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water – Vinay Express https://vinayexpress.in खबर हमारी विश्वास आपका Tue, 22 Mar 2022 14:48:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 जल को बचाए बिना संभव नहीं होगा आगामी पीढ़ियों का जीवन https://vinayexpress.in/2022/03/22/life-of-future-generations-will-not-be-possible-without-saving-water/ Tue, 22 Mar 2022 14:48:23 +0000 https://vinayexpress.in/?p=26224 विनय एक्सप्रेस समाचार, चूरू। राजकीय लोहिया महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग में विश्व जल संरक्षण दिवस पर मंगलवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ शेर मोहम्मद की अध्यक्षता में हुुई इस सेमिनार में विभाग सदस्यों डॉ प्रशांत शर्मा, मुकेश मीणा एवं आशीष शर्मा के अलावा स्नातकोत्तर पूर्वार्ध एवं उत्तरार्ध के विद्यार्थियों ने भाग लिया। डॉ शेर मोहम्मद ने इस अवसर पर जल के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जल ही जीवन है। जल के बिना हमारा जीवन संभव नहीं हो पाएगा। पूरे विश्व में 70 प्रतिशत भाग पर जल पाया जाता है लेकिन पीने योग्य पानी कितना है, यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है। विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जो थीम इस वर्ष के लिए दी गई है, वह है – भूजल के बारे में, जो अदृश्य पानी है उसको दृश्य वान बनाना, कि किस तरह से जो भूजल है हमारा उसकी हम पहचान करें और किस प्रकार काम लाने योग्य बना सकते हैं। डॉ मोहम्मद ने बताया कि अगर जल रहेगा तभी हम लोग इस दुनिया में जीवित रह पाएंगे अन्यथा जैसा कि कहा जा रहा है तीसरा विश्वयुद्ध भी पानी के लिए ही होगा। विभाग सदस्य  मुकेश मीणा ने जल संरक्षण विषय पर प्रकाश डाला और जल के संरक्षण की अलग-अलग विधियां उन्होंने बताई । उतराद्र्ध की  छात्रा प्रिया सोनी ने बताया कि पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग जल से घिरा है, किंतु पीने योग्य जल की मात्रा केवल 2 प्रतिशत है। छात्रा मुस्कान स्वामी ने बताया कि वर्तमान में बढ़ती जनसंख्या के कारण जल स्रोत कम होते जा रहे हैं जिसके कारण जल की मात्रा में निरंतर कमी होती जा रही है, जल स्तर घटता जा रहा है । छात्रा प्रतिभा पारीक ने वर्षा के जल को संरक्षण करने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से ही राजस्थान में परंपरागत स्रोतों जैसे कुएं, बावड़ी, टांके, तालाब आदि के द्वारा जल को संरक्षित किया जाता रहा है और वर्तमान में भी वर्षा के पानी को जमा करने के साधनों से जल संरक्षित किया जा सकता है। अधिकाधिक वृक्षारोपण करके भूजल स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए। सेमिनार में सौरव शर्मा ने जल संरक्षण दिवस की भूमिका पर बताया। अन्नपूर्णा ने कविता के माध्यम से जल के महत्व को समझाया।  टीना, पिंकी, जितेंद्र सिंह, रामदयाल,  सोमवीर जांगिड़,  फिरदोस, नीतू, प्रियंका, गुंजन, हेमलता और जितेंद्र कुमार ने भी अलग-अलग जल के आयामों पर अपना सेमिनार दिया। इस सेमिनार में उतराद्र्ध और पूर्वाद्र्ध के विद्यार्थियों के अलावा बीएससी पार्ट प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।  विभाग सदस्यों  डॉ प्रशांत शर्मा और आशीष शर्मा ने भी अपने विचार प्रकट किए।

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जिले में भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जावें – जिला कलक्टर : अटल भू जल योजना की जिला स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न https://vinayexpress.in/2022/03/22/special-efforts-should-be-made-to-increase-the-ground-water-level-in-the-district-district-collector/ Tue, 22 Mar 2022 14:23:42 +0000 https://vinayexpress.in/?p=26215 विनय एक्सप्रेस समाचार, जैसलमेर। जैसलमेर जिले में विश्व जल दिवस पर जिला कलक्टर डॉ. प्रतिभा सिंह के मुख्य आतिथ्य एवं जिला प्रमुख प्रतापसिंह सोलंकी की अध्यक्षता में मंगलवार को डीआरडीए सभागार में अटल भूजल योजना के तहत भू जल सरक्षण और जल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘‘भूजल अदृश्य को दृश्यमान बनाना‘‘ विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला में उप जिला प्रमख डॉ. बी.के. बारूपाल, पंचायत समिति सम के प्रधान तन सिंह सोढ़ा, जैसलमेर प्रधान श्रीमती रसाल कंवर, मोहनगढ़ प्रधान श्रीमती कृष्णा चौधरी, पूर्व जिला प्रमुख एवं महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अंजना मेघवाल, अधीक्षण भू जल वैज्ञानिक डॉ विमल सोनी, जैसलमेर विकास समिति के सचिव सी पी व्यास, अधीक्षण अभियंता दिनेश नागोरी, विकास अधिकारी, सरपंच गण, विभागीय अधिकारियों के साथ ही अन्य सम्भागी उपस्थित थे।

जिला कलक्टर ने सम्भागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिले में भूजल के गिरते स्तर को पुनः कैसे बढ़ाया जा सके, उसके लिए विशेष कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अटल भूजल योजना में जिले की तीन समितियां एवं उनकी ग्राम पंचायते चयनित की गई है, उनमें भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके साथ ही जिले में जल के हो रहे दोहन को भी कम करने के लिए लाईन डिपार्टमेंट को सहयोग लेकर ठोस कदम उठाने पर बल दिया।

जिला प्रमुख प्रतापसिंह सोलंकी ने विश्व जल दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि जैसलमेर वासियों को पानी के महत्व की बखूबी जानकारी है एवं यहां के लोगों ने पानी को घी से भी अधिक महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नलकूपों से हो रहे जल के दोहन से दिनो-दिन भूजल का स्तर गिर रहा है, जो हम सबके लिए चिन्तनीय है। उन्होंने कार्यशाला में भूजल स्तर बढ़ाने के सम्बन्ध में विशेषज्ञों द्वारा जो जानकारी दी जाएगी, उसको फील्ड में क्रियान्विति कर जल को बढ़ाना है।

उप जिला प्रमुख डॉ. बी.के. बारूपाल ने कहा कि जल ही जीवन है एवं जल के बिना कल नहीं है। उस थीम को ध्यान में रखते हुए हमें जल के उपयोग को समझना होगा एवं इस क्षेत्र में कम से कम पानी का दोहन करना होगा तभी हम आने वाली पीढ़ी के लिए जल को बचा पाएगे। कार्यशाला के प्रारम्भ में अधीक्षण अभियंता जलदाय दिनेश नागौरी ने सभी अतिथियों एवं सम्भागियों का स्वागत किया। भूजल वैज्ञानिक डॉ. एन.डी. ईणखियां ने अटल भूजल योजना के तहत जिले में भूजल स्तर को बढ़ाने के सम्बन्ध में की जाने वाली गतिविधियों पर प्रकाश डाला तथा अटल भू जल योजना की अब तक की प्रगति के बारे में पावर पॉइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से जानकारी प्रदान की।

नोडल अधिकारी ने बताया की भू जल विभाग अपने सिमित संसाधनों के साथ योजना की हर गतिविधि को प्रभावी ढंग से पूरा करने का प्रयास कर रहा है। योजना के तहत जिले के 41 जल सुरक्षा प्लान तैयार कर राज्य इकाई को प्रेषित किये जा चुके है। कार्यक्रम के अंत में भू जल वैज्ञानिक रिशेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया। संचालन बराई दीन संवारा द्वारा किया गया।

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सब मिलकर करो सहयोग, पानी का न करो दुरूपयोग : विश्व जल दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजित https://vinayexpress.in/2022/03/22/everyone-cooperate-together-do-not-misuse-water/ Tue, 22 Mar 2022 13:36:06 +0000 https://vinayexpress.in/?p=26201 विनय एक्सप्रेस समाचार, जोधपुर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान माह मार्च के निर्देशानुसार मंगलवार, 22 मार्च को जोधपुर मुख्यालय पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर जिला की सचिव पूर्णिमा गौड़ द्वारा विश्व जल दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर जिला के सचिव न्यायाधीश गौड़ ने बताया कि 22 मार्च को पूरे विश्व में हर वर्ष विश्व जल दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1993 में एक सामान्य सभा के माध्यम से इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रूप में मनाने का निर्णय किया। इस अभियान में लोगों की जागरूकता बढाने के लिये जल के महत्व की आवश्यकता और जल संरक्षण के बारे में समझाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। पानी की आवश्यकता हर मनुष्यों को है। कहा भी गया है, जल है तो हम है या जल ही जीवन है। प्रकृति पर्याप्त जल प्रदान करती है ताकि मनुष्य खा सके और जीवित रह सके, लेकिन मनुष्यों ने अपने फायदे के लिए प्रकृति को परेशान करना शुरू कर दिया है। इसलिये प्रकृति के संरक्षण और विशेष रूप से पानी के बारे में जागरूकता बढाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस की आवश्यकता थी। जिस पर लोगों को प्रकृति के लिए बढती समस्याओं से सतर्क किया जाये और पृथ्वी पर दुनिया हर दिन प्रदूषित होती जा रही है। हमें यह जानना जरूरी है कि हम प्रदूषण को कैसे कम कर सकते है और हमारी प्रकृति को संरक्षित कर सकते है।
उन्होंने बताया कि यह निर्विवाद सत्य है कि सभी जीवित प्राणियों की उत्पत्ति जल में हुयी है। वैज्ञानिक अब पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर पहले पानी की खोज को प्राथमिकता देते है। पानी के बिना जीवन जीवित ही नहीं रहेगा। इसी कारणवश अधिकांश संस्कृतियांॅ नदी के पानी के किनारे विकसित हुई है। दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी जिसमें भारत में पीने योग्य पानी की कमी एक मजबूत समस्या है। भारत में कई राज्य कई गांव पानी की कमी से पीड़ित है, जिसके परिणामस्वरूप किसान आत्महत्या तक कर लेते है। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर अत्यधिक निर्भर है और जल की कमी से कृषि बहुत कम होती है क्योंकि बारिश की कमी के कारण कम खेती की पैदावार होती है। इसके अलावा पानी के संसाधन जो उपयोग के लिये उपलब्ध है हमें उनका सही तरीके से उपयोग करना चाहिये। पानी हम सभी प्राणियों के जीवन में एक अहम भूमिका निभाता हैं।
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