### जेठानंद व्यास: बीकानेर के दिलों में बसे एक पिता तुल्य नेता
बीकानेर की रेतीली धरती पर राजनीति अक्सर चुनावी वादों और दलगत झगड़ों में उलझी नजर आती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन सीमाओं से ऊपर उठकर आम जन की सेवा को अपना धर्म मानते हैं। जेठानंद व्यास, बीकानेर पश्चिम के विधायक, ऐसे ही एक दूरदर्शी व्यक्तित्व हैं। वे न सिर्फ राजनीति करते हैं, बल्कि बीकानेर को अपना परिवार मानकर हर व्यक्ति की खुशी और दुख में शामिल होते हैं। जैसे एक पिता या बड़ा भाई अपने बच्चों का ख्याल रखता है, ठीक वैसे ही व्यास जी ने बीकानेर की जनता को अपनाया है। उनके प्रयासों से शहर की सांस्कृतिक धरोहर जीवंत होती है, और सामाजिक पहलें आम आदमी के जीवन को छूती हैं।
पुष्करणा ओलंपिक सावा, जो बीकानेर की अनूठी परंपरा है और हर दो साल में आयोजित होता है, व्यास जी के प्रयासों से एक नया आयाम पा रहा है। यह सावा न सिर्फ सामूहिक विवाह का उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी। 10 फरवरी 2026 को होने वाले इस सावे में व्यास जी ने शहरी परकोटे को एक बड़े आंगन जैसा बनाया है, जहां पूरा शहर परिवार की तरह इकट्ठा होता है। यहां दीवारें नहीं, बल्कि दिलों की दीवारें टूटती हैं। व्यास जी के नेतृत्व में परकोटा क्षेत्र को सजाया-संवारा गया, जिससे यह जगह न सिर्फ ऐतिहासिक महत्व की लगती है, बल्कि आम लोगों के लिए एक सुखद मिलन स्थल बन गई है। यह प्रयास दिखाता है कि वे बीकानेर की विरासत को संरक्षित करते हुए इसे जन-जन से जोड़ना चाहते हैं।
व्यास जी की दूरदृष्टि का सबसे भावुक उदाहरण है उनकी कन्या शगुन योजना। अपने माता-पिता की स्मृति में स्थापित ‘शिवकुमार मोहनप्यारी जनकल्याण ट्रस्ट’ के माध्यम से वे ओलंपिक सावे में दांपत्य सूत्र में बंधने वाली हर हिंदू कन्या को 11 हजार रुपये का शगुन देते हैं। यह राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक बंधन है। व्यास जी कहते हैं कि बीकानेर उनका परिवार है, और हर बेटी उनकी अपनी बेटी। यह पहल न सिर्फ गरीब परिवारों को राहत देती है, बल्कि समाज में कन्या सम्मान की भावना को मजबूत करती है। ऐसे में, वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक न्याय की मिसाल पेश करते हैं। यहां कोई पार्टी का झंडा नहीं, सिर्फ मानवता का रंग है।
व्यास जी का आम जन से जुड़ाव उनके रोजमर्रा के कार्यों में साफ झलकता है। चाहे ठंडी रातों में डागा चौक पर मूंगफली खाते हुए लोगों से बातचीत हो, या विधानसभा में महिलाओं, युवाओं और किसानों के हितों की आवाज उठाना। वे बजट पर चर्चा में कहते हैं कि विकास तभी सार्थक है जब वह आम आदमी तक पहुंचे। बीकानेर में गरीबों के मकानों को बचाने के संघर्ष से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, व्यास जी हर मुद्दे पर खड़े होते हैं। एक बुजुर्ग की शिकायत सुनकर वे तुरंत अधिकारियों को निर्देश देते हैं, जैसे कोई बड़ा भाई परिवार की समस्या सुलझाता है। यह जुड़ाव उन्हें हर आम और खास के दिल में बसाता है। यहां राजनीति नहीं, सेवा है; दल नहीं, दिल है।
जेठानंद व्यास जैसे नेता दुर्लभ हैं, जो राजनीति को सेवा का माध्यम बनाते हैं। वे साबित करते हैं कि सच्चा नेता वह है जो दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर जनता की परपीड़ा समझे और उसे दूर करे। बीकानेर की जनता उन्हें अपना मानती है, क्योंकि वे बीकानेर को अपना मानते हैं। ऐसे में, व्यास जी का योगदान न सिर्फ शहर को मजबूत बनाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है कि राजनीति दिल से की जाती है, दिमाग से नहीं।






