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पर हो रहे इलाज के
लिए एक निश्चित अवधि के लिए होता है।
4 उपचार के लिए मेडिकल खर्च, जो टेक्नोलॉजिकल प्रगति के कारण 24 घंटे
अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता नहीं होती।
5 आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी का उपयोग करके किया गया उपचार।
ये चीजें नहीं होती स्वास्थ्य बीमा के तहत कवर
1 हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले की मेडिकल स्थितियां या बीमारियां।
हालांकि, स्वास्थ्य बीमा प्रदाताओं ने दो से चार साल के बीच प्रतीक्षा
अवधि के रेंज के बाद
2 पहले से मौजूद मेडिकल स्थितियों के लिए कवरेज प्रदान करना शुरू कर दिया है।
3 कॉस्मेटिक सर्जरीः हालांकि, दुर्घटनाओं के बाद की जाने वाली कॉस्मेटिक
या प्लास्टिक सर्जरी कई स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में कवर है.
4 हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले व्यक्ति द्वारा जानबूझकर खुद को नुकसान
पहुंचाने के मामले में कवर नहीं किया जाता है. इसलिए आत्मघाती प्रयास के
दौरान हुई चोट कारण किसी भी बीमा प्रदाता द्वारा स्वास्थ्य बीमा योजना में कवर नहीं हैं।
5 थैरेपी कवर नहीं होती हैं, जैसे एक्यूपंक्चर, नैसर्गिक चिकित्सा,
चुंबकीय थेरेपी और थेरेपी के वैकल्पिक रूप।
विनय थानवी
8696352873
vinaythanvi07@gmail.com
लेखक सामाजिक चिंतक और स्वास्थ्य बीमा मामलों के जानकार हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. बीएल मीना ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग कोरोना महामारी से बचाव के प्रति आमजन हेतु लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है।
विनयएक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने कहा कि कोविड केयर सेन्टर के रूप में निजी अस्पतालों सहित अन्य ऐसे भवन, जहां 200 से अधिक व्यक्तियों को एक साथ रखकर उपचार किया जा सकता हो, ऐसे सार्वजनिक भवनों का चिन्हीकरण किया जाएगा, साथ ही पीबीएम अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों को कोरोना रोकथाम के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे माईक्रो स्तर पर कार्यों में गुणात्मक सुधार आ सके और मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा सुलभ करवाई जा सकें। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सक कोराना संक्रमण काल में पूर्ण मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य कर रहे हैं। वे सभी वर्तमान परिस्थितियों में अब प्रो-एक्टिव होकर कार्य करें।
गौतम सोमवार को अपने कक्ष में कोविड रोकथाम के संबंध में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में बोल रहे थे। बैठक में पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा, प्राचार्य सरदार पटेल मेडिकल काॅलेज डाॅ. एस.एस. राठौड़, आयुक्त नगर निगम डाॅ. खुशाल यादव, अधीक्षक पी.बी.एम. अस्पताल डाॅ. मोहम्मद सलीम, अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) ए.एच.गौरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.बी.एल.मीणा, सचिव नगर विकास न्यास मेघराज सिंह मीणा, डाॅ. संजय कोचर, डाॅ. इन्द्रा प्रभाकर तथा महामारी रोकथाम विशेषज्ञ नीलम प्रताप सिंह उपस्थित थे। जिला कलक्टर ने कहा कि कोविड केयर सेन्टर सहित पीबीएम अस्पताल की संपूर्ण व्यवस्थाओं की अलग-अल जिम्मेदारी वरिष्ठ चिकित्सकों अलग-अलग सौंप दी जाए।अलग-अलग जिम्मेदारी हो जाने से कार्य सुगमता से होगा तथा अगर किसी कार्य में गुणात्मक सुधार करना हो या किसी तरह की खा़मी को दूर करना हो, तो संबंधित चिकित्सक से विचार विमर्श कर तत्काल निर्णय लिया जा सके।
जिला कलक्टर व जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि कोविड केयर सेन्टर में जितने भी गंभीर रोगी भर्ती हैं, उन्हें एक काॅर्डलैस बैल(घंटी) का रिमोट उपलब्ध करवाया जाए तथा बैल अस्पताल के एक कमरे में रहे, जहां से किसी भी विपरीत परिस्थिति पर अगर मरीज घंटी बजाता है, तो उसे तत्काल उपचार की सुविधा के लिए चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ पंहुच सके तथा रात के समय अगर मरीज बाथरूम की तरफ जाए, तो रिमोट अपने साथ रखे, जिससेेेे जरूरत पड़ने वह स्टाफ को बुला सके और उस तुरंत मदद उपलब्ध करवाई जा सके।
वाॅलन्टियरी सेवा भी ली जाएगी
गौतम ने प्राचार्य मेडिकल काॅलेज और अधीक्षक से कहा कि वे इन संभावनाओं पर भी कार्य करें कि अगर कोई व्यक्ति या संस्थान पैरा मेडिकल सेवाएं वाॅलन्टियरी देना चाहें, तो उनका चिन्हीकरण कर लिया जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर उनकी सेवाएं ली जा सकें। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति या संस्था अस्पताल में भर्ती रोगियों के लिए भोजन आदि देना चाहें, तो उन्हें भी सूचीबद्ध कर लिया जाए।
जिला कलक्टर ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कोविड केयर सेन्टर के लिए चिन्हीकरण का कार्य मंगलवार 30 जून तक आवश्यक रूप से कर सूची जिला प्रशासन को उपलब्ध करवा दें, जिससे जरूरत के मुताबिक आवश्यक सुविधा और संसाधन का इंतजाम किया जा सके। स्थान चिन्हीकरण के समय इस बात को प्राथमिकता दी जाए कि आस-पास एक साथ ऐसे एक से अधिक भवन बने हों, ताकि चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया करवाने में आसानी रहे।
जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि जितने भी निजी चिकित्सालय हैं, उनके प्रबन्धकों से बातचीत कर उन्हें बताया जाए कि जरूरत पड़ने पर यहां भी कोरोना रोगियों को ईलाज के लिए भर्ती करवाया जा सकता है। साथ ही अगर कोई निजी चिकित्सालय किसी होटल में चिकित्सकीय सुविधा के लिए कोलेब्रेशन करता है, तो इस पर भी विचार कर लिया जाए जिससे यदि कोई व्यक्ति यहां इलाज करवाना चाहे तो उसेेेे इलाज की सुविधा मिल सके।
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इस आदेश के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव, रोकथाम, इसके संक्रमण की श्रंखला को जांच, उपचार तथा इसके संक्रमण से होने वाली मृत्यु को न्यूनतम किये जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी सम्भव प्रयास निरन्तर किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 20 राजकीय चिकित्सा संस्थानों में कोविड-19 की जांच निःशुल्क की जा रही है तथा एनएबीएल मान्यता प्राप्त एवं आईसीएमआर से अनुमोदित 4 निजी जांच प्रयोगशालाओं में कोविड- 19 की जांच की जा रही है ।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि आईसीएमआर के निर्देशों पर निजी जांच प्रयोगशालाओं में कोविड की जांच की उच्चतम सीमा 4500 रूपए प्रति जांच निर्धारित की गई थी। देश में ही आरटी-पीसीआर टेस्टिंग किट के विनिर्माण एवं सहज उपलब्धता तथा आमजन को कम कीमतों पर सहज एवं सुलभ जांच सुविधा उपलब्ध कराने को दृष्टिगत रखते हुए सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, निजी मेडिकल कॉलेजों, निजी अस्पतालों, निजी जांच प्रयोगशालाओं के प्रतिनिधियों एवं विषय-विशेषज्ञों के साथ विचार – विमर्श के उपरान्त, आरटी-पीसीआर किट एवं अन्य उपभोग्य की दरों तथा अन्य राज्यों द्वारा कोविड की जांच हेतु निर्धारित की गई दरों और राजस्थान महामारी अध्यादेश, 2020 की धारा 4 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा राज्य में एनएबीएल मान्यता प्राप्त एवं आईसीएमआर से कोविड- 19 जांच हेतु अनुमोदित निजी जांच प्रयोगशालाओं में कोविड-19 की आरटी-पीसीआर जांच की अधिकतम दर 2200 रूपए ( जीएसटीध्सभी कर सहित) निर्धारित की गई है।

मान्यता प्राप्त एवं आईसीएमआर से कोविड – 19 जांच हेतु अनुमोदित निजी प्रयोगशालाओं द्वारा सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए जांच किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। राजस्थान युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अरुण व्यास के नेतृत्व मैं आज जिला पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा को “कोरोना योद्धा” मोमेंटो भेंट कर सम्मान किया ज्ञापन। इस अवसर पर युवा नेता अरुण व्यास ने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक महोदय इस विपदा मैं स्वंय फील्ड मैं दिन-रात लगे हुए रहें है एवं आमजन की सेवा के जज्बे से कार्य करते हुए बीकानेर को कोरोना मुक्त करने के सार्थक प्रयास किये है अतः उन्हें यह मोमेंटो प्रदान करना हमारे लिए बेहद गर्व की बात है एंव राजस्थान युवा कांग्रेस उन्हें दिल से सेल्यूट करती है। इस अवसर पर पार्षद दुर्गादास छंगाणी, पार्षद मनोज विश्नोई, पार्षद प्रफ्फुल हटिला, युवा कांग्रेस के नरनारायण स्वामी व रविकांत वाल्मीकि आदि उपस्थित रहे।
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आत्मनिर्भर भारत विजन के लिए मोदी सरकार की तरफ से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण तथा वित्तराज्य मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा प्रेस कान्फ्रेस के माध्यम से प्रथम भाग देश की जनता के समक्ष पेश किया गया। सीए अनुराग शर्मा ने अपने विश्लेषण में बताया कि यह एक तरह से वार्षिक बजट जितना ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकार द्वारा अपने नीतिगत निर्णय एवं विजन को बताया गया है।
भारत सरकार ने अपने राहत पैकेज की ब्रीफिंग राजनितिक प्रचार की तरह शुरू किया इसके अंतर्गत पहले प्रदान की गई लाॅकडाउन की छूट को बताया बाद में एमएसएमई सेक्टर हेतु छः प्रकार की मुख्य घोषणाएँ की गई।

1. 3 लाख करोड़ रूपये के बगैर किसी कोलेट्रल सिक्योरिटी के ऋण की घोषणा की गई जो 4 वर्ष की अवधि के लिए दिये जाएगें जिसमें पहले 12 माह तक कोई मूलधन जमा करवाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी।
2 20 हजार करोड़ रूपयों के ऋण का प्रावधान तनावग्रस्त एमएसएमई इकाईयों के लिए किया गया।
3. 50,000 करोड़ रूपयों के ऋण का प्रावधान एमएसएमई के ग्रोथ के लिए किया गया।
4. एमएसएमई की परिभाषा में परिवर्तन कर उत्पादन एवं सेवा इकाईयों की निवेश सीमा को समान कर इसमें टर्नऑवर की नई सीमा डाल दी गई। जिसमें सुक्ष्म उद्योग हेतु निवेश सीमा 1 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 5 करोड़ है। इसमें लघु उद्योग हेतु निवेश सीमा 10 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 50 करोड़ है तथा मध्यम उद्योग हेतु निवेश सीमा 20 करोड़ और टर्नऑवर सीमा 100 करोड़ है।
5. सरकारी टेण्डर्स जो 200 करोड़ रूपये तक के है जिनमें ग्लोबल सेक्टर की जगह एमएसएमई को अवसर प्रदान किया गया है।
6. एमएसएमई के लिए ई मार्केट लिंकेज को प्रमोट किया जाएगा और सरकार 45 दिवस में एमएसएमई सेक्टर्स से जुडे उद्योगपतियों को भुगतान कर देगी

1.जिन्हें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत (15000 रूपये तक वेतन वाले 100 मजदुरों तक वाले उपक्रम) 12 प्रतिशत कर्मचारी व 12 प्रतिशत नियोक्ता का मार्च अप्रेल व मई का भुगतान सरकार द्वारा किया गया था उन्हें अतिरिक्त तीन माह अर्थात जून जुलाई व अगस्त का पीएफ का भुगतान भी सरकार वहन करेगी। इसके लिए भारत सरकार ने 2500 करोड़ रूपयों का प्रावधान किया है।
2. अन्य कर्मचारियों के लिए कर्मचारी व नियोक्ता दोनों का ईपीएफ का भुगतान 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इससे 6750 करोड़ का अतिरिक्त लिक्विडिटी का सहयोग प्राप्त होगा।

1. 30 हजार करोड़ की विशेष लिक्विडिटी स्कीम के तहत सरकार द्वारा गारंटेड ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा
2. आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत इन संस्थाओं का प्रथम 20 प्रतिशत नुकसान सरकार वहन करेगी

पीएफसी/आरईसी द्वारा 90 हजार करोड का फंड उपलब्ध करवाया जाएगा।

केन्द्र सरकार से जुड़ी एजेन्सीयों द्वारा ठेकेदारों को कार्य पुरा करने हेतु छः माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा तथा आंशिक पूर्ण हुए कार्यों पर बैंक गारंटी भी प्रदान की जाएगी।

रेरा के तहत प्रोजेक्ट्स पर रजिस्ट्रेशन व कार्य पूर्ण करने के समय में छः माह का अतिरिक्त समय सीमा प्रदान की गई है।

1. टीसीएस व टीडीएस (कर्मचारी की आय पर लगने वाले टीडीएस के अतिरिक्त) की दरें 25 प्रतिशत से कम कर दी गई अर्थात पहले जिस पर 10 प्रतिशत टीडीएस कटता था अब 7.5 प्रतिशत ही कटेगा। यह प्रावधान 14 मई 2020 से 31 मार्च 2021 तक प्रभावी रहेगा।
2. बचे हुए आयकर रिफंड तुरंत जारी किये जाएगें
3. वित्तिय वर्ष 2019-2020 (कर निर्धारण वर्ष 2020-21) के आयकर रिटर्न की जमा करने की अंतिम तिथि समस्त करदाताओं के लिए बढ़ाकर 30 नवम्बर 2020 कर दी गई है।
4. टैक्स ऑडिट करवाने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 की गई है।
5. जो कर निर्धारण 30 सितम्बर 2020 तक निपटान करने थे उन्हें बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 किया गया है । और जो कर निर्धारण 31 मार्च 2021 तक निपटान करने थे उन्हें बढ़ाकर 30 सितम्बर 2021 किया गया है।
6. विवाद से विश्वास स्कीम में बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के टैक्स जमा करने की दिनांक को बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 किया गया है।

ये बहुप्रतीक्षित उपाय अर्थव्यवस्था को निःसंदेह प्रोत्साहन देने वाले है और ये उपाय अगर लाॅकडाउन के बगैर भी किये जाते तो भी बहुत प्रासंगिक होते।
ये उपाय लाॅकडाउन से बाहर निकलते समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत कारगर साबित होगें । चुंकि अभी तक सरकार द्वारा आर्थिक पैकेज की पूरी घोषणा नहीं की गई है, फिर भी कुछ बिन्दु वर्तमान में विचारणीय है:-
1. सरकार ने एमएसएमई सेक्टर की लिक्विडिटी पर ध्यान दिया है पर उन्हें कोई सब्सिडी छूट अथवा ब्याज मुक्त कर्ज नहीं दिया। यह प्रोत्साहन कर्ज के रूप में है जो ब्याज सहित वसूला जाएगा। और ब्याज कितना देना होगा इस पर भी सरकार द्वारा कोई टिप्पणी नहीं कि गई ।
2. भारतीय बाजारों की सप्लाई चैन जिसमें थोक व खुदरा व्यापारी आते हैं। इनका बडी संख्या में हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान रहता है। इन व्यापारियों को अभी तक एमएसएमई की परिभाषा से बाहर रखा गया है। तथा अलग से इनके बारे सरकार द्वारा में कोई विचार नहीं किया गया है।
3. इस आर्थिक राहत पैकेज को लागू करने में लगने वाले धन के स्त्रोत के बारे में जानकारी प्रदान नहीं की गई।