संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा की विवादित टिप्पणी : पीबीएम अधीक्षक को बताया ‘कमजोर कड़ी’

 विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर। बीकानेर संभाग के संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा द्वारा कांग्रेस के पूर्व विधायकों डॉ. बीड़ी कल्ला, गोविंद राम मेघवाल, पूर्व अध्यक्ष यशपाल गहलोत सहित अन्य कांग्रेस नेताओं के सामने पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया को ‘कमजोर कड़ी’ बताने की बात सामने आई है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों ही अधिकारी राज्य सरकार द्वारा नियुक्त हैं और संभागीय आयुक्त खुद सरकार की प्रशासनिक श्रृंखला का हिस्सा हैं।

सूत्रों के अनुसार, आयुक्त मीणा ने विपक्षी नेताओं के समक्ष यह स्वीकार किया कि डॉ. घीया प्रशासनिक व्यवस्था में एक कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं। हालांकि, पीबीएम अधीक्षक की नियुक्ति स्वयं राज्य सरकार द्वारा की गई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह टिप्पणी सरकार की अपनी छवि को ही प्रभावित कर रही है। संभाग का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी यदि विपक्ष के सामने सरकार की आंतरिक कमजोरियों पर चर्चा कर रहा है, तो इससे निचले स्तर के प्रशासनिक प्रबंधन पर भी सवाल उठते हैं।

यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी और निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अधिकारी को अपनी भूमिका में निष्पक्ष रहते हुए सरकार की छवि को मजबूत रखना चाहिए, न कि विपक्षी दलों के सामने किसी सहकर्मी या नियुक्त अधिकारी को अपयशित करने की सोच रखनी चाहिए। इससे न केवल प्रशासनिक एकजुटता प्रभावित होती है, बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर पड़ता है।

प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, और उम्मीद की जा रही है कि उच्च स्तर पर इसकी जांच होगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियां न दोहराई जाएं। अधिकारियों को याद दिलाया जा रहा है कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की नीतियों को लागू करना और उसकी साख बनाए रखना है, न कि आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उजागर करना।

उल्लेखनीय है कि संभागीय आयुक्त राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी, पीबीएम अस्पताल का अध्यक्ष भी है.

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