विनय एक्सप्रेस आलेख : नवीन गर्ग, नई दिल्ली। भारत, एक ऐसा देश जो अपनी सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहर और आर्थिक संभावनाओं के लिए विश्वभर में जाना जाता है। आज, जब हम वैश्वीकरण के दौर में हैं, तब भी हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हमारे स्थानीय उद्योग, छोटे व्यवसायी, कारीगर और किसान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान न केवल एक नारा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का एक मजबूत आधार है। यह अभियान हमें यह याद दिलाता है कि स्थानीय उत्पादों को अपनाकर हम न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकते हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित कर सकते हैं।
लोकल फॉर वोकल का महत्व:

लोकल फॉर वोकल’ का मतलब है अपने स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना और उनके प्रति गर्व का भाव रखना। भारत में छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये उद्यम न केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन करते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और पारंपरिक कला को भी जीवित रखते हैं। खादी, हस्तशिल्प, मसाले, हर्बल उत्पाद, और स्थानीय खाद्य पदार्थ जैसे उत्पाद हमारी पहचान हैं। इनका समर्थन करके हम न केवल अपने देश के कारीगरों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि आयात पर निर्भरता को भी कम करते हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम :

लोकल फॉर वोकल’ अभियान आत्मनिर्भर भारत की नींव है। जब हम स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं, तो हमारा पैसा हमारे ही देश में रहता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। यह अभियान हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए ताकि वे वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली प्रदेश इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। हम व्यापारियों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर ध्यान दें ताकि ‘मेड इन इंडिया’ की पहचान विश्व स्तर पर और मजबूत हो।
दिल्ली में लोकल फॉर वोकल की पहल :

दिल्ली, भारत की राजधानी होने के साथ-साथ एक व्यापारिक केंद्र भी है। यहां के बाजारों में स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग व्यापार मंडल कई पहल कर रहा है। हम व्यापारियों को जागरूक कर रहे हैं कि वे अपने व्यवसाय में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। इसके लिए हमने कई कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान चलाए हैं, जिनमें छोटे उद्यमियों को डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हाल ही में दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित 43वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में भी ‘लोकल फॉर वोकल’ की थीम को प्रमुखता दी गई। इस मेले में स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया, जिसे देश-विदेश के लोगों ने सराहा। यह एक उदाहरण है कि कैसे हम अपने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर ले जा सकते हैं।
चुनौतियां और समाधान :

लोकल फॉर वोकल को अपनाने में कुछ चुनौतियां भी हैं। कई बार उपभोक्ता विदेशी ब्रांड्स की ओर आकर्षित होते हैं, क्योंकि स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग और पैकेजिंग में कमी रहती है। इसके लिए हमें अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और प्रचार को बेहतर करना होगा। साथ ही, सरकार द्वारा प्रदान की जा रही योजनाओं जैसे स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया का लाभ उठाकर छोटे उद्यमियों को सशक्त करना होगा। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली प्रदेश इस दिशा में सरकार और व्यापारियों के बीच एक सेतु का काम कर रहा है। हम व्यापारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते हैं और उनकी नीतियों को लागू करने में सहयोग करते हैं। साथ ही, हम उपभोक्ताओं से अपील करते हैं कि वे खरीदारी करते समय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।
भविष्य में उठाने होने मजबूत कदम , और जन जागरूकता भी अतिआवश्यक: नवीन गर्ग

नवीन गर्ग के अनुसार लोकल फॉर वोकल’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। यह हमें आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली प्रदेश इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य है कि दिल्ली के हर बाजार में स्वदेशी उत्पादों की चमक दिखे और हर व्यापारी इस अभियान का हिस्सा बने। आइए, हम सब मिलकर ‘लोकल फॉर वोकल’ को एक जन-आंदोलन बनाएं। अपने स्थानीय उत्पादों को अपनाएं, अपने कारीगरों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करें और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करें। क्योंकि जब हम अपने लोकल के लिए वोकल होंगे, तभी हमारा भारत विश्व गुरु बनेगा।

लेखक नवीन गर्ग , भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष है













