विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर. छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध बीकानेर शहर में धार्मिक उत्सवों की अनूठी परंपरा हर माह देखने को मिलती है। सावन में जहां भक्त पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना करते हैं, वहीं एक परिवार पिछले 28 वर्षों से गणेश चौथ से अनंत चतुर्दशी तक पार्थिव गणेश मूर्तियों का निर्माण और पूजन कर एक अनोखी परंपरा निभा रहा है। यह आयोजन रामरतन जी व्यास स्मृति सेवा संस्थान द्वारा किया जाता है, जो गणेश भक्तों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है।

संस्था के अनुसार, यह परंपरा मां पार्वती द्वारा उबटन से भगवान गणेश के निर्माण की पौराणिक कथा से प्रेरित है। कथा के अनुसार, मां पार्वती ने उबटन से विनायक का निर्माण किया, और शिव से युद्ध के बाद गजमुख स्वरूप में गणेश को गणों का ईश बनाया गया। इसी प्रेरणा से संस्था द्वारा पार्थिव गणेश मूर्तियों का निर्माण शुरू किया गया। शुरुआत में सवा लाख मूर्तियां बनाई जाती थीं, लेकिन अब प्रतिवर्ष 1100 पार्थिव गणेश मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। इनमें से प्रतिदिन एक मूर्ति का विशेष पूजन, अभिषेक और 1008 नामों से अर्चना-हवन किया जाता है।

पंडित नितेश व्यास ने बताया कि इस आयोजन मे विशेष छप्पन भोग, 1008 दीपकों से दीपदान, डांडिया, 1008 लड्डुओं का भोग और पात्र साधना महागणपति का पूजन। संस्था के पास एक स्वयंभू स्वेतर्क वनस्पति गणेश भी हैं, जिन पर भक्त अपनी मनोकामनाएं जैसे पुत्र प्राप्ति आदि के लिए कच्चा सूत बांधते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त पुनः भोग चढ़ाने आते हैं, जिससे यह परंपरा और भी जीवंत हो उठती है।

यह आयोजन न केवल बीकानेर के गणेश भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी दर्शाता है। रामरतन जी व्यास स्मृति सेवा संस्थान की यह अनूठी पहल छोटी काशी की धार्मिक समृद्धि को और अधिक निखार रही है।













