रियासत कालीन परंपरा के अनुसार शाकद्वीपीय समाज ने मां नागणेची के चरणों में इत्र-गुलाल अर्पित कर होली का आगाज किया

बीकानेर में रियासत कालीन परंपरा के अनुसार शाकद्वीपीय समाज ने मां नागणेची के चरणों में इत्र-गुलाल अर्पित कर होली का आगाज किया

 

**बीकानेर, 23 फरवरी 2026** — बीकानेर शहर में होली के उत्सव की शुरुआत आज रियासत कालीन परंपरा के साथ हुई। शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज ने खेलनी सप्तमी (फाल्गुन सुदी सप्तमी) के अवसर पर मां नागणेची मंदिर प्रांगण में भजनों की प्रस्तुति दी, माता रानी के चरणों में इत्र और गुलाल चढ़ाकर होली खेलने की अनुमति मांगी। इसके बाद गुलाल उछालकर होलका का विधिवत आगाज किया गया।

भाई बंधु ट्रस्ट के महामंत्री नितिन वत्सस ने बताया कि शाम ढलते ही समाज के भक्त मंदिर पहुंचे। यहां भजनों की मधुर प्रस्तुति दी गई, जिसमें “हंस चढ़ी माँ आयी भवानी रे- सहाय करे सब देश की”, “पन्नो रे मारी जोड़ रो रे बीकोण रो बासी रे”, “जोधाणूं सु बीज है मंगाए प्रेमरस री मेहंदी राचडली”, “जयपुर में बाजार में पड़ियो प्रेमजी बोर” जैसे लोकप्रिय भजन गाए गए। भजनों से माता को रिझाने के बाद रात्रि 8 बजे इत्र-गुलाल अर्पित कर बीकानेर शहर में होली महोत्सव की अनुमति की अरदास की गई।

पुजारी राजेश सेवग और सुरेश सेवग ने सभी भक्तों को गुलाल का टीका लगाया और गुलाल उछालकर होलका की शुरुआत की। इस दौरान सुशील सेवग (उर्फ लालजी), विष्णु सेवग, सीताराम सेवग, मनमोहन सेवग, नितिन वत्सस, पवन सेवक, अरविंद सेवग, आशीष सेवग, चंद्र शर्मा, नीलेश शर्मा, राजा सेवग सहित मरुनायक मंडल के सदस्य गेवर जी भादाणी, अजय कुमार देराश्री, दारसा जोशी, बलु जोशी, महेश जी गज्जानी आदि मौजूद रहे। नगाड़े पर रामजी सेवग और चिराग सेवग ने संगत की।

इसके बाद देर रात गोगागेट से पारंपरिक गेर निकाली गई। गेर बागडियो के मोहल्ले, रामदेव मंदिर, चाय पट्टी, बड़ा बाजार, बैदो का चौक, मरुनायक चौक होते हुए सेवगो के चौक में संपन्न हुई। गेर में परंपरागत गीत जैसे “ओ लाल केशा”, “पापड़ली” आदि गाए गए।

समाज द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर सामूहिक प्रसाद का आयोजन भी किया गया, जिसमें हंसावतो की तलाई, सूर्य भवन, जनेश्वर भवन, शिव शक्ति भवन और श्यामौजी वंशज प्रन्यास भवन शामिल हैं।

यह परंपरा बीकानेर की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां नगर की कुलदेवी मां नागणेची (बीकानेर रियासत की कुलदेवी) से अनुमति लेकर ही होली का उत्सव शुरू होता है। समाज के गणमान्यजन इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।