भारत पर अमेरिकी टैरिफ, नागरिकों की भूमिका और लोकतंत्र में प्रजा का महत्व : विनय थानवी

विनय एक्सप्रेस राष्ट्रीय आलेख, विनय थानवी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर  दिनांक 1 अगस्त से 25% टैरिफ एवं आर्थिक दंड (penalty) लगाने का निर्णय अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में एक नया मोड़ लेकर आया है। यह निर्णय न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और लोकतंत्र की कार्यशैली को भी चुनौती देता है। ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि हम यह समझें कि लोकतांत्रिक देश में नागरिकों की क्या भूमिका होती है और कैसे वे अपनी जागरूकता और सक्रियता से राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकते हैं।

टैरिफ का असर और उसकी पृष्ठभूमि:

अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% टैरिफ का उद्देश्य भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में महंगा बनाकर वहां की घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देना है। हालांकि यह अमेरिका की “प्रोटेक्शनिस्ट नीति” का हिस्सा है, लेकिन इससे भारत के निर्यात, विशेष रूप से स्टील, एल्यूमिनियम, टेक्सटाइल, आईटी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इस कदम से भारत में व्यापार, रोज़गार और विदेशी निवेश जैसे क्षेत्रों में चिंता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में सरकार की भूमिका के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय भूमिका और जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

नागरिकों की भूमिका:

लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक केवल मतदाता ही नहीं होता, बल्कि वह एक सजग प्रहरी भी होता है। जब कोई बाह्य संकट उत्पन्न होता है, तो नागरिकों को निम्नलिखित रूपों में राष्ट्रहित में योगदान देना चाहिए

घरेलू उत्पादों का समर्थन:

विदेशी टैरिफ का प्रभाव कम करने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेड इन इंडिया’ जैसे अभियानों को समर्थन देकर देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती दी जा सकती है।

लोकतांत्रिक दबाव:

नागरिकों को अपने जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा करनी चाहिए कि वे ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को उचित नीति बनाने हेतु प्रेरित करें।

सोशल मीडिया, लेखन, संवाद और बहस के ज़रिए लोग जनमत तैयार कर सकते हैं जो सरकार को नीति निर्माण में दिशा दे सकता है।

शांति और सहिष्णुता बनाए रखना:

बाहरी दबाव के समय आंतरिक एकता अत्यंत आवश्यक होती है। किसी भी प्रकार की अफवाह या भावनात्मक उकसावे से बचते हुए राष्ट्रहित में एकजुट रहना नागरिक धर्म है।

लोकतंत्र में प्रजा की भूमिका का महत्व:

लोकतंत्र का मूल स्तंभ है – “जनता की सरकार, जनता द्वारा और जनता के लिए”। इसका सीधा अर्थ यह है कि देश की नीतियाँ जनता की इच्छाओं और ज़रूरतों के आधार पर तय होती हैं। जब नागरिक सक्रिय और जागरूक होते हैं, तो सरकार भी उत्तरदायी और पारदर्शी रहती है।

इस संदर्भ में जब कोई अंतरराष्ट्रीय संकट सामने आता है, जैसे कि व्यापारिक टैरिफ, तो यह जरूरी हो जाता है कि प्रजा अपने विचारों, सवालों और सहयोग के माध्यम से नीतियों को संतुलित और राष्ट्रीय हित में बनाए रखे।

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ भारत के लिए एक चुनौती है, लेकिन यह संकट एक अवसर भी है — अपनी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का। लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल चुनाव तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर राष्ट्रीय संकट में वे महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हैं।

आज भारत को ऐसे ही जागरूक, सहिष्णु और उत्तरदायी नागरिकों की ज़रूरत है जो न केवल सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की गरिमा बनाए रखें।