विनय एक्सप्रेस समाचार, बीकानेर. अखिल भारतीय साहित्य परिषद की स्थानीय इकाई द्वारा हर्ष निदान केंद्र के सभागार में हाल ही में प्रकाशित उपन्यास तत्वमसि’ (लेखक: श्रीधर पराड़कर) की चर्चा आयोजित की गई।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. मूलचंद बोहरा ने पुस्तक की विभिन्न परतों को खोलते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय परंपरा के विरुद्ध फैलाई गई भ्रांतियों का खंडन करती है तथा संवाद के माध्यम से सनातन भारतीय समाज को भाषाई संस्कार प्रदान करती है।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अखिलानंद पाठक ने पुस्तक में निहित स्वस्थ समाज के सूत्रों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि यह पुस्तक वाद-विवाद से ऊपर उठकर सनातन नैतिक मूल्यों की वकालत करती है।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री अन्नाराम शर्मा ने इसे **भाव, भाषा और विचार का त्रिवेणी संगम** करार दिया, जिसमें भारतीय सभ्यता, संस्कृति और परंपरा का समृद्ध आप्लावन संभव है।
रितु चौधरी ने पुस्तक के इतिहासबोध पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास पराजय का नहीं, अपितु गौरव का इतिहास है, जिसे पुनर्लेखन की आवश्यकता है। पूर्व पार्षद सुधा आचार्य ने भारतीय गौरव के मान-मर्यादाओं को पुनः स्थापित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. रामगोपाल शर्मा (प्राचार्य, राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान) ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए घोषणा की कि संस्थान में इस पर शोध, चर्चा एवं विमर्श के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
कवयित्री मोनिका गौड ने संचालन करते हुए गोवा को पर्यटन स्थल भर नहीं, बल्कि सारस्वत प्रदेश और अध्यात्म की ऐतिहासिक नगरी के रूप में प्रस्तुत किया।
डॉ. बसंती हर्ष (जिला अध्यक्ष) ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘तत्वमसि’ व्यक्ति, परिवार और समाज को संस्कार देने वाली पुस्तक है, जो युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
चर्चा में प्रमोद शर्मा, शिवकुमार आर्य, श्रीनिवास शर्मा सहित अन्य गणमान्यजन शामिल हुए।













