राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन की आवश्यकता और समाधान : राजेश्वर सिंह

फ़ाइल फोटो

विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर ।राजस्थान में ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के पुनर्गठन की वर्तमान प्रक्रिया अनावश्यक, समय, श्रम और संसाधनों की बर्बादी है। इसके बजाय, अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रत्येक पटवार मंडल में एक ग्राम पंचायत और प्रत्येक तहसील में एक पंचायत समिति की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। वर्तमान में प्रत्येक राजस्व जिले में जिला परिषद पहले से ही कार्यरत है।

राजस्व और विकास इकाइयों का समक्षेत्रीय होना प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करेगा और जन समस्याओं का समाधान त्वरित गति से हो सकेगा। यदि भविष्य में जनता की मांग के आधार पर नई ग्राम पंचायत या पंचायत समिति गठन की आवश्यकता हो, तो संबंधित पटवार मंडल या तहसील को विभाजित कर यह कार्य आसानी से किया जा सकता है।

चूंकि सरपंच, प्रधान और प्रमुख जैसे पदों के लिए अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), सामान्य वर्ग, पुरुष और महिला आदि के लिए परिवर्तनीय आरक्षण व्यवस्था लागू है, इसलिए किसी भी पंचायती राज संस्था में किसी एक जाति या समूह का स्थायी प्रभुत्व असंभव है। इस व्यवस्था में केवल सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों का निश्चित समयांतराल पर परिसीमन आवश्यक है।

लेखक: राजेश्वर सिंह, सेवानिवृत्त वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक अधिकारी एवं पूर्व अध्यक्ष, राजस्व मंडल, अजमेर।