हाईकोर्ट द्वारा सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 रद्द: ईमानदार अभ्यर्थियों का रोष और भविष्य की चुनौतियां, पढ़िए विनय एक्सप्रेस मीडिया समूह के संपादक विनय थानवी का यह आलेख

विनय एक्सप्रेस, आलेख-विनय थानवी.राजस्थान हाईकोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को 2021 की पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह निर्णय पेपर लीक, डमी अभ्यर्थियों और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अनियमितताओं जैसे गंभीर मुद्दों के आधार पर लिया गया। इस परीक्षा में 7.97 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और 3.80 लाख ने हिस्सा लिया था, जिसमें से 859 पदों के लिए चयन हुआ था। कोर्ट के इस फैसले ने जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है, वहीं उन ईमानदार अभ्यर्थियों में रोष पैदा किया है, जिन्होंने मेहनत और निष्ठा से यह परीक्षा उत्तीर्ण की थी और अब पुनः बेरोजगार हो गए हैं।परीक्षा रद्द होने का आधारहाईकोर्ट की जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने अपने 202 पेज के फैसले में कई तथ्यों को आधार बनाया:

पेपर लीक का घोटाला: विशेष जांच दल (SOG) की जांच में पुष्टि हुई कि RPSC के एक पूर्व सदस्य और एक मौजूदा सदस्य ने पेपर लीक में संलिप्तता दिखाई। पेपर लीक माफिया, जैसे जगदीश बिश्नोई, ने कोचिंग संस्थानों और परीक्षा केंद्रों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।

डमी अभ्यर्थियों की मौजूदगी: वीडियोग्राफी और अन्य सबूतों से पता चला कि कई जगहों पर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट्स ने परीक्षा दी, जिसने प्रक्रिया की विश्वसनीयता को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।

RPSC की नाकामी: कोर्ट ने RPSC की कार्यप्रणाली को दोषी ठहराया, जिसमें निगरानी की कमी और आयोग के सदस्यों की मिलीभगत शामिल थी। कोर्ट ने माना कि अनियमितताएं इतनी व्यापक थीं कि पूरी प्रक्रिया को “दूषित” माना गया।

SOG ने इस मामले में 50 से अधिक प्रशिक्षु सब-इंस्पेक्टरों और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह घोटाला संगठित और सुनियोजित था।

ईमानदार अभ्यर्थियों की पीड़ा :

इस फैसले ने उन अभ्यर्थियों को गहरे संकट में डाल दिया है, जिन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की थी। कई चयनित अभ्यर्थी ट्रेनिंग पूरी कर फील्ड में काम शुरू कर चुके थे। अब, इस फैसले के बाद उनकी नौकरी छिन गई है, और वे पुनः बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे हैं।

चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर और तनवीर अहमद ने कोर्ट में तर्क दिया कि पूरी भर्ती को रद्द करना उन लोगों के साथ अन्याय है, जिन्होंने निष्पक्ष रूप से परीक्षा दी। कई अभ्यर्थियों ने अन्य सरकारी नौकरियों को छोड़कर इस भर्ती में हिस्सा लिया था, और अब उनके सामने आर्थिक और भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है। उनकी मांग थी कि केवल दोषी अभ्यर्थियों को बाहर किया जाए और बाकी चयन को बरकरार रखा जाए। हालांकि, कोर्ट ने माना कि अनियमितताओं का दायरा इतना बड़ा था कि पूरी प्रक्रिया को बचाना असंभव था।

राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य :

यह मामला राजस्थान में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह एक प्रमुख मुद्दा था, जिसमें विपक्ष ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भर्ती घोटाले को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। वर्तमान भाजपा सरकार ने भी शुरू में इस भर्ती को बचाने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट के फैसले ने उनकी कोशिशों पर पानी फेर दिया।

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस फैसले को “सत्य की जीत” बताया, जबकि कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने शुरू में भ्रामक बयान दिया, जिसे बाद में स्पष्ट करना पड़ा। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर देरी का आरोप लगाते हुए युवाओं के दिल्ली कूच की चेतावनी दी है। यह स्थिति दर्शाती है कि यह मामला अभी और तूल पकड़ सकता है।

आगे का रास्ता :

हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि 2021 की भर्ती में शामिल अभ्यर्थी, जो अब उम्र सीमा पार कर चुके हैं, नई भर्ती में हिस्सा ले सकेंगे। सरकार ने 2025 में 1,051 पदों के लिए नई SI भर्ती की घोषणा की है, जिसमें 2021 के 859 पद और 192 नए पद शामिल होंगे। यह उन अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात है, जो ओवरएज हो चुके हैं।लेकिन, कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं। क्या सरकार और RPSC भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे? क्या ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए कोई विशेष प्रावधान होगा, जैसे उनके पिछले प्रदर्शन को ध्यान में रखना? क्या सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी?

साहसिक कदम :

हाईकोर्ट का यह फैसला भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने की दिशा में एक साहसिक कदम है। हालांकि, यह उन ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए एक कड़वा अनुभव है, जिन्होंने मेहनत से यह मुकाम हासिल किया था। सरकार को अब नई भर्ती प्रक्रिया को तेजी से और पारदर्शी तरीके से पूरा करना होगा, साथ ही RPSC की कार्यप्रणाली में सुधार लाना होगा। ईमानदार अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए विशेष राहत के उपाय किए जाने चाहिए, ताकि उनका भरोसा व्यवस्था पर कायम रहे। यह समय है कि राजस्थान सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ को रोके।