विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर : इस वर्ष गणेशोत्सव की तैयारियां बीकानेर में जोर-शोर से चल रही हैं, और खास बात यह है कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए गौमय (गाय के गोबर) से बनी इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। गौ धन मित्र संगठन द्वारा बनाई जा रही इन मूर्तियों को न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देश-विदेश में भी भक्तों द्वारा सराहा जा रहा है।

गौ धन मित्र के निदेशक महेंद्र जोशी ने बताया कि इस गणेशोत्सव के लिए 3 इंच से लेकर डेढ़ फीट तक की गौमय गणेश मूर्तियों का निर्माण किया है। इन मूर्तियों की खासियत यह है कि ये बीज युक्त हैं, जो विसर्जन के बाद प्रकृति में पौधे के रूप में उग सकती हैं। ये मूर्तियां पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं और घर या बगीचे में ही आसानी से विसर्जित की जा सकती हैं। शास्त्रों के अनुसार, गाय के गोबर से बनी गणेश मूर्तियों का विसर्जन ही उचित माना गया है, क्योंकि गोबर को पवित्र और शुद्ध माना जाता है। माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी की उत्पत्ति की थी, और गाय का गोबर शास्त्रों में पवित्र होने के कारण इन मूर्तियों को “गोबर गणेश” के रूप में जाना जा रहा है।

महेंद्र जोशी बताते है कि गौ धन मित्र ने अब तक लगभग 1000 मूर्तियां बीकानेर से बाहर विभिन्न स्थानों पर भेजी हैं, जबकि स्थानीय भक्तों के लिए भी करीब 1000 मूर्तियां तैयार की गई हैं। इन मूर्तियों की मांग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है। हाल ही में एक भक्त इन मूर्तियों को हांगकांग ले गए, जबकि पुष्करणा समाज की एक महिला भक्त ने इसे अमेरिका तक पहुंचाया।

14 अगस्त को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीकानेर दौरे के दौरान पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास के कर कमलों से गौ धन मित्र की गौमय गणेश मूर्ति भेंट की गई थी, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। यह मूर्तियां न केवल धार्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं।

गौ धन मित्र के इस प्रयास को भक्तों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। संगठन का कहना है कि ये मूर्तियां पूजा, यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आदर्श हैं और विसर्जन के बाद ये जलाशयों को प्रदूषित नहीं करतीं। गणेशोत्सव 2025 के लिए गौमय गणेश मूर्तियों की यह पहल बीकानेर को पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला रही है।













